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सुख-दुख

जनमोर्चा अख़बार के कार्यकारी संपादक सुरेश पाठक का निधन!

अवनीश कुमार मिश्रा-

नि:शब्द…. बात 14 अप्रैल वर्ष-2011 की है। डा. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद अब अयोध्या में मास्टर आफ मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म की पढ़ाई के बीच इंटर्नशिप के लिए अमर उजाला के फैजाबाद कार्यालय में वरिष्ठ पत्रकार आदरणीय श्री अधीर प्रदीप जी के पास पहुंचा। बड़े भाई समान एयरोनाटिक्स इंजीनियर श्री सुरेंद्र यादव जी (अब हमारे बीच में नहीं हैं) रेफरेंस से मिला और इंटर्नशिप के लिए बात की।

श्री अधीर प्रदीप जी ने कहा कि पत्रकारिता सीखना है तो जनमोर्चा अखबार के दफ्तर में जाओ। उन्होंने जनमोर्चा के तत्कालीन कार्यकारी संपादक श्री सुरेश पाठक जी को काल करके मेरी सिफारिश की। मेरे अंदर भी जल्द से जल्द पत्रकारिता सीखने की जिद थी। मोटरसाइकिल उठाई और जनमोर्चा के गद्दोपुर स्थित प्रिटिंग प्रेस के गेट पर पहुंच गया।

वहां ताला लटका देखा, तो श्री अधीर प्रदीप जी को फोन किया। उन्होंने बताया कि गद्दोपुर में तो अखबार की छपाई होती है। कार्यालय चौक बजाजा में है। वहां से मोटरसाइकिल मोड़ी और सीधे बजाजा स्थित जनमोर्चा के कार्यालय पहुंचा। सामने कुर्सी-मेज पर बैठे गोरे-चिट्टे तेजस्वी चेहरे के व्यक्ति से पूछा कि श्री सुरेश पाठक जी से मिलना है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वह ही पाठक जी हैं, बताओ। मैंने श्री अधीर प्रदीप जी का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने पत्रकारिता सीखने के लिए आपके पास भेजा है।

इतना सुनते ही वह मुस्कुराए और अपने सामने रखी कुर्सी पर बैठने को कहा। काफी सकुचाते हुए मैं कुर्सी पर बैठा और पत्रकारित को लेकर उनसे ढेर सारी बातें हुईं। उसके बाद उनके मार्गदर्शन में इंटर्नशिप शुरू हुई। करीब 11 माह बाद उन्होंने मानदेय दिलाना भी शुरू किया। फरवरी 2015 में दैनिक जागरण साहिबाबाद, गाजियाबाद में नौकरी शुरू करने के पहले तक उनके मार्गदर्शन में पत्रकारिता का ककहरा सीखा (बीच में कुछ समय के लिए अमर उजाला बाराबंकी में काम किया) । वह मेरे पहले संपादक हैं।

आज सुबह जनमोर्चा में ही वरिष्ठ साथी रहे श्री अब्दुल अकील जी का वाट्सएप पर श्री सुरेश पाठक जी के निधन का संदेश मिला तो स्तब्ध रह गया। कुछ समय बाद वर्ष-2011 से 2015 तक उनके साथ बिताए गए एक-एक पल-पल मानों आंखों के सामने घूमने लगे। मन बहुत व्यथित है। इस बात का भी बहुत दु:ख है कि दिल्ली-एनसीआर आने के बाद उनसे शुरूआत में सिर्फ एक बार मुलाकात हुई थी।

हालांकि, मेरे हर प्रमोशन पर उनका बधाई और शुभकामना भरा काल जरूर आया। उन्होंने खूब आगे बढ़ने का आशीर्वाद दिया। इस बार सोच रखा था कि फैजाबाद जाऊंगा तो सर से मिलूंगा, लेकिन शायद यह ईश्वर को मंजूर नहीं था। प्रार्थना है कि ईश्वर सर को अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें।


सूर्यकांत पांडेय-

प्रेस क्लब अयोध्या के अध्यक्ष सुरेश पाठक जी का देर रात एक अस्पताल में निधन। श्री पाठक जी से मेरा संबंध 1986 में हुआ था तब वह जनमोर्चा के सहायक संपादक थे। मिलनसार और अतिमृदु भाषी पाठक जी का सहयोग समर्थन और प्रेम सदैव मिलता रहा।

वे पूर्णकालिक लोगों को पत्रकारिता की प्रेरणा देते हुए बताते कि इससे जीवन को सीखने में मदद मिलेगी। मुझे भी उन्होंने अपने अखबार फैजाबाद की आवाज का जिला संवाददाता नियुक्त किया था।

उनके असामयिक निधन से मैं बहुत दुखी हूं। उनकी आत्मा को उचित स्थान मिले और परिवार को दुःख सहन करने की क्षमता, यही कामना है।

फोटो सुल्तानपुर में एक आयोजन को संबोधित करते हुए।

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