कविता कृष्णन की सीपीआईएमएल से छुट्टी हो गई है!

विष्णु शर्मा-

कविता कृष्णन की सीपीआईएमएल से छुट्टी हो गई है. सीपीआईएमएल का यह बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला है. जरूरी था कि सीपीआईएमएल कविता कृष्णन से दूरी बनाए क्योंकि उनकी राइटिंग लगातार समाजवाद की लीगेसी को ही खारिज कर रही थी. सीपीआईएमएल से बस इतना ही कहना चाहता हूं कि आप देर आए दुरुस्त आए.

कविता कृष्णन का एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट. मुझे नहीं पता था कि कम्युनिस्ट पार्टियां इस तरह से सर्टिफिकेट देकर अपने कामरेड को विदा करती हैं. क्या बात है!

बाहुन (ब्राह्मण के लिए नेपाली शब्द) के बारे में मेरे मामा एक नेपाली लघु कथा सुनाया करते थे : एक बाहुन से एक औरत ने पूछा कि “आपके पास कितनी गाय हैं?” उस ब्राह्मण ने कहा, “20 हैं. एक के मरने पर 21 हो जाएंगी.”

मामा कहानी का अर्थ समझाते थे कि गांव में मौत होने पर गाय दान दी जाती है इसलिए वह कह रहा है कि कोई मरेगा तो 21 हो जाएंगी.

यही हाल दिल्ली और भारतीय एंटी लेफ्ट लिबरलों का है. उनसे पूछो आप कितने लोग हैं तो कहेंगे, “हम 25 हैं, एक कम्युनिस्ट का पतन होगा तो 26 हो जाएंगे.”

कविता कृष्णन के पतन का जिस तरह से दिल्ली के “हू इज हू लिबरल” स्वागत कर रहे हैं, उनके साहस का जश्न मना रहे हैं, स्वाभाविक ही था कि मुझे मामा की यह कहानी याद आ गई.



भड़ास का ऐसे करें भला- Donate

भड़ास वाट्सएप नंबर- 7678515849



Leave a Reply

Your email address will not be published.