Delhi High Court ने अदालत की कार्यवाही से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया से हटाने का आदेश दिया है। यह वीडियो उस समय का बताया जा रहा है जब Arvind Kejriwal व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुए थे और जस्टिस Swarana Kanta Sharma के समक्ष अपनी रिक्यूजल (recusal) अर्जी पर दलील रखी थी।
इस मामले में अदालत ने केजरीवाल के साथ-साथ वरिष्ठ पत्रकार Ravish Kumar और अन्य लोगों को भी नोटिस जारी किया है, जिन्होंने कथित तौर पर इस वीडियो को अपलोड या शेयर किया।
यह आदेश जस्टिस V Kameswar Rao और जस्टिस Manmeet Arora की डिवीजन बेंच ने पारित किया।
क्या है मामला?
याचिका में कहा गया था कि अदालत की कार्यवाही का वीडियो रिकॉर्ड कर उसे सोशल मीडिया पर साझा करना नियमों का उल्लंघन हो सकता है और यह अवमानना (contempt of court) के दायरे में आ सकता है। इसी आधार पर वीडियो हटाने और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।
कोर्ट का रुख
हाईकोर्ट ने प्राथमिक तौर पर वीडियो हटाने के निर्देश देते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान यह तय होगा कि क्या यह कृत्य अवमानना की श्रेणी में आता है या नहीं।
तुम्हारा वीडियो तो सब देख चुके हैं स्वर्ण कान्ता! अब वीडियो हटवाने का नहीं, तुम्हारे ख़ुद के केस से हटने का समय है। लेकिन थेथर लोग हमेशा मानते हैं- “बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा!” -यशवंत सिंह, भड़ास एडिटर
Delhi High Court में एक अहम मामले की सुनवाई से जस्टिस Tejas Karia ने खुद को अलग (recuse) कर लिया है। यह मामला Arvind Kejriwal समेत अन्य के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की मांग से जुड़ा है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि कोर्ट की कार्यवाही से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड किए गए, जिसे अवमानना का मामला माना जा सकता है। यह केस आज मुख्य न्यायाधीश Devendra Kumar Upadhyaya और जस्टिस तेजस करिया की बेंच के सामने सूचीबद्ध था।
हालांकि, सुनवाई शुरू होने से पहले ही जस्टिस करिया ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया। अब इस मामले की सुनवाई कल किसी अन्य बेंच द्वारा की जाएगी।
क्या होता है ‘रिक्यूजल’?
किसी जज द्वारा किसी केस की सुनवाई से खुद को अलग करना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे ‘रिक्यूजल’ कहा जाता है। यह आमतौर पर तब किया जाता है जब जज को लगता है कि किसी कारणवश उनके शामिल रहने से निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।
व्यापक संदर्भ
हाल के समय में न्यायपालिका से जुड़े कुछ घटनाक्रमों और आरोपों को लेकर सार्वजनिक चर्चा तेज हुई है। हालांकि, हर मामले के तथ्य और परिस्थितियां अलग होती हैं, और किसी एक घटना के आधार पर व्यापक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जाता।
दिल्ली हाईकोर्ट का हाल भी ग़ज़ब है। एक ईमानदार जज को रातोंरात ट्रांसफर कर दिया जाता है। एक के घर में जले हुए नोट मिलते हैं। एक पर संघ से रिश्ते और पक्षपात के आरोप लगते हैं और अब एक ने एक विवादास्पद मामले से अपने को अलग कर लिया है। -डॉ मुकेश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार


