
संजय कुमार सिंह
देश में मीडिया की आजादी के लिहाज से आज का दिन दिलचस्प है। सुबह-सुबह एक्स पर मुझे द प्रिंट की एक खबर के बारे में पता। इसे ट्वीटर पर 13 मई को पोस्ट किया गया था। खबर महत्वपूर्ण है और उसकी चर्चा सोशल मीडिया पर भी हुई या नहीं, मुझे उसकी जानकारी नहीं थी। लिहाजा मैंने फेसबुक पर लिखा कि एक्स पर यह वीडियो 13 मई से है, मैंने आज देखा – आपने कहीं इस खबर का कोई फॉलोअप देखा? जाहिर है, खबर सरकार विरोधी हो, उसकी योजना-रणनीति में बाधा डालने वाली हो तो महत्व नहीं पाती है। एक्स पर एक वीडियो के जरिये द प्रिंट की खबर का उल्लेख किया गया है। दैनिक भास्कर ने इसे हिन्दी में छापा था। अनुवाद से बचने के लिए मैं यहां भास्कर की खबर का उपयोग कर रहा हूं। द प्रिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार 2 से 22 फरवरी 2025 के बीच, मैक्सार टेक्नोलॉजीस को कम से कम 12 ऑर्डर मिले। यह सामान्य संख्या से दुगुना था। इस कंपनी के ग्राहकों में पाकिस्तान की बिजनेस सिस्टम्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड (BSI) भी शामिल थी। इस कंपनी का नाम अमेरिका में हुए संघीय अपराधों से जुड़ा हुआ है। अब मैक्सार टेक्नोलॉजीस ने BSI से अपनी पार्टनरशिप खत्म कर दी है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार डेटा से यह स्पष्ट नहीं है कि पहलगाम की सैटेलाइट तस्वीरों के ऑर्डर BSI ने दिए थे या नहीं।
पहलगाम की सैटेलाइट तस्वीरों के लिए ऑर्डर जून 2024 से ही आने लगे थे। मैक्सार पोर्टल के एक्सेस में पहलगाम के अलावा जम्मू-कशमीर के पुलवामा, अनंतनाग, पुंछ, राजौरी और बारामूला जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के सैटेलाइट इमेज मिलें। अब तक यह साफ नहीं है कि ये तस्वीरें 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए हमलों की प्लानिंग में इस्तेमाल हुईं या नहीं, लेकिन भारत मैक्सर से यह जांच कराने को कह सकता है कि ये तस्वीरें किसने और क्यों मंगवाईं थी। फरवरी 2025 में पहलगाम की सैटेलाइट इमेज के सैटेलाइट फ्रीक्वेंसी रेंज से ऑर्डर की संख्या सबसे ज्यादा रही। 12, 15, 18, 21 और 22 फरवरी को इमेज खरीदे गए। मार्च में कोई ऑर्डर नहीं आया। इसके बाद 12 अप्रैल को, हमले से ठीक दस दिन पहले एक ऑर्डर मिला। इसके बाद 24 और 29 अप्रैल को भी इमेज के लिए दो ऑर्डर आए। उसके बाद से कोई नया ऑर्डर नहीं दिया गया।
इसके साथ तथ्य यह भी है कि हमले की खुफिया जानकारी थी। कांग्रेस अध्य़क्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दावा किया है कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले से तीन दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी को खुफिया रिपोर्ट भेजी गई थी। इसके बाद ही उनका कश्मीर दौरा रद्द किया गया था। उन्होंने कहा कि यह इंटेलिजेंस फेलियर है। लेकिन द प्रिंट की खबर से लगता है कि खुफिया सूचना तो रही ही होगी और नहीं थी को मामला सीधा नहीं है। अखबारों ने इसका फॉलोअप नहीं किया और वैसी प्रमुखता नहीं मिली जैसी मिलनी चाहिये थी। दूसरी ओर, इस आतंकी हमले का ‘बदला’ लेने के लिए मोदी सरकार ने ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ चलाया और आज ही मुझे राकेश कायस्थ का लिखा मिला, “इमोशनल ब्लैकमेलिंग : गोधरा से लेकर पुलवामा और अब पहलगाम तक पैटर्न एक ही है!“
