
संजय कुमार सिंह
आज के अखबारों में अरविन्द केजरीवाल की रिक्यूजल याचिका पर खबर नहीं के बराबर है। यह एक दिलचस्प, अपनी तरह का अनूठा राजनीतिक और कानूनी मामला है। इसे पहले पन्ने पर भी रखा जा सकता था। मेरे नौ अखबारों में सिर्फ टाइम्स ऑफ इंडिया में यह पहले पन्ने पर है। न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और अब पक्षपात एक चर्चित मुद्दा रहा है। कानून के एक छात्र की राय में मामला रीढ़ नहीं होने का है। पूरा मामला चर्चा में रहा है। जज लोया से लेकर यशवंत वर्मा के मामले में जो सब हुआ उसमें रीढ़ की हड्डी कहीं नजर ही नहीं आई। अगर किसी को दिखी हो तो न्यायमूर्ति वर्मा ने इस्तीफे में जो लिखा उससे रीढ़ का पूरा मामला खारिज हो जाता है। उपराष्ट्रपति की नौकरी इसपर जा चुकी है और भ्रष्टाचार की शिकायतों का हिसाब नहीं रखने का झूठ तथा शिकायतों की बड़ी संख्या का मामला भी है। ऐसे में रिक्यूजल के लिए अपील करनी पड़ी, सीबीआई के जरिए सरकारी वकील ने समर्थन किया, सॉलीसिटर जनरल अरविन्द केजरीवाल के प्रति खासे नाराज नजर आए। आज अमर उजाला में छपी खबर के अनुसार, न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा है, …. मेरे पूरे करियर में पहली बार किसी ने मुझे रिक्यूज करने के लिए कहा है, उम्मीद है अच्छा फैसला दूंगी। मुझे जरा अटपटा लगा। रिक्यूज करने के लिए कहना क्यों पड़ा, उनने खुद क्यों नहीं किया? याचिका उन्हीं ने सुना, वही फैसला देंगी – मुझे जरा अटपटा लग रहा है। बहुत सारे सवाल हैं। आज जवाब किसी अखबार में नहीं है। अमर उजाला ने इस खबर को काफी जगह दी है लेकिन सबको पढ़कर भी बहुत कुछ समझ में नहीं आया। एक शीर्षक है, आपने अच्छी जिरह की, बन सकते हैं अधिवक्ता। मुझे लगता है भारतीय न्याय व्यवस्था ने अरविन्द केजरीवाल को अपनी वकालत खुद करने के लिए मजबूर किया और यह भी एक मुद्दा है। जहां तक अच्छा वकील बनने की बात है आईआईटीयन कुछ भी बन सकता है। आईएएस बनकर करता भी है लेकिन वह अलग मामला है। मीडिया में इस मसले पर चर्चा क्यों नहीं है?
यह इसलिए जरूरी है कि अरविन्द केजरीवाल ने सीबीआई के जरिए आम आदमी पार्टी के खिलाफ जो सब किए जाने का आरोप लगाया वही तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के खिलाफ ईडी के जरिए किया जाता दिख रहा है। तब मामला हाईकोर्ट में था अब सुप्रीम कोर्ट में भी है। एक तरफ न्यायिक व्यवस्था का यह हाल है और दूसरी ओर, मुख्य न्यायाधीश ने चुनाव आयोग का मतदाता सूची के काम में न्यायिक अधिकारियों को लगा दिया। काम फिर भी नहीं हुआ और मूल शिकायत – एसआईआर के लिहाज से कम समय है, का कुछ पता नहीं चला और इसी एसआईआर के कारण लाखों लोग वोट देने से वंचित रह गए हैं। वह भी तब जब घुसपैठिये तलाशे जाने थे बाद में लॉजिकल डिसक्रिपेंसी ठीक की जाने लगी। इसमें लाखों लोग परेशान हुए, खर्च हुआ जिसकी कोई जरूरत नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने जो किया वही भाजपा चाहती थी और भाजपा का काम हो गया। जनता अपने मताधिकार से वंचित रह गई। मुझे नहीं पता, ऐसा क्यों हुआ। आम आदमी पार्टी के अऱविन्द केजरीवाल ने जो आरोप लगाए हैं उसमें एक यह भी है सीबीआई ने जो मांग की वह पूरा हुआ। कहीं इस मामले में ऐसा तो नहीं है कि चुनाव आयोग ने जो चाहा वही हुआ। जो भी हो, न्याय होना ही नहीं चाहिए, होता हुआ दिखना भी चाहिए। इसके लिए काफी कुछ किया जाना है। कोई करे, पर हो। मांग तो मीडिया को ही करना है।
आज आंबेडकर जयंती है। अमर उजाला में पहले पन्ने पर पंजाब सरकार का विज्ञापन है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा है, डॉ. भीमराव अंबेडकर जी का जीवन संघर्ष, ज्ञान और संकल्प का अद्वितीय उदाहरण है। उनके विचार हमें एक ऐसे समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं, जहां हर नागरिक को समान अधिकार, सम्मान और अवसर प्राप्त हों। आइए, हम उनके आदर्शों को अपनाकर सामाजिक न्याय, समानता और सशक्तिकरण के उनके सपने को साकार करने का संकल्प लें। आज ही देशबन्धु की सेकेंड लीड है, मतदाता सूची से बाहर किए गए लोग नहीं कर पाएंगे मतदान – बंगाल में एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला। जाहिर है, आंबेडकर जयंती के दिन यह एक बड़ी खबर है और वैसे भी लीड होनी चाहिए थी। अंग्रेजी अखबारों में इंडियन एक्सप्रेस और द हिन्दू में यह खबर लीड है। हिन्दी अखबारों – अमर उजाला और नवोदय टाइम्स में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है लेकिन चुनाव जीतने के लिए कुछ भी करते दिखने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘घोषणा’ है। उन्होंने कहा है, “कल्पनाओं को साकार व संकल्पों को पूरा करेगा महिला आरक्षण कानून”। यह ‘खबर’ नवोदय टाइम्स में भी पहले पन्ने पर है। चार कॉलम के बॉक्स में छपी इस ‘खबर’ का शीर्षक है, “सबसे बड़े निर्णयों में एक की दहलीज पर भारत : मोदी”। इंडियन एक्सप्रेस और द हिन्दू की लीड लाखों मतदाताओं को एसआईआर के जरिए मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की चिन्ता और सवाल हैं। इसके साथ बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार क्या किया। द हिन्दू का शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को एसआईआर की विसंगतियों पर लताड़ा और कहा मतदान एक भावनात्मक अधिकार है। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने कहा है, “हम आगामी चुनाव के गुस्से में अंधे हो रहे हैं”।
यह दिलचस्प है कि आंबेडकर जयंती के दिन टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार आम आदमी पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल ने हाईकोर्ट की जज से कहा, आपके आदेशों ने हमें तकरीबन अपराधी करार दिया …. वे जज के पक्षपाती होने की आशंका पर अपनी बात रख रहे थे। आज यह खबर सोशल मीडिया पर छाई हुई है लेकिन अखबारों में पहले पन्ने पर नजर नहीं आई। द हिन्दू में पहले पन्ने की खबर है, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, परिसीमन से दक्षिणी राज्य प्रभावित नहीं होंगे। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पांच राज्यों में चल रहे चुनाव के बीच अचानक महिला आरक्षण का मामला ले आए हैं और इसके साथ जो मुद्दे चर्चा में हैं उनमें लोकसभा क्षेत्रों का परिसीमन भी है। इससे संबंधित मामलों और मुद्दों को जानने वाले समझते हैं कि यह जल्दबाजी में किया जाने वाला काम नहीं है और नरेन्द्र मोदी का निशाना कहीं और है। सरकार तो अपने मुद्दों का प्रचार कर ही रही है। प्रचारक भी माहौल बनाने में लगे हैं। पद्मविजेता प्रचारक और पत्रकार ने तो बताया है कि कांग्रेस भी मौके पर ऐसे काम करती रही है। पर वह अलग मुद्दा है। ऐसे समय में यह उम्मीद की जा रही थी कि एसआईआर के तहत घुसपैठियों को तलाशने की जगह लॉजिकल डिसक्रिपेंसी की नई श्रेणी के तहत जिन लोगों को बाहर किया गया था उनमें जिन लोगों ने अपने दस्तावेज दिए हैं और जिनका मामला सुप्रीम कोर्ट की बनाई ट्रिब्यूनल के समक्ष था पर सुना नहीं जा सका उन्हें सुप्रीम कोर्ट वोट देने की इजाजत देगा।
हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर बताती है कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, अभी तक जिनके मामलों की जांच नहीं हो पाई है उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं मिलेगा। मुझे यह विचारधारा का मामला लगता है और जज की विचारधारा के आधार पर न्याय न मिलने की अपनी आशंका जताने वाली अरविन्द केजरीवाल की खबर आज हिन्दुस्तान टाइम्स में सिंगल कॉलम में छपी है। दिलचस्प यह है कि महिला आरक्षण पर प्रधानमंत्री की राय भी सिंगल कॉलम में है। हालांकि, दि एशियन एज में यह लीड है। शीर्षक है, मोदी ने कहा – नारी शक्ति कानून से भारत एक नया इतिहास बनाएगा। इस खबर के फ्लैग शीर्षक के अनुसार प्रधानमंत्री चाहते हैं कि इसपर वार्ता हो, सहयोग मिले तो पहले की एक सोंच पूरी करेंगे। यह दिलचस्प है कि नरेन्द्र मोदी और उनकी पार्टी नारी आरक्षण की बात तो करती है लेकिन 39 प्रतिशत महिला सांसद पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और उसकी नेता ममता बनर्जी का विरोध कर रहे हैं। दि एशियन एज ने अमित शाह का कहा पहले पन्ने पर तीन कॉलम में छापा है। शीर्षक है, बंगाल से ममता का बेदखल होना ‘दीवारों पर लिखा है’। सरकारी प्रचार वाली दोनों खबरें यहां पहले पन्ने पर हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों की अपील सुनने से इनकार किया – सिंगल कॉलम की खबर है।
द टेलीग्राफ ने देश-दुनिया की पूरी स्थिति बताने वाली चार खबरों से बताया है कि जज यानी सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया कि बाहर किए गए मतदाताओं के लिए वोटिंग का सवाल ही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट इस पर अपना दिमाग बाद में लगाएगा। जूरी यानी चुनाव आयोग ने कहा है किसी भी बूथ में वेब कैमरा खराब हो, कम समय के लिए भी निष्क्रिय रहे तो पुनर्मतदान का आदेश दिया जा सकता है। भले ही उस दौरान किसी अनियमितता की शिकायत नहीं हो। अगर ऐसा है तो बैलट पत्र से चुनाव कराने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए क्योंकि जब बूथ लूटे जाते थे तो कैमरे नहीं होते थे। हालांकि अब जब कैमरे हैं तो चुनाव आयोग ने वीडियो फुटेज नहीं देने का नियम बना रखा है या देना मुश्किल बना रखा है। ऐसे में चुनाव आयोग का यह आदेश राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल के खिलाफ है। तीसरी खबर भी चुनाव, चुनाव आयोग और मतदाता सूची से संबंधित कार्रवाई की है। इसके अनुसार, एक महिला ने आरोप लगाया है कि एक नॉन बैंकिंग वित्तीय कंपनी ने पूर्व में उसे कर्ज दिया था लेकिन ताजा आवेदन को खारिज कर दिया। कारण यह बताया गया है कि नाम मतदाता सूची से डिलीट हो गया है। इस तरह, खबर कहती है कि मतदाता सूची से नाम हटने से आपकी वित्तीय जीवनरेखा भी प्रभावित हो सकती है। चौथा शब्द गॉड यानी ईश्वर है। इसके अनुसार, इतिहास के पहले अमेरिकी मूल के पोप, लियो ने कहा है कि उन्हें “ट्रम्प प्रशासन से कोई डर नहीं है”। यह बात उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट में उन्हें अत्यधिक उदार और “अपराध के मामले में कमजोर” बताते हुए आलोचना करने के बाद कही। ट्रम्प ने एक तस्वीर भी पोस्ट की जिसमें उन्होंने यीशु मसीह जैसी संत-समान शक्तियों का संकेत दिया। हाल के हफ्तों में दोनों के बीच तनाव बढ़ गया है। पोप ने ईरान पर ट्रम्प के हमलों की आलोचना की है और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ द्वारा ईरान के खिलाफ अमेरिकी-इजरायली अभियान को ईसाई मिशन के रूप में चित्रित करने के प्रयासों से खुद को अलग कर लिया है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


