मलप्पुरम (केरल)। पत्रकार सिद्धीक़ कप्पन के घर पर देर रात पुलिस जांच की चेतावनी ने इस कार्रवाई की मंशा और समय को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कप्पन और उनकी पत्नी रायहानत ने इसे असामान्य और असहज करने वाला बताया है।
शनिवार शाम करीब 6:30 बजे वेंगारा और तिरूर थानों के दो वर्दीधारी पुलिसकर्मी मलप्पुरम जिले के वेंगारा स्थित कप्पन के घर पहुंचे। रायहानत कप्पन के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने पूछा कि क्या सिद्धीक़ कप्पन आधी रात के बाद घर पर होंगे। उन्होंने बताया कि मलप्पुरम से एक टीम “निरीक्षण” के लिए आएगी, जिससे उनकी मौजूदगी की पुष्टि की जा सके।
जब इस कार्रवाई के मकसद के बारे में पूछा गया, तो पुलिस ने इसे एक “रूटीन प्रक्रिया” बताया, जो कप्पन के ongoing केस से जुड़ी है। हालांकि कप्पन और उनके परिवार को यह कार्रवाई सामान्य नहीं लगी।
रायहानत ने मीडिया से कहा, “हमने पूछा कि इतनी रात को जांच क्यों करनी है? क्या इसमें ईडी या एनआईए जैसी एजेंसियों की भूमिका है? उन्होंने इनकार किया और इसे रूटीन बताया, लेकिन हमें ऐसा बिल्कुल नहीं लगा।”
“डर का माहौल बना रही है पुलिस”
सिद्धीक़ कप्पन, जिन्हें फरवरी 2023 में दो साल से ज्यादा जेल में रहने के बाद जमानत मिली थी, ने इस घटनाक्रम को डर और तनाव फैलाने वाला बताया। उन्होंने कहा, “वेंगारा थाना मेरे घर से महज ढाई किलोमीटर दूर है। अगर बात करनी थी, तो कॉल कर सकते थे। मेरा नंबर उनके पास है। लेकिन उन्होंने जानबूझकर मोहल्ले में लोगों से मेरे बारे में पूछताछ की, जिससे अजीब सा माहौल बन गया।”
कप्पन ने बताया कि जब पुलिस वाले घर पहुंचे तो उन्होंने पूछा, “क्या आप सिद्धीक़ कप्पन हैं?” मैंने हां कहा और उन्हें अंदर बुलाया, लेकिन वे नहीं आए। उन्होंने बस इतना कहा कि एक टीम आधी रात के बाद फिर से आएगी। ये ‘नियमित जांच’ जैसा तो नहीं लगता। मैंने तुरंत अपने वकील डेनिश को सूचना दी और पुलिसकर्मियों का विवरण भेजा।”
“कुछ छिपी हुई मंशा लग रही है”
कप्पन ने कहा, “मैं अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता हूं। हम किसी भी वैध जांच में सहयोग के लिए तैयार हैं, लेकिन आधी रात को घर आना सामान्य नहीं है। मैं एक सार्वजनिक व्यक्ति हूं, मुझसे कभी भी संपर्क किया जा सकता है। देर रात की कार्रवाई कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं हो सकती, इससे तो कोई और मंशा नजर आती है।”
रायहानत ने बताया कि कप्पन की रिहाई के बाद से ही पुलिस लगातार उन पर निगरानी रख रही है। “वे जहां भी जाते हैं, पुलिस पीछा करती है, फोटो खींचती है, और घर पर बार-बार आती है। हमने जमानत की सभी शर्तों का पालन किया है, लेकिन आधी रात को टीम भेजना हमारी सहनशक्ति से बाहर है,” उन्होंने कहा।
पुलिस के जाने के बाद कप्पन दंपति ने अपने वकील को जानकारी दी। वकील ने पुलिस से इस “मध्यरात्रि जांच” के कानूनी आधार पर सवाल उठाए, लेकिन पुलिस ने फिर वही जवाब दिया कि यह “रूटीन चेक” है।
पत्रकार संगठनों ने जताई आपत्ति
केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (KUWJ), जिसके सदस्य कप्पन हैं, ने भी इस घटना पर आपत्ति जताई है। संगठन ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई सामान्य प्रक्रिया से हटकर है और इसे किसी भी हालत में सामान्य नहीं ठहराया जा सकता।
गौरतलब है कि अक्टूबर 2020 में सिद्धीक़ कप्पन को उत्तर प्रदेश पुलिस ने उस समय गिरफ्तार किया था जब वह हाथरस में दलित युवती से गैंगरेप और हत्या की रिपोर्टिंग के लिए जा रहे थे। उन पर UAPA के तहत केस दर्ज किया गया और दो साल से ज्यादा जेल में रखा गया। सुप्रीम कोर्ट ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए उन्हें जमानत दी थी।
फिलहाल, इस मामले में केरल पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

