कल्पेशजी की आवाज में फुसफुसाहट बता रही कि वे सलोनी के दबाव में थे

Pushya Mitra

सलोनी अरोड़ा अरेस्ट हो गयी है. वही सलोनी अरोड़ा जिस पर दैनिक भास्कर के पूर्व समूह संपादक स्वर्गीय कल्पेश याग्निक ब्लैकमेल करके खुदकुशी के लिए विवश करने का आरोप है. सलोनी अरोड़ा उसी दैनिक भास्कर समूह की पूर्व पत्रकार रह चुकी है और मुंबई ब्यूरो में काम करते हुए फिल्मी जगत की खबरें लिखा करती थीं.

सलोनी अरोड़ा की गिरफ्तारी की खबर आने के बाद भड़ास4मीडिया.कॉम पर कल्पेश जी और सलोनी के बीच हुई बातचीत का एक ऑडियो और वह पत्र जो कल्पेश जी ने मध्यप्रदेश के एक बड़े पुलिस अधिकारी को लिखा था, दोनों प्रकाशित हुआ.

जब से इन दोनों से होकर गुजरा हूं, कई बातें मन में उमड़ रही हैं और उन्हें लिखकर पोस्ट कर डालने का मौका तलाश रहा हूं. पहली बात यह कि आप सभी अगर इस मामले में रुचि रखते हैं तो इन दोनों को पढ़ और सुन लीजिये. इन्हें पढ़ और सुनकर इस मामले पर आप अपनी राय बनाइयेगा. मेरी बातें बस पढ़ लीजिये.

1. कल्पेश जी ने पुलिस अधिकारी को जो पत्र लिखा है, वह पांच पन्नों का है. काफी लंबा है. मेरा अपना मानना है कि अगर आपके विचारों में उलझ है, तभी आप इतनी लंबी शिकायत लिखते हैं. यह अनुमान गलत भी हो सकता है.

2. मैं कल्पेश जी की आवाज से परिचित नहीं हूं. मगर ऑडियो क्लिप में उनकी आवाज जिस कदर फुसफुसाहट भरी है, वह भी बताती है कि वे सलोनी को लेकर दबाव में रहते होंगे.

3. ऑडियो क्लिप को सुनकर सलोनी के बारे में जानने समझने का मौका मिलता है. दिलचस्प है कि वे एक सामान्य पत्रकार होने के बावजूद अपने समूह संपादक को सर कह कर नहीं बुलाती. कल्पेश कहती है और तुम कह कर पूरे अधिकार से संबोधित करती है. और इसमें कोई हिचकिचाहट नहीं है, ऐसा लगता है जैसे वह कल्पेश जी से इस तरह की बातचीत की अभ्यस्त हो. हमारी तो आज भी अपने सुपर बॉस के आगे घिघ्घी बंधने लगती है.

4. कहा जा रहा है कि सलोनी कल्पेश जी से पांच करोड़ रुपये मांग रही थी. उस क्लिप में भी सलोनी ने खुद यह बात कही है. मगर आप जब बातचीत गौर से सुनेंगे तो समझ में आयेगा कि वह पैसे नहीं मांग रही. वह कुछ और मांग रही है.

5. सलोनी खुलकर कहती है. मुझे फिल्म रिव्यू लिखने का अधिकार चाहिए, हर संडे को नवरंग की लीड स्टोरी मैं लिखूंगी. शायद वह पहले लिखती भी रही हों. क्योंकि वह टेप में कहती है कि तुमने उस लड़की को मेरे ऊपर बिठा दिया. ठीक है, वह गिरीश अग्रवाल(या इनके कोई और भाई का नाम कहा होगा) की कैंडिडेट है. मैं इतना बर्दास्त कर लूंगी. मगर मेरी पोजीशन क्लीयर होनी चाहिए. (हाय रे, पत्रकार की ख्वाहिशें)

6. वह कल्पेश जी से कहती है कि तुमने मुझे डिफेंड क्यों नहीं किया. शायद वह इसलिए कहती है कि वह खुद को कल्पेश जी का कैंडिडेट मानती है. मीडिया में यही सब होता है. हर कोई किसी न किसी का कैंडिडेट है. जो किसी का कैंडिडेट नहीं है, वह फुटबॉल बनकर रह जाता है.

7. तो सलोनी की पहली मांग यही है और इस मांग को पूरा नहीं करने पर वह पांच करोड़ की मांग करती है.

8. सलोनी एक और दिलचस्प बात कहती है. तुम जानते हो, पैसा मेरे लिए मैटर नहीं करता. मैं जिस शहर में रहती हूं वह प्रोड्यूसरों का शहर है और मेरे अंदर अभी भी चार्म है. मैं अगर किसी से भी इमोशनली अटैच्ड हो जाऊं तो मेरा और मेरे बच्चे का जीवन बड़े आराम से कटेगा. मुझे शादी करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी.

9. सलोनी अब इस प्रकरण की खलनायिका है. कल्पेश जी दुनिया छोड़कर जा चुके हैं. पुलिस कार्रवाई में जुटी होगी. अखबार को अपनी साख और परिवार को कल्पेश जी की छवि को बचाकर रखना है. सलोनी और उसके बच्चे का भविष्य क्या होगा, हम अंदाज भी नहीं लगा सकते. मगर एक सवाल तो है. वह एक हारी हुई रिपोर्टर आखिर क्या मांग रही थी? पांच करोड़ रुपये या एक पत्रकार के रूप में अपनी खोयी हुई पोजीशन? पढ़िये, सुनिये और सोचिये.

प्रभात खबर के वरिष्ठ पत्रकार पुष्य मित्र की एफबी वॉल से.

आडियो और पत्र सुनने-पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें…

कल्पेश सुसाइड प्रकरण : पत्रकार सलोनी अरोड़ा कैसे ब्लैकमेल करते हुए धमकाती थी, सुनिए ये टेप


इस प्रकरण पर यत्र-तत्र आए कुछ अन्य कमेंट्स यूं हैं….

Pran Chadha अब तो सलोनी अरोड़ा गिरफ्त में आ चुकी है… उम्मीद करते हैं इन सवालों का जवाब सबको मिल जाएगा… 1. दैनिक भास्कर में किसी को निकलने के बाद कोई प्रमुख उसका पक्ष नहीं सुनता। कल्पेश जी सलोनी के फोन ब्लाक कर सकते थे। इसलिए कोई बात है,जो खुल कर सामने नहीं आयी कि कल्पेश इतना विवश हो गया कि सलोनी को डांटने, फोन ब्लाक करने के बजाय आत्महत्या को विवश हो गए। 2. सलोनी के बात से लगता है कि वह भास्कर के योग्य नहीं थी, उसे लाया कौन या किसके कहने पर काम में रखा गया। 3. कोई सम्पादक और पत्रकार इतना कमजोर नहीं हो सकता कि, कोई उससे इस तरह बात करें और ब्लैक मेल को जाए। 4. दैनिक भास्कर में प्रकशित खबर कल्पेश की हार्ट से मौत की खबर प्रकाशन के पीछे क्या मकसद रहा।

Yashwant Singh आपके सवाल वही सवाल हैं जो मेरे मन में भी हैं. कुछ चीजों का जवाब पाने के लिए एक खास वक्त का गुजर जाना जरूरी होता है. आपने ठीक कहा, जब तक सलोनी पकड़ी नहीं जाती और उसका पालीग्राफ टेस्ट नहीं होता तब तक सवाल तो कायम रहेंगे.

