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कादम्बिनी व नंदन बन्द होने के मायने

कादम्बिनी वह पत्रिका है जिसे हम पढ़ते हुए बड़े हए हैं। कादम्बिनी आपको रोचक अनुभवों, यात्रा वृतांतों, साहित्यिक कृतियों व जीवनशैली से जुड़े कभी उत्सुकता, कभी आश्चर्य तो कभी सुकून देने वाले सफर पर ले जाती है। कादम्बिनी के अंत में एक चित्र पर कहानी लिखने की प्रतियोगिता आपके बिम्ब निर्माण व कल्पना को सशक्त करती थी तो शब्द के अर्थ व प्रयोग का स्तम्भ शब्द ज्ञान को।

आरम्भ के दिनों में लघु आकार की सर्वप्रिय पत्रिका थी। मेरे यहां अखबार देने वाले महोदय कहते थे कि इसे आप तक पहुंचाने हेतु कुछ अतिरिक्त श्रम व समय व्यय करना पड़ता है। इसके लिए मैं आज भी उनका आभार व्यक्त करता हूँ।

मेरी जानकारी में 1998 या उससे भी पूर्व के संस्करण मेरे घर की अलमारियों, दराजों और एक पुराने अखबारों व पत्रिकाओं से भरे वर्षों से बन्द एक छोटे से कमरे में बिखरे हुएं हैं।

ना जाने कितनी बार मैंने चाय पीते हुए इसकी शब्द पहेलियों को हल करने व सोते समय पीछे दिए चित्र पर शीर्षक देने या कहानी लिखने के प्रयास किए।

सन् १९६० में शुरू हुई कादम्बिनी पत्रिका हिन्दुस्तान टाइम्स समूह की एक सामाजिक व साहित्यिक पत्रिका थी जो नई दिल्ली से प्रकाशित होती थी। यह विगत पांच दशक से निरंतर हिंदी जगत में एक विशिष्ट स्थान बनाए रखी। संस्कृति, साहित्य, कला, सेहत जैसे विषयों पर सुरुचिपूर्ण सामग्री की प्रभावशाली अभिव्यक्ति ने इसे एक अलहदा पहचान दी। पत्रिका में संवेदना, यात्रावृत्तांत, अनुभवपरक लेख, स्वस्थ मनोरंजन, सहित भाषागत आलेख व बौद्धिक प्रतियोगिताएं रहती थीं। जीवनशैली संदर्भित इसके लेख खासा लोकप्रिय रहे। किशोर, बुजुर्ग, विद्यार्थी, नौकरीपेशा, महिला सहित अन्य सभी लोगों के लिए इसमें उपयोगी सूचनाएं लोगों को लाभान्वित करतीं थीं।

पत्रिकाओं के प्रकाशन बन्द होने की श्रृंखला में प्रसिध्द बाल पत्रिका नंदन भी बन्द होने की दुःखद घोषणा हो चुकी है।

बाल पत्रिका नंदन पिछले ४० वर्षो से प्रति मास प्रकाशित होती है। इस पत्रिका की शुरुआत १९६४ में प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जी की स्मृति में हुई थी। नंदन का पहला अंक पंडित नेहरू को ही समर्पित था। नंदन की विषयवस्तु पौराणिक, परीकथाओं, पहेली, अंतर ढूढों आदि पर आधारित होता था। समय के साथ एवं अपने बाल पाठको की बदलती रुचि को ध्यान रख कर नंदन ने प्रासंगिक विषयों एवम महापुरुषों के जीवनवृत्त भी प्रकाशित करना प्रारम्भ कर दिया। आज तक नंदन में प्रकाशित हो चुकीं १०,००० से भी ज्यादा कहानियों ने लोगों को प्रेरणा, सूचना तथा शिक्षा दी। पत्रिका में सुशील कालरा द्वारा बनाई कॉमिक चित्रकथा चीटू-नीटू एक अलग ही पहचान बनाने में सफल रहे।

आज जबकि ऐसी पत्रिकाओं के प्रकाशन की और भी अधिक आवश्यकता है। इसका बन्द हो जाना ना सिर्फ मेरी तकिया की ऊंचाई को कुछ कम कर देगा बल्कि मेरे उस वैचारिक सफर को भी रोक देगा जिस पर मैं जब चाहे इसके पृष्ठों के साथ निकल पड़ता था।

सक्षम द्विवेदी, हिंदी कंटेंट राइटर, डिज़ाइन बॉक्सड क्रिएटिव इंडिया प्राइवेट लिमिटेड। चंडीगढ़।

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