कानपुर। किडनी रैकेट के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिना पंजीकरण संचालित हो रहे मेड लाइफ अस्पताल को सील कर दिया है, जबकि पंजीकृत आहूजा और प्रिया अस्पताल को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही शहर के 50 से अधिक अस्पतालों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. हरिदत्त नेमी के अनुसार, मेड लाइफ अस्पताल में बिना पंजीकरण के ट्रांसप्लांट से जुड़े मरीज को भर्ती किया गया था। जांच के दौरान यहां न तो कोई योग्य डॉक्टर मिला और न ही प्रशिक्षित स्टाफ, जिससे साफ है कि मानकों की अनदेखी कर अस्पताल संचालित किया जा रहा था।
वहीं, आहूजा और प्रिया अस्पताल पर आरोप है कि वे बिना आवश्यक ट्रांसप्लांट और सुपर स्पेशलिस्ट सुविधाओं के इलाज कर रहे थे। इस संबंध में दोनों संस्थानों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
स्वास्थ्य विभाग अब पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गया है। आशंका जताई जा रही है कि कानपुर ही नहीं, आसपास के कई जिलों के अस्पताल भी इस रैकेट से जुड़े हो सकते हैं। इसके लिए गोपनीय सूचना तंत्र सक्रिय कर दिया गया है।
IMA ने कार्रवाई टाली
इस मामले में आहूजा अस्पताल की संचालक डॉ. प्रीति आहूजा का नाम सामने आने के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की बैठक हुई। IMA अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने कहा कि जब तक कोर्ट में आरोप साबित नहीं हो जाते, तब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। दोष सिद्ध होने की स्थिति में ही आगे की कार्रवाई के लिए मुख्यालय को पत्र भेजा जाएगा।
फिलहाल, इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
विशाल त्रिपाठी-
कानपुर में सोमवार देर रात पुलिस ने अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट पकड़ा है। बिहार के रहने वाले एक 23 साल के एमबीए छात्र से उसकी किडनी 6 लाख रुपए में खरीदी गई। बाद में 30 साल की महिला मरीज को करीब 80 लाख रुपए में बेच दी गई।
किडनी देने वाले छात्र ने पुलिस से शिकायत की तो पुलिस ने सोमवार रात में ही शहर के मेड लाइफ हॉस्पिटल, आहूजा हॉस्पिटल और प्रिया हॉस्पिटल में एक साथ छापेमारी की।



मेड लाइफ हॉस्पिटल में किडनी डोनर एमबीए छात्र और मरीज भर्ती मिले। जब ट्रांसप्लांट से जुड़े दस्तावेज मांगे गए, तो अस्पताल कोई वैध कागजात पेश नहीं कर सका।
पुलिस ने मंगलवार को आहूजा हॉस्पिटल की मालकिन डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत, डॉ राजेश कुमार, डॉ राम प्रकाश, डॉ नरेंद्र सिंह और दलाल शिवम अग्रवाल को अरेस्ट कर जेल भेज दिया है।
शेखर त्रिपाठी-
आज के अखबार में फ्रंट पेज पर किडनी ट्रांसप्लांट और सेकंड लास्ट पेज में कर्नल अभिषेक (वर्तमान में दिल्ली नगर निगम का डिप्टी कमिश्नर) की रिश्वतखोरी वाली खबर ने मन को विचलित कर दिया। ima की उपाध्यक्ष डॉक्टर प्रीति आहूजा जैसे लोग डॉक्टर पेशे को बदनाम कर रहे हैं, इसलिए की कुछ ज्यादा पैसे कमा लेंगी। अब बाकी जिंदगी जेल में गुजरेगी। वहीं सेना से डेप्यूटेशन पर नगर निगम में जॉब करने वाले अभिषेक मिश्रा ने रिश्वतखोरी में रिकॉर्ड बनाया है। दोनों अब जेल में जिंदगी गुजारेंगे।
वाकई कागज के ये टुकड़े आज मानवता पर भारी हो गए हैं। संस्कार और इंसानियत मर चुकी है।। सरकार कोई भी भ्रष्ट सिस्टम बना रहेगा।




