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सुख-दुख

ये जो जनता है वो पहले consumer हुई और अब कस्टमर में कन्वर्ट हो चुकी है!

पंकज मिश्रा-

Post modern world में जनता खत्म हो कर consumer की कैटेगरी से replace हो चुकी है | प्रभुवर्ग के लिए जनता कस्टमर है बस … यही आज का सच है | लोगो का पर्सनल data यूं ही नही भगवान बना हुआ है | जिसके पास जितना डेटा है वह उतना ही सर्वशक्तिमान है , उतना ही सर्वव्यापी है , उतना ही सर्वद्रष्टा है | यही तो होती है न भगवान की परिभाषा |

और जैसे पूंजी का कोई देश नही है वैसे ही consumer का भी कोई देश नही होता | इसीलिए तमाम protected economies विदेशी पूंजीनिवेश के लिए मरी जा रही है | उनके लिये red carpet बिछाए welcome करने को तैयार खड़ी है | commodities के लिए , industry के लिए , सर्विस सेक्टर के लिए देशों की सीमाएं खत्म हो चुकी है |

स्वदेशी , आत्मनिर्भरता यह सब colonisation के दौर के टर्म्स थे और protected economies में भी इनकी relevence बची हुई थी | परंतु नवउदारवाद और globalisation के अंधड़ में यह सब नीतियां उधिया गई | इस दौर में यह सब outdated terms है | यदि कोई इसकी बात करता है तो वह आपको सिवाय मूर्ख बनाने के अलावा कुछ नही कर रहा |

IITS aur IIMS के प्लेसमेंट देख ले वहां कैसी कम्पनियों को टॉप ग्रेड किया जाता है | किसमे प्लेसमेंट के लिए लड़के पागल हुए पड़े है |

तो देशी पूंजी लूटे या विदेशी , CONSUMER की किस्मत में लुटना ही है | न jio mart आपको इंडियन होने का discount देता है न amazon आपको इंडियन होने पर कोई सरचार्ज लगाता है | उनके लिए कोई देशभक्ति नही है , न ही वो राष्ट्रवाद की घुट्टी पीते है |

तो इस नई दुनिया का नया नारा है , दुनिया के consumers एक हो जाओ , तुम्हारे पास बचाने के लिए सिर्फ तुम्हारे खून पसीने की कमाई है |

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