कहने की जरूरत नहीं है कि देश का मीडिया अगर ढंग से काम कर रहा होता तो न सिर्फ तमाम खबरें होतीं बल्कि जो हुई हैं उनका फॉलोअप भी हुआ होता। पहलगाम के जिस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से युद्ध छेड़ दिया उससे संबंधित खबर की भारत में चर्चा भी नहीं हुई, यह असाधारण है। पहले (अभी भी) तमाम एक्सक्लूसिव खबरें अगले दिन और विस्तार से छपती हैं। इसलिये इस खबर का फॉलोअप होना चाहिये था। पहलगाम का नक्शा खरीदने वाली बात का खुलासा करके हमले में पाकिस्तान के शामिल होने का सबूत दिया जाता तब लगता कि सरकार और नरेन्द्र मोदी आतंकवाद खत्म करने पर गंभीर हैं। अमेरिका ने ट्विन टावर पर हमले के बाद अफगानिस्तान में हमला कर आतंकवादियों को मारा तो अपने यहां भी सख्ती की और तब जाकर दोबारा वैसी वारदात नहीं हुई है। भारत कुछ किये बिना दावा कर रहा था तो उसे झूठ साबित कर दिया गया और इससे ध्यान हटाने के लिये युद्ध छेड़ दिया और नाम – ‘ऑपरेशन सिन्दूर’। इसके बाद यह मुद्दा ही नहीं रहा कि सरकार को क्या करना चाहिये था या सरकार ने क्या नहीं किया। इसके बावजूद किसी तीसरे के कहने पर अचानक युद्ध खत्म कर दिया गया। इसके बाद जो हुआ उसमें युद्ध भी पीछे रह गया। परमाणु केंद्र और रिसाव मुद्दा बन गया है। कांग्रेस के भ्रष्टाचार से लेकर स्विस बैंक में रखे काले धन तक पर चर्चा नहीं हुई है। आरोप सच था या झूठ सत्ता पलट गई और मोदी जी नेहरू का रिकार्ड तोड़ रहे हैं। वही दिल्ली में हो चुका है। रेखा गुप्ता शीला दीक्षित की बराबरी में खड़ी की गई हैं, देखते रहिये।
भारत में आतंकी घटना के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराने के लिए सबूत देने होंगे। वह है नहीं। मुंबई हमले के बाद तब की कांग्रेस सरकार ने यही किया था। पर बीच में बिरयानी ले आया गया, कहानी गढ़ने वाले को चुनाव लड़ने का टिकट दिया गया और 2014 में प्रधानमंत्री बनते ही नवाजशरीफ और उनसे दोस्ती भारत पाकिस्तान के बीच आ गई। दूसरी ओर, पुलवामा के समय भी वैसी ही जानकारी इकट्ठा की गई होती, उसे दुनिया के समक्ष रखा गया होता तो शायद पहलगाम नहीं होता और फिर भी होता, तब पाकिस्तान पर हमला होता (आपरेशन सिन्दूर नहीं) ऑपरेशन फिनिश या मिशन पॉसिबिल नाम दिया जाता तो कोई बीच-बचाव करने की बेशर्मी नहीं दिखाता। अभी सरकार की बड़ी ताकत मीडिया को नियंत्रण में रखने पर लगी है। इस मीडिया ने टाइम्स ऑफ इंडिया की कल की खबर का फॉलोअप छापा है। इंडियन एक्सप्रेस में अगर टाइम्स की कल की ही खबर है तो द हिन्दू में राष्ट्रपति ने जो किया है उसके लिये तमिलनाडु के मुख्यमंत्री द्वारा की गई आलोचना की खबर है। दि एशियन एज में भी यह खबर है और राष्ट्रपति का ही पक्ष है। बेशक दोनों खबर हैं लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की खबर में पहले पन्ने पर राष्ट्रपति की तस्वीर जरूर है तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने इसकी जो आलोचना की है वह नहीं है। यही हालत दि एशियन एज की खबर का है। कल मैं यहां लिख चुका हूं कि अव्वल तो राष्ट्रपति सरकार का काम करती लग रही हैं और सरकार जो कर रही है वह राजनीति है। दूसरे, सुप्रीम कोर्ट के कथित आदेश जो सलाह है वह राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी हो नहीं सकता है और राष्ट्रपति पहले की तरह काम करती रह सकती हैं। पर सरकार की तरफ से यह सवाल उठाना, सुप्रीम कोर्ट की स्वायत्तता को सरकार की तरफ से सर्वोच्चता की चुनौती है। इस लिहाज से मामला बड़ा है और संभव है सरकर चाहती हो कि इसपर विवाद हो। इसलिए इस खबर का सरकारी पक्ष आज टाइम्स ऑफ इंडिया में कल छपने के बाद भी पहले पन्ने पर है लेकिन सरकार के खिलाफ कही जा सकने वाली खबरों के साथ ऐसा नहीं होता है।
नवोदय टाइम्स ने आज राष्ट्रपति की कार्रवाई को लीड बनाया है। शीर्षक है, राष्ट्रपति मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट से पूछे 14 सवाल। उपशीर्षक है, राज्यपाल, राष्ट्रपति की शक्तियों पर पूछी राय। इस खबर के साथ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का ट्वीट या एक्स पर उनकी पोस्ट का हिन्दी अनुवाद भी छापा है। यह इस प्रकार है, मैं केंद्र सरकार के ‘राष्ट्रपति संदर्भ’ की कड़ी निंदा करता करता हूं, जो तमिलनाडु के राज्यपाल से संबंधित मामले और अन्य मामलों में उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित संवैधानिक व्यवस्था को उलटने का प्रयास है। यह कानून की गरिमा और संविधान के अंतिम व्याख्याकर्ता के रूप में उच्चतम न्यायालय के अधिकार को भी सीधे चुनौती देना है। राज्यपालों को समय सीमा निर्धारित करने पर कोई आपत्ति क्यों होनी चाहिए? इन गंभीर परिस्थितियों में, मैं सभी गैर-भाजपा शासित राज्यों और पार्टी नेताओं से संविधान की रक्षा के लिए इस कानूनी संघर्ष में शामिल होने का आग्रह करता हूं। हम अपनी पूरी ताकत से यह लड़ाई लड़ेंगे। तमिलनाडु लड़ेगा और जीतेगा। आप जानते हैं कि हाल में द हिन्दू को खबरों की उसकी स्वतंत्र प्रस्तुति और चयन के लिए एस गुरुमूर्ति ने इस्लामाबाद के डॉन का एडिशन बताया था और मालिनी पार्थसार्थी ने इसके लिए अफसोस जताया था। इससे आप समझ सकते हैं कि मीडिया क्या कर रहा है और क्यों कर रहा है। खबरों और मीडिया पर भाजपा के इस नजरिये का ही हाल है कि भाजपा सासंद कंगना रनौत ने एक्स पर लिखा है, आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जेपी नड्डा जी ने मुझे फ़ोन करके कहा कि मैं ट्रम्प द्वारा एप्पल के सीईओ टिम कुक से भारत में निर्माण न करने के लिए कहने से संबंधित ट्वीट को हटा दूँ। मुझे अपनी निजी राय पोस्ट करने का खेद है, निर्देशों के अनुसार मैंने इसे तुरंत इंस्टाग्राम से भी हटा दिया। धन्यवाद। मेरा मानना है कि कंगना ने जो लिखा वह उनकी अभिव्यक्ति की आजादी का मामला है। नड्डा जी ने हटाने के लिये कहा यह उनके और नड्डा जी के बीच का या पार्टी का आंतरिक मामला है। कंगना को इसे सार्वजनिक करने से नहीं रोका गया या वे नहीं रुकीं बताता है कि सत्तारूढ़ दल में क्या सब चल रहा है। या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आंतरिक मामलों का क्या हाल है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की सेंकेड लीड तेलंगाना के मुख्यसचिव को सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी है। खबर के अनुसार, हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के पास सूचना टेक्नालॉजी केंद्र बनाने के लिए वन नष्ट किये गये हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है कि दो महीने में उस जगह पर वनीकरण नहीं किया गया तो मुख्यसचिव और दूसरे अधिकारी जेल जाने के लिए तैयार रहें। मुझे लगता है कि यह स्थिति सरकार की सेवा में जुट जाने वाले अधिकारियों की आंखें खोलने वाली है और अधिकारियों को यह समझना चाहिये कि नेता बाद में फंसेंगे पहले उनकी बारी आयेगी। टाइम्स ऑफ इंडिया ने आज पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने की लीड ऐप्पल के सीईओ को ट्रम्प की सलाह वाली खबर को बनाया है। कहने की जरूरत नहीं है कि यह सरकार का प्रचार करने वाली तमाम खबरों से महत्वपूर्ण है। खासतौर से इसलिए भी कि ऐप्पल ने 150 देश के लोगों को चेतावनी संदेश भेजकर कहा है कि 100 से अधिक देश के उपयोगकर्ता हैकिंग के शिकार हो सकते हैं। यह तो हाल की बात है। इससे पहले, पिछले साल जुलाई में भी एपल ने इस तरह का अलर्ट भेजा था जिसके बाद भारत में काफी हंगामा हुआ था क्योंकि विपक्ष के कई नेताओं के फोन पर इस तरह के नोटिफिकेशन आए थे। ऐप्पल ने हाल ही में दुनियाभर के सौ से ज्यादा देशों में मौजूद आईफोन यूजर्स को एक गंभीर चेतावनी संदेश भेजा है। इसमें उन्हें बताया गया है कि उनके डिवाइस पर “मर्सिनरी स्पायवेयर” (भाड़े के जासूसी सॉफ्टवेयर) से अटैक किया गया है। कंपनी ने पुष्टि की है कि ये चेतावनियां उन यूजर्स को भेजी गई हैं जो हाईटेक साइबर हमलों का संभावित निशाना बन सकते हैं। यह हमला आमतौर पर सरकारों द्वारा खरीदे गए निजी जासूसी सॉफ्टवेयर के जरिए किया जाता है। बहुत ही आसान शब्दों में कहें तो यह पेगासस अटैक जैसा ही है। हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, ट्रम्प ने भारत में निवेश करने की ऐप्पल की योजना पर असंतोष जताया है और दावा किया है कि भारत ने शून्य शुल्क दौके साथ व्यापार सौदे की पेशकश की है। अखबार ने रायटर्स के हवाले से कहा है, भारत में बेचना बहुत मुश्किल है और वे हमें ऐसे सौदे की पेशकश कर रहे हैं जिसमें बुनियादी तौर पर वे हमसे कोई टैरिफ नहीं लेंगे।
अमर उजाला में द प्रिंट की खबर तो पहले पन्ने पर नहीं ही थी। आज भारत सरकार का कहा, पाकिस्तान गैर जिम्मेदार उसके हाथ में सुरक्षित नहीं परमाणु हथियार शीर्षक खबर फोटो के साथ टॉप पर आठ कॉलम में है। भले शीर्षक पांच कॉलम में ही है। छह कॉलम की लीड का शीर्षक है, आतंक के खात्मे तक सिन्धु संधि बहाल नहीं। द प्रिंट की खबर पहलगाम हिन्सा से संबंधित आतंकी और पाकिस्तानी कनेक्शन का खुलासा कर सकते हैं लेकिन भारत सरकार उसपर क्या कर रही है पता नहीं है। युद्ध खत्म होने के बावजूद संधