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आज के अखबार:जम्मू कश्मीर में काला दिन, एलजी का आयोजन फिस्स, खिसियाना और जागरण का शीर्षक     

संजय कुमार सिंह

यह तो हुई डबल इंजन वाले राज्य की बात लेकिन महाराष्ट्र में येन-केन-प्रकारेण सरकार चलाते रहने वाली भाजपा फिर चुनाव जीतने के लिए न सिर्फ बंटेंगे तो कटेंगे जैसे नारों का उपयोग कर रही है बल्कि प्रधानमंत्री ने भी कहा है, एक हैं तो सेफ हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया ने प्रधानमंत्री के कहे को हाइलाइट किया है। हिन्दी में वह इस प्रकार है, एकता की बात करना भी अपराध हो गया है। वे एक हैं तो सेफ हैं कि भावना को भी घुमा (ट्विस्ट कर) देते हैं। यही नहीं, कल दीवाली के दिन उन्होंने यह भी कहा है, आज ऐसी सरकार है जो सीमा पर एक ईंच भूमि पर भी समझौता नहीं कर सकती है। एक समय था जब कूटनीति के नाम पर सर क्रीक पर कब्जे की नीति बनाई जा रही थी। यही नहीं, हेडलाइन मैनेजमेंट भी जोरों पर है। चीन सीमा पर डिसएंगेजमेंट पूरा हो चुका है। आज मिठाइयों के आदान-प्रदान की खबर है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, “प्रधानमंत्री ने ‘एक देश एक धर्मनिरपेक्ष सिविल कोड’ की बात कही है”। द टेलीग्राफ की खबर के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा है सैनिकों पर भरोसा कीजिये, दुश्मन पर नहीं। यह अलग बात है कि सैनिक और दुश्मन को पहचानने में चूक न हो इसका कोई उपाय अच्छे-अच्छों के पास नहीं होता है।     

आज दिल्ली के अखबार नहीं आये हैं पर कुछ अखबारों के मुंबई संस्करण का जुगाड़ मैंने कर लिया है। कोलकाता का द टेलीग्राफ तो दुर्गापूजा की छुट्टियों में भी इंटरनेट पर रहता रहा है। पहले सोचा था कि आज लिखने लायक कुछ होना नहीं है इसलिये टेलीग्राफ को ही उलट पुलट रहा था और उससे यह दिलचस्प जानकारी मिली कि जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के साथ उसे राज्य से केंद्र शासित प्रदेश बना दिये जाने के मौके पर सरकारी आयोजन भी किया जाता था। कल दीवाली के मौके पर यह आयोजन था और भाजपा समेत किसी भी राजनीतिक दल ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पहले ही इसकी घोषणा कर दी थी। लेकिन दैनिक जागरण का आज का शीर्षक है, “आज जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए ‘काला दिन’ है”, दीवाली के मौके पर ऐसा क्यों बोलीं महबूबा मुफ्ती? आप जानते हैं कि झारखंड और महाराष्ट्र में चुनाव है। भाजपा के लिए कई कारणों से इन राज्यों में चुनाव जीतना जरूरी है। इनमें एक ईवीएम की साख बनाये रखना भी है। लोकसभा चुनाव में सीटें कम होने के बाद प्रधानमंत्री ने, “मैंने पूछा ईवीवी जिन्दा है कि मर गया”, कहकर परोक्ष रूप से बता दिया था कि ईवीएम से चुनाव जीते जाते तो सीटें कम होतीं?

उसके साथ जो सब कहा और बाद में जो हुआ उससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि वे हरियाणा और कश्मीर में चुनाव हारने के लिए तैयार थे। कश्मीर में तो भाजपा की सरकार नहीं ही बनी पर हरियाणा में आश्चर्यजनक रूप से भाजपा की सरकार बन गई। इसके कई कारण हो सकते हैं और इनमें एक ईवीएम की सेटिंग भी है। मजाक में ही सही, कहा जा रहा है कि ईवीएम की बैट्री जितनी चार्ज थी, उसमें भाजपा के वोट का प्रतिशत उतना ही ज्यादा था। मोबाइल फोन उपयोग करने वाले जानते हैं कि मतदान के तीन दिन बाद रखी हुई ईवीएम की बैट्री का 99 प्रतिशत चार्ज रहना मुश्किल है और इस कारण आरोप है कि ये बदले हुए ईवीएम हैं। अगर इनमें वाकई भाजपा के वोट ज्यादा नहीं हैं तो बदलने के आरोप अपने आप बेमतलब हो जायेंगे। हालांकि, किसी और को ज्यादा हों तो भी बदला जायेगा और उसे कम वोट वाले ईवीएम से हराया जा सकता है। पता नहीं, चुनाव आयोग के 1600 पेज के जवाब में इसका जवाब है कि नहीं। पर मेरा मुद्दा वह नहीं है। मैं कहना चाहता हूं कि नरेन्द्र मोदी के शासन में सभी संवैधानिक संस्थाओं की साख खराब हुई है, चुनाव आयोग भी उनमें एक है और वह खुद निष्पक्ष व स्वतंत्र दिखने का प्रयास भी करता नजर नहीं आ रहा है। दूसरी ओर, नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा चुनाव जीतने के हर संभव उपाय करती (रही) है और इसमें हिन्दू-मुसलमान करना ही नहीं, शहीद सैनिकों के नाम पर वोट मांगना शामिल है।

ठीक है कि यह पहले से होता रहा है लेकिन अब बंटेंगे तो कटेंगे तक पहुंच गया है और महाराष्ट्र में इसका बड़ा जोर है। खबर यह भी है कि इसके लिए मुख्यमंत्री योगी की भारी मांग है। कई दिन हो गये चुनाव आयोग के लिए यह मुद्दा नहीं है और अब आज के अखबारों से पता चलता है कि प्रधानमंत्री ने भी इसे अपने ढंग से अपने कुतर्कों के साथ अपना लिया है। उनके कुतर्कों में बीजगणित का एक फॉर्मूला मशहूर है। इसपर पढ़े-लिखे लोग भी ताली बजाते हैं। अभी वह मुद्दा नहीं है। अभी महाराष्ट्र जीतने के लिए अखबारों के जरिये चुनावी तैयारियां या हेडलाइन मैनेजमेंट को रेखांकित करना है। आप जानते हैं कि कई दिन की खबरों से कल तक लद्दाख में चीन सीमा पर सरकारी करामात की उपलब्धियां छपती रही हैं। आज मिठाइयों के आदान-प्रदान की खबर और फोटो है। इन सब तैयारियों के बाद भाजपा जीत गई तो यह समझना मुश्किल होगा कि खेल हिन्दू मुसलमान से हुआ, ईवीएम से या किसी और कारण से। फिलहाल भाजपा की वाशिंग मशीन और बेहतर हो गई है यह तो सबको पता है। आज हिन्दुस्तान टाइम्स में खबर है, फडनविस ने कहा, नवाब मलिक के लिए प्रचार नहीं करेंगे। महाराष्ट्र में भाजपा की राजनीति, आधी रात के शपथग्रहण और राज्यपाल के तौबा कर लेने के बाद  महाराष्ट्र के राजनीतिक दलों में तोड़फोड़ और दलबदल के बाद जो स्थिति बनी है उसमें नवाब मलिक एनसीपी के उम्मीदवार हैं। मुंबई भाजपा प्रमुख आशीष सेलर ने नवाब मलिक पर आरोपों की चर्चा करते हुए कहा है कि एनसीपी प्रमुख अजीत पवार को उन्हें टिकट नहीं देना चाहिये था। उनकी राय में महाराष्ट्र में बहुत लोग ऐसा मानते हैं। आप समझ सकते हैं कि ऐसा कहकर भाजपा नेता सहयोगी पार्टी (टूटी हुई) का विरोध कर रहे हैं। और करें भी क्यों नहीं, सहयोगी पार्टी ने उस उम्मीदवार को टिकट दिया है जिसपर भाजपा ने कई आरोप लगाये। पर वह जेल चला गया, भाजपा में शामिल नहीं हुआ। जाहिर है, भाजपाई आरोप वाशिंग मशीन से धुलने वाले थे और अजीत पवार ने उसे किसी आम डिजटर्जेंट से धोकर मैदान में उतार दिया है और यह भाजपा के लिए परेशानी का कारण बन गया है।  

आज जब दिल्ली के मेरे बाकी अखबार नहीं आये हैं तो द टेलीग्राफ का इंटरनेट संस्करण आया है। इसमें छपी एक खबर के अनुसार कश्मीर में यूटी दिवस पर आयोजन में कोई नहीं आया, भाजपा वाले भी नहीं। इससे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा खिसिया गये हैं। श्रीनगर डेटलाइन से मुजफ्फर रैना की खबर के अनुसार, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को गुरुवार को बड़ी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। उनकी अध्यक्षता में आयोजित केंद्र शासित प्रदेश स्थापना दिवस समारोह में किसी भी दल के नवनिर्वाचित विधायकों ने हिस्सा नहीं लिया। उपराज्यपाल ने नव निर्वाचित विधायकों पर उनके “दोहरे मानदंड” के लिए तीखा हमला बोला। उपराज्यपाल प्रशासन ने गुरुवार को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के निर्माण की पांचवीं वर्षगांठ मनाई। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी), कांग्रेस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के विधायकों ने कार्यक्रम का बहिष्कार किया, जबकि भाजपा विधायक आश्चर्यजनक रूप से अनुपस्थित रहे।

इसके बावजूद, भाजपा के कुछ नेताओं ने कार्यक्रम का बहिष्कार करने के लिए सत्तारूढ़ एनसी और अन्य दलों की कड़ी आलोचना की। एक नेता ने कहा कि यह पाकिस्तान के हाथों में खेलने जैसा है। नाराज उपराज्यपाल ने आश्चर्य जताया कि केंद्र शासित प्रदेश के विधायक के रूप में शपथ लेने वाले लोग कार्यक्रम में कैसे शामिल नहीं हुए। उन्होंने नौकरशाहों और सरकारी अधिकारियों की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, “मैं कल से सोशल मीडिया पर देख रहा हूं कि केंद्र शासित प्रदेश के विधायक के रूप में शपथ लेने वाले लोग भारतीय संविधान के बारे में बात कर रहे हैं (कार्यक्रम का बहिष्कार कर रहे हैं)।” उपराज्यपाल ने आगे कहा, “इस दोहरे मापदंड से जम्मू-कश्मीर को कोई लाभ नहीं होगा। यह एक वास्तविकता है कि जम्मू-कश्मीर आज एक केंद्र शासित प्रदेश है और सदस्यों ने शपथ ली है तथा  संविधान के प्रति अपनी सच्ची आस्था और निष्ठा की पुष्टि की है। जब यह एक राज्य बन जाएगा, तो हम निश्चित रूप से एक राज्य दिवस मनाएंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि, माननीय प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने कहा है कि उचित समय पर राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा।” एलजी के हवाले से एक आधिकारिक बयान में भी यह सब कहा गया है सिर्फ “दोहरा चरित्र” उसमें नहीं है। एलजी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उचित समय पर राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया था और ऐसा होने पर वह राज्य का स्थापना दिवस भी मनाएंगे। उन्होंने कहा कि तथ्य यह है कि जम्मू-कश्मीर अब केंद्र शासित प्रदेश है। मनोज सिन्हा ने “भाषा को तोड़-मरोड़ कर पेश करने वाले लोगों” पर भी कड़ी नाराजगी जताई और “भगवान के लिए” उनसे ऐसा करने से बचने के लिए कहा। किसी का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा, “मैं भाषा को तोड़-मरोड़ कर पेश करने वालों से कहना चाहता हूं कि, काफी प्रयासों के बाद स्थिति में सुधार हुआ है। जो लोग इसे खराब करने का सपना देख रहे हैं, मैं उनसे कहना चाहता हूं कि भगवान के लिए, ऐसा करना बंद करें। इससे कुछ हासिल नहीं होगा।”

यह स्पष्ट नहीं है कि सिन्हा किस पर निशाना साध रहे थे, लेकिन यह टिप्पणी दक्षिणपंथी इकोसिस्टम द्वारा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की आलोचना के कुछ दिनों बाद आई है, जिन्होंने केंद्र शासित प्रदेश में हाल ही में हुए हमलों में शामिल बंदूकधारियों के लिए “आतंकवादी” के बजाय “उग्रवादी” शब्द का इस्तेमाल किया था। सिन्हा ने कहा कि “आतंकवाद” के खिलाफ लड़ाई में अगले तीन महीने महत्वपूर्ण हैं। श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में आयोजित स्थापना दिवस समारोह में भाग नहीं लेने के लिए भाजपा ने एनसी और अन्य की आलोचना की। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता सुनील सेठी ने टेलीग्राफ से कहा, “यह बेतुका है और पाकिस्तान के हाथों में खेलने जैसा हैं। इस मुद्दे पर उनके बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन वे बाहर क्या संदेश भेज रहे हैं? यह सरकार के एक अंग द्वारा दूसरे अंग का बहिष्कार करने जैसा है। जम्मू-कश्मीर में “सरकार का बहिष्कार अराजकता पैदा करेगा।”

अखबार ने आगे लिखा है, हैरानी की बात यह है कि भाजपा के 29 विधायकों में से किसी ने भी इस कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा के राज्यसभा सदस्य गुलाम अहमद खटाना ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। स्थानीय भाजपा नेता डॉ. हिना शफी, जो विधायक नहीं हैं, भी वहां मौजूद थीं। वैसे, शफी ने कहा कि वह खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड की प्रमुख के तौर पर इस कार्यक्रम में मौजूद थीं। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि भाजपा विधायकों ने स्थानीय स्तर पर इस अवसर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। लेकिन भाजपा के आधिकारिक व्हाट्सएप मीडिया समूह, जहां वे दिन के दौरान महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का विवरण साझा करते हैं, ने इस पर कोई अपडेट नहीं दिया। सेठी ने दावा किया कि विधायक दिवाली मनाने में व्यस्त होने के कारण जम्मू में थे। उन्होंने कहा कि वे अगले कुछ दिनों में कश्मीर का दौरा करेंगे। नेशनल कांफ्रेंस के बिजबेहरा विधायक डॉ. बशीर वीरी ने कहा कि उन्हें कोई निमंत्रण नहीं मिला है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम का बहिष्कार करना एक नीतिगत निर्णय था। “(अनुच्छेद 370 और संबंधित मुद्दों पर) एक वैचारिक संघर्ष है। उन्होंने कहा, “हम किसी के सामने अपना रुख नहीं छोड़ेंगे।”

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पहले ही कह दिया था कि ‘यूटी फाउंडेशन डे’ में शामिल नहीं होंगे। जी न्यूज की खबर के अनुसार  नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने गुरुवार को मनाए जा रहे जम्मू-कश्मीर ‘केंद्र शासित प्रदेश फाउंडेशन डे’ प्रोग्राम में शाम‍िल नहीं होने का फैसला किया है। लेफ्टिनेंट गवर्नर के नेतृत्व वाला प्रशासन दो साल से 31 अक्टूबर को यूटी स्थापना दिवस मनाता आ रहा है। सरकार ने पिछले साल इस दिन को मनाने के लिए कई समारोह और कार्यक्रम आयोजित किए थे और साथ ही कॉम्पिटीशन भी आयोजित की थीं। नेशनल कांफ्रेंस के साथ कांग्रेस समेत सत्ता में मौजूद सियासी पार्टियों ने पहले ही कह दिया था कि उनका कोई भी नेता जम्मू-कश्मीर में यूटी फाउंडेशन डे में हिस्सा नहीं लेगा।

महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर को राज्य से केंद्र शासित प्रदेश बनाने के इस आयोजन और दिन को लोगों के लिए ‘काला दिन’ कहा है। श्रीनगर से पीटीआई की एक खबर के अनुसार, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने गुरुवार को कहा कि केंद्र शासित प्रदेश स्थापना दिवस जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए ‘काला दिन’ है। जेएंडके कांग्रेस के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने भी यूटी स्थापना दिवस को ‘काला दिन’ करार दिया और कहा कि लोगों से इसे मनाने की उम्मीद करना ‘बहुत ज्यादा मांगना’ है। लेफ्टिनेंट गवर्नर प्रशासन ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर यूटी का पांचवां स्थापना दिवस मनाया। (पीटीआई)

ईटीवी भारत की खबर के अनुसार उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने केंद्र शासित प्रदेश दिवस के आयोजन में  विधायकों की अनुपस्थिति पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। सुरिंदर चौधरी ने कहा कि हम दिवाली की पूर्व संध्या पर जम्मू-कश्मीर के लोगों को शुभकामनाएं देते हैं और चाहते हैं कि हम अगली दिवाली केंद्र शासित प्रदेश के बजाय राज्य में मनाएं। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर के लिए बलिदान दिया है। वहां के लोगों की सुरक्षा की है और भारत की आजादी को मजबूत किया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस में ऐसे नेता शामिल हैं जो इस देश को मजबूत बनाने और जम्मू-कश्मीर को सशक्त बनाने के लिए समर्पित हैं। चौधरी ने कहा कि हमने कभी भी केंद्र शासित प्रदेश को स्वीकार नहीं किया और हम यूटी दिवस की कामना भी नहीं करेंगे क्योंकि यूटी जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ धोखा है. हम दुआ करते हैं कि जब अगली दिवाली मनाई जाए तो वह राज्य में मनाई जाए।

विमान उड़ाने की धमकी देने वाला गिरफ्तार

टाइम्स ऑफ इंडिया में आज छपी पहले पन्ने की एक खबर के अनुसार विमान उड़ाने की धमकी देने वाला ‘लेखक’ गिरफ्तार कर लिया गया है। जगदीश उइके पर ये संदेश भेजने का आरोप है। गुरुवार को उसे नागपुर स्टेशन पर गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने कहा कि उसने अपना अपराध कुबूल लिया है और आतंकवाद पर अपनी किताब का प्रचार पाने के लिए उसने ऐसा किया।

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