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वेब-सिनेमा

फ़ेसबुक अंतिम साँस ले रहा है, इंस्टा भी बस कुछ वर्षों का मेहमान है!

नितिन त्रिपाठी-

मैं इस बात पर गर्व महसूस करता हूँ कि मैं टेक्नोलॉजी का सदैव से अर्ली एडाप्टर रहा.

1995 में पहली बार इंटरनेट देखा आईआईटी कानपुर में और समझ आ गया यही भविष्य है. 1996 में खाने के पैसे भले न बचें पर दो सौ रुपये घंटे में डायल अप वाला इंटरनेट भीका जी कामा प्लेस में एकमात्र साइबर कैफ़े में यूज़ करते थे. पहला ईमेल अकाउंट हॉटमेल में 1996 में बनाया था. 1997 में अमेरिका में तो पर लग गये थे. पहला डॉट कॉम डोमेन 1997 में लिया था. 1997 में ही पहला मोबाइल फ़ोन, पहला हैंडहेल्ड डिवाइस, पहली इंटरनेट की लीज़ लाइन सब ले ली थी.

उस दौर में ऑनलाइन चैटिंग अर्थात् अमेरिका ऑनलाइन एकमात्र विकल्प था. उनकी मोनोपोली चलती थी. फिर आईआरसी प्रोटोकॉल आया, जिस पर विभिन्न लोगों ने अपने सर्वर बना लिये थे. जैसे आज फ़ेसबुक ग्रुप्स एडमिन का भौकाल है उस दौर में आईआरसी सर्वर एडमिन का भौकाल होता था. उस समय मेरे कई सारे आईआरसी सर्वर थे जिसके कई सारे मॉडरेटर्स थे अराउंड द ग्लोब. होने वाली बीबी से पहली बार जब मिला तो उससे यही पूछा था कि आईआरसी हैंडल क्या है, aim निक नेम क्या है. उसका उत्तर था वह ऑनलाइन अनजान लोगों से चैट नहीं करती. हमे समझ आ गया कि अब समय आने वाला है मोबाइल चेंज करने का, चैट के स्क्रीन नेम बदलने का, पुरानी ईमेल त्यागने का और मकान बदलने का.

1998 में अल्टाविस्टा और हॉटबोट जैसे सर्च इंजन यूज करता था तो 1998 -99 से गूगल यूज कर रहा हूँ. ऑनलाइन शॉपिंग 1997 से कर रहा हूँ.

मॉडर्न वर्ल्ड में फ़ेस बुक की वर्तमान आईडी 2009 से है, एक और आईडी थोड़ी और पुरानी है तब नाम thefacebook होता था. तब से लेकर अब तक भी दुनिया बहुत बदल चुकी है. आर्टिफिकल इंटेलिजेंस ने पूरा टेक्नोलॉजी सेगमेंट बदल दिया है.

फ़ेस बुक का समय समाप्त दिख रहा है. ऐसे नेटवर्क अनादि काल से चले आ रहे हैं. ऐसे हर नेटवर्क के दो कार्य होते हैं. १) कपल मैचिंग २) फ़ैमिली फ़्रेंड्स. कपल मैचिंग फ़ेसबुक से समाप्त हुवे कई साल हो गये. और जब से टिंडर आदि आये फ़ेस बुक बुड्ढों का अड्डा रह गया है. रही सही कसर ट्रॉलर्स ने पूरी कर दी तो अब यहाँ फ़ैमिली फ़्रेंड्स भी शक्रिय नहीं रहते, कमेंट नहीं करते.

फ़ेस बुक अंतिम साँस ले रहा है. इंस्टा भी बस कुछ वर्षों का मेहमान है, उधर पहले से ही जेन ज़ी फ़ैमिली को ब्लॉक करके रखती है.

ओवर आल आने वाले पाँच वर्षों में टेक्नोलॉजी इतनी तेज़ी से बदलेगी कि बड़े बड़े लोग कैच अप नहीं कर पायेंगे. यदि समय के साथ दौड़े नहीं तो यह 30-40 वाली जनरेशन समय से पूर्व ही सठिया गई वाली केटेगरी में मानी जायेगी.

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