Abhishek Sahaj शैलेंद्र भाई ऐसी महिलाएं संपादकों को अपने जाल में फांसती हैं। और फिर उनसे वो सब कुछ करवाती हैं जो वो चाहती हैं। पता नहीं कितने योग्य पत्रकारों को ये हाशिये पर ला देती हैं और उनकी नौकरी तक खाकर कैरियर बर्बाद कर देती हैं। ऐसा हर जगह हो रहा है, सब जानते हैं लेकिन कोई कुछ नहीं कर पाता। ऐसी धंधेबाज़ औरतों की वजह से पत्रकारिता की हालत कोठे से भी बदतर हो गई है।

Vineet Sharma जब तक कहीं कुछ ब्लैक नहीं पका हो उसे मेल नहीं किया जा सकता।

Nikhil Dave बहुत खूब यशवंत जी, सलोनी जैसे लोग समाज का घिनोना रूप हैं। यह विषय सिर्फ यहाँ तक नहीं रुकता, कानून में परिवर्तन के लिए भी यह मामला उदाहरण बन सकता है।

Shri Krishna Prasad Sir, Now you have become immortal in the history of media world by exposing the inner scene of Indian media. Really, it tells a lot of present media in India.

Kanchan Srivastava इतने बड़े मीडिया हाउस का ग्रूप एडिटर सिर्फ़ इसलिए आत्महत्या कर ले कि एक इतनी जूनियर लड़की झूठे आरोप लगाने या फ़र्ज़ी ‘एक्स्पोज़े’ करने की धमकी दे रही है, कुछ हज़म नहीं हो रहा।

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Comments on “कल्पेशजी की आवाज में फुसफुसाहट बता रही कि वे सलोनी के दबाव में थे

  • Ap Abhi bhi saloni Arora me ek abla aur besahaye naari ka roop dekh rahe hai…
    Kuch logo me kabiliyat hoti hai ki zara si baat ko ek bhayank toofan bana kar pesh karne ki. Saloni isme daksh hai. Ye vo aurat hai jo apse baat karte karte jab aapka mind kidnap kar le apko khud pata nahi chalega. Jis aurat ne Kalpesh Ji jaise diggaj aadmi ko dara dhamka kar aatmhatya karne ki kagar par pahuch diya uska itihaas sirf itna hai ki ek bebas aur apang buzurg mahila ko 2004 me hockey se maar maar kar adhmara kar diya ki uski zindagi ke baki 6 kathin saal bistar par nikle aur usi bistar par pade pade vo mari..
    Nafis hotel, palasiya police chowki par apne pati se divorce ka case chalte hue us par chaku se jaan leva hamla aditya Chowksey ke saath mil kar karaya aur vo kisi tarah apni jaan bacha paya. Uske maathe par “SIRF” 8 taanke aaye.
    18-20 saal ki umr me apne pita saman neemuch ke Prakash Uncle ke saath gehra dostana sambandh. Gusse me pagal hokar apne ghar walo ke saamne hi apne haath par 25 cut laga lena aur marne ki kagar par pahuch kar apni najayaz baate manvana. Upar se ghar walo ko badnaam karna ki ye harkat unhone kari hai….
    Dr Lubana ka 2006-07 me divorce karana unki patni dwara beech sadak me isko chapplao se peetna….

    Sir, ye jagah kam padd jayegi agar uske kaarname likhne koi baithe….

    Ek Kalpesh Ji hai jinke pass marne ke alawa koi rasta nahi tha khud ko sahi sabit karne ka. Aise aur pata nahi kitne kalpesh Ji honge jinki saanse isne daba rakhi hai….

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  • nari ka aakarshan hi uski jindgi ka jariya banata hai aaj ki duniya me jaha vasna ke havaskhor uske badan ko tatolne ka kam karte hai kyo kisi yuva berojgar ko rojgar nahi milata ya der se milata hai. nari apani muskan se rojgar paa leti hai. rojgar dene vala uske jism ka kutta ban jata hai. nari keval apani jindgi chalane ke liye apane husn ka prayog karti hai aur aadami apani havas mitane ka kam karta hai. aurat makkar nahi hoti aadami makkar hota hai aurat to apane husn ka istemal karke aadami ko gulam banane ki takat rakhti hai

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