
दिलीप खान-
किसी ने लिखा कि दुनिया को बरगलाने के लिए NASA झूठ बोल रहा है. 13 अरब साल पहले की तस्वीर ‘खींची’ ही नहीं जा सकती. उसे किसी ने रिप्लाई किया कि NASA कभी-कभी किसी तस्वीर को आज से 1-2 करोड़ साल आगे का बताकर ‘बेचता’ है.
ये लोग ‘अनुमान’ के आधार पर स्पेस को भी समझना चाहते हैं! ऊपर की दुनिया पर सामान्य अपडेट रखने वालों को भी पता होगा कि आइंस्टाइन के सापेक्षता के सिद्धांत ने अंतरिक्ष विज्ञान को बदलकर रख दिया. उनके इस सिद्धांत में कहा गया था कि ‘समय’ अपने-आप में कुछ नहीं है. यह स्पेस के सापेक्ष है. इस पर बीती एक सदी में तमाम प्रयोग हुए.
हवाई जहाज़ को पृथ्वी की गति की दिशा में उड़ाकर घड़ी का समय मापा गया था, तो धरती पर मौजूद घड़ी से वह स्लो पाया गया. आइंस्टाइन ने प्रकाश की गति का एक पैमाना सेट कर दिया. ‘टाइम ट्रैवल’ का सिंपल गणित यह है कि अगर कोई व्यक्ति/चीज़ एक सेकंड के अंतराल में एक सेकंड से ज़्यादा या कम समय हासिल कर लें, तो आगे-पीछे देखा जा सकता है. हालांकि यह फ़िल्मों की तरह नहीं होता.
जेम्स वेब टेलीस्कोप ने जो किया वह अभूतपूर्व है. इससे पहले हब्बल सबसे कारगर टेलीस्कोप था. हमने हब्बल के ज़रिए अंतरिक्ष की तमाम रहस्यमयी चीज़ें देखीं. जेम्स वेब पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर से तस्वीरें भेज रहा है.
नंगी आंखों से हम-आप अंतरिक्ष में जो-कुछ देखते हैं वह पुराना माल होता है. रीयल टाइम में आप सूर्य नहीं देखते. वह 8 मिनट पुराना होता है. इसी तरह कई तारे लाखों साल पुराने होते हैं. कई करोड़ों. इन्हीं चीज़ों को लगभग रीयल टाइम में देखने और धरती से देखने के बीच का जो अंतराल होता है, सबकुछ उसी में छुपा है.
जब कोई स्पेस टेलीस्कोप दूसरी सिस्टम की कोई तस्वीर लेता है, तो वह सामान्य कैमरे की तरह नहीं होता. उसमें लाइट का विश्लेषण होता है. जैसे, जेम्स वेब की ख़ासियत है इंफ़्रारेड को बेधना.
मान लेते हैं कि दो प्रकाश वर्ष दूर की कोई ‘रीयल टाइम’ तस्वीर भी खींची जाती है, तो वह दो प्रकाश वर्ष ‘भविष्य’ की तस्वीर होगी. वैज्ञानिक, समय के इस गैप का विश्लेषण करते हैं. आज और भविष्य की तस्वीरें. आज और अतीत की तस्वीरें.
वैज्ञानिक पैटर्न को समझते हैं. उसकी मॉडलिंग करते हैं. गणितीय फ़ॉर्मूला और कलर कोडिंग की मदद से आगे-पीछे की स्थिति का सटीक अंदाज़ा लगाते हैं. इतना सटीक कि अब इसे अंदाज़ा कहना ग़लत होगा.
अंतरिक्ष की दुनिया बहुत रहस्यमयी है. इसे पढ़ना किसी भी मिथक और काव्य से ज़्यादा रोमांच देता है. मेरा फ़ेवरेट है नेबुला. वहां पॉपकॉर्न की तरह तारे फूटते रहते हैं. इस टाइम-स्पेस से देखें तो वह प्रक्रिया लाखों साल की होती है, लेकिन हमारे यहां जैसे जूते की फ़ैक्ट्री में दिन भर में हज़ारों जूते बनते हैं, उसी गति से वहां तारे बनाने का काम चलता है. ब्लैक होल तो ख़ैर अजूबा ही है.
ऑथैंटिंक जगहों से पढ़िए. विशेषज्ञों से सीखिए. सूचना और ज्ञान पाइए. नासा की वेबसाइट कमाल की है. वहां आम भाषा में चीज़ें समझाई जाती हैं. घूम आइए. बाक़ी, दिल करे, तो आइंस्टाइन पर एक बार नज़र मार लीजिए.

रामा शंकर सिंह-
अंतरिक्ष से ये नई तस्वीरें नासा के सबसे शक्तिशाली नये टेलीस्कोप से ली गई हैं जिसकी निर्माण लागत ही ७५ हज़ार करोड़ है।






शायद हज़ारों लाखों प्रकाश वर्ष दूर या कि अनंत में फैला यह ब्रह्मांड और उसमें बहुत ही छोटा सा यह ग्रह पृथ्वी जिसमें इंसानों ने युद्ध हार जीत कर अपनी सीमायें बना लीं हैं जिन्हें देश कहा जाता है और ऐसे क़रीब २०० देश हैं। इन देशों में साज़िश कर लड़वा भिजवा कर मूर्ख बना कर कुछ तुर्रम खां बन बैठे हैं जिन्हें राष्ट्राध्यक्ष कहते हैं । जनता के पैसे से ही वेतन देकर पुलिस फ़ौज हथियार रख लिये हैं जो उसी जनता को दबाने के काम आते हैं या किसी अन्य देश को धमकाने के लिये।
सौ बरसों से कम ज़िंदा रहने वाले दोपाया पशुओं ने अपने अलग अलग भगवान व धर्म बना लिये हैं जिनकी कथा कहानियों गप्पों से वे अपने मतावलंबियों का शोषण करते हैं भरमाते हैं।
अब कोई बायडन शी जीनपिंग या इनसे कमतर शक्ति का मोदी अपने को नया ईश्वर कहलाने लगे और अहंकार की ऐंठन से दुहरा हो कर चलने लगे तो उसे प्लेनेटोरियम जा कर अपनी वास्तविक औक़ात देख लेना चाहिये कि ब्रम्हाण्ड में उसकी क्या हैसियत है और कितने दिनों की।
एक समय वह भी था जब कांग्रेस अध्यक्ष देवकांत बरुआ ने कहा था कि ‘ इंदिरा इज इंडिया ‘ लेकिन बाद में पार्टी ने इस बयान से किनारा कर लिया । न आज बरुआ को कोई जानता है और इंदिरा गांधी को भी कब तक कोई याद करेगा ? उस पार्टी का विकल्प होने पर भाजपा के अध्यक्ष ने उससे भी बढ़कर बोल दिया कि ‘ नरेंद्र ही नहीं सुरेंद्र भी ‘ हैं यानी मोदी सुर नर मुनि सबके अधिष्ठाता हैं। लेकिन पार्टी और संघ की भी यह हालत है कि किसी ने न कह पाया कि बयान निजी और भावना के अतिरेक में दिया है।
पृथ्वीवासियों का भविष्य न धर्म में हैं और न राजनीतिक छछूंदरों में ! भविष्य सिर्फ़ विज्ञान शिक्षा और शोध में हैं जिससे भारत बहुत बहुत दूर है।
आपको न समझ में आये तो अजान की टेर लगाते रहिये या चालीसा का पाठ करते रहिये या रविवार को चर्च में अपने पापों को स्वीकार करते रहिये और दुश्चक्रों में फँसे रहिये बग़ैर जीवन का सही सच्चा अर्थ जाने।



सुनीत कुलश्रेष्ठ आलोक
July 14, 2022 at 1:55 pm
जानकारी का बहुत अद्भुत खजाना। लेखक को धन्यवाद