सच्ची खबरें दिखाने पर योगीराज में हो जाता है मुकदमा, अबकी कानपुर के पत्रकारों पर गिरी गाज, देखें वीडियो

कानपुर देहात जिले से सूचना आ रही है कि खबर दिखाए जाने से नाराज बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है. ‘के न्यूज’ नामक चैनल के पत्रकारों ने कानपुर देहात में छात्रों को बिना स्वेटर खुले आसमान के नीचे देर तक खड़ा रखे जाने की खबर दिखाई थी. इस खबर से नाराज डीएम के आदेश पर बीएसए सुनील दत्त ने पत्रकारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी है.

ज्ञात हो कि छात्रों को भीषण सर्दी में खुले आसमान के नीचे खड़ा किया गया था. बच्चे खुले आसमान के नीचे हाफ पैंट और शर्ट में थे. बिना स्वेटर वे ठिठुरते रहे. बच्चों को यूपी दिवस के मौके पर आयोजित सांस्कृतिक समारोह के लिए बुलाया गया था.

इस कार्यक्रम को कानपुर देहात के डीएम दिनेश चंद्र और बीएसए सुनील दत्त ने कराया था. इस कार्यक्रम में राज्यमंत्री अजीत पाल, विधायक प्रतिभा शुक्ला और निर्मला संखवार मौजूद थीं.

‘के न्यूज’ चैनल के पत्रकारों पर मुकदमा दर्ज किए जाने से ये चर्चा आम है कि योगीराज में सच्ची खबरों को कवर करने पर मुकदमा दर्ज किया जाता है. ये सिलसिला काफी पुराना है. कई जिलों के पत्रकार इस अघोषित नीति के शिकार हो चुके हैं. अबकी कानपुर के पत्रकारों की बारी है.

देखें संबंधित वीडियो स्टोरी-

देखें एफआईआर की कॉपी-

इस पूरे प्रकरण पर भड़ास एडिटर यशवंत लिखते हैं-

Yashwant Singh-

यूपी में तो जोगी बाबा के शासन में गजबे हो रहा है. सरकारी प्रोग्राम में बच्चे स्वेटर जैकेट पहनकर गए लेकिन उन्हें आधी ड्रेस में सजाकर फील्ड में उतार दिया गया. वे ठंढ से कांपते रहे. न कोई मास्क न कोई एहतियात. यही बात एक टीवी चैनल वाले ने दिखा दी उसके तीन पत्रकारों पर मुकदमा हो गया.

हद है भाई.

फासिज्म इसी को कहते हैं. सच को दबाइए और झूठ को इतना प्रोपेगेट करिए कि लोग उसे सच मानने लगें. जिन तीन पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है उनके लिए न एडिटर्स गिल्ड बोलेगा और न लखनऊ के पत्रकार संगठन आगे आएंगे. सब चुप्पी साध लेंगे. पत्रकारिता पर हमला इन्हें तभी समझ में आता है जब कोई बड़ा पत्रकार सत्ता-शासन का टारगेट बन जाए.

कानपुर के तीन पत्रकारों के खिलाफ झूठा मुकदमा लिखाने वाले डीएम और बीएसए को ही सस्पेंड किए जाने की मांग की जानी चाहिए ताकि ये आइंदा ऐसी हरकत न करें. कहने को ये जनता के सेवक हैं लेकिन खुद को मालिक मान बैठे हैं. नेताओं के शह पर जब अफसरों के दिमाग इस कदर खराब होने लगे तो समझ जाइए कि जंगल राज आ चुका है.

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