हर्ष कुमार-
अमर उजाला और दैनिक जागरण के संपादक/मालिक जरूर पढ़ें-
Youtube पर स्वतंत्र पत्रकारों की सफलता ने क्रांतिकारी काम किया है। इसे देखकर अब सारे अखबार ललचा रहे हैं और अपने यूट्यूब चैनलों पर पैसा पानी की तरह बहा रहे हैं। बड़ा-बड़ा स्टाफ रख रहे हैं। स्टूडियो बना रहे हैं। एक एक दिन में बीस बीस वीडियो डाले जा रहे हैं लेकिन किसी एकाध वीडियो को छोड़कर किसी वीडियो पर व्यूज नहीं आ रहे हैं। इसे समझने की कोशिश ना मालिक कर रहे हैं संपादक।
अब देखिये दोनों स्क्रीनशॉट्स। उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी का इंटरव्यू दैनिक जागरण के चैनल पर मुझे दिखा। तेरह दिन में एक हजार भी लोगों ने नहीं देखा। जबकि जागरण के सब्सक्राइबर्स की संख्या एक करोड़ दिख रही है। साफ है सब फर्जी सब्सक्राइबर्स ही हैं जो दिखावे के लिए बढ़वा दिए गए हैं। यही वजह है कि ना दर्शक आ रहे हैं और ना ही वीडियो को प्रमोट कर रही है यूट्यूब।


इसी तरह अमर उजाला का भी हाल है। हालांकि अमर उजाला के वीडियो का हाल जागरण जैसा नहीं लेकिन फिर भी देखिए अलंकार अग्निहोत्री जैसे महत्वपूर्ण व चर्चित वीडियो पर चार दिन में केवल 605 व्यू? मैं अखबार का मालिक होता तो इन चैनलों के संपादकों को बाहर निकाल चुका होता।
इन लोगों को यह समझ नहीं आया है कि ज्यादा वीडियो डालने से कुछ नहीं होता। दिन में दो ही वीडियो डालें लेकिन कायदे के, सारगर्भित व प्रभावशाली। हम लोगों के दर्शक तो इनके दस प्रतिशत ही हैं लेकिन मरे से मरा वीडियो भी तीस चालीस हजार लोग तो देख ही लेते हैं।
इन जैसे यूट्यूब चैनल्स पर पैसा बहाने के लिए अगर इन अखबारों के मालिक मुझे कंसल्टेंट के रूप में दो चार करोड़ रुपये दे दें तो मेरा दावा है कि ये चैनल दौड़ने लगेंगे। पर ऐसा कोई करेगा नहीं। क्योंकि इन संस्थानों में ऐसे लोग निर्णायक पदों पर बैठे हैं जो प्रिंट मीडिया में बरसों रहे और केवल चापलूसी के दम पर आगे बढ़े। संपादकीय समझ जीरो थी ये हम जानते थे। बस मालिकों की जी हजूरी करके काम चलाते रहे।
मेरा दावा है कि ये सभी चैनल घाटे में चल रहे हैं। वर्ना जिस प्रकार का ब्रांड नेम इनके पास है ये तो करोड़ों के फायदे में होने चाहिए थे।
गुणानंद जखमोला-
सीएम धामी, मुझे इंटरव्यू दीजिए। ये तो हद है। एक प्रमुख हिन्दी अखबार के यू-ट्यूब चैनल पर अंकिता भंडारी मामले पर मुख्यमंत्री का एक इंटरव्यू है। यह इंटरव्यू लगभग दो सप्ताह पहले लिया गया है। इसको महज 4 लाइक मिले हैं और आज रात 9 बजकर 18 मिनट तक केवल 676 व्यूज मिले हैं और कमेंट केवल दो हैं।

मैं यह बात कभी नहीं कहता न ही यह दावा करता। पर बता दूं कि फेसबुक पर आईटी सेल की तमाम पाबंदियों के बावजूद पिछले 28 दिनों में मुझे 19 लाख से भी अधिक व्यूज मिले हैं और 4 हजार कमेंट्स आए हैं। ऐसे में प्रमुख हिन्दी अखबार को इंटरव्यू देने से क्या लाभ?
सीएम को मुझे इंटरव्यू देना चाहिए। तय है मैं इस चाटुकार अखबार जैसी चापलूसी नहीं करूंगा। हां, इतना जरूर है कि मेरी पोस्ट पढ़ने के बाद इस चाटुकार अखबार के व्यूज बढ़ जाएंगे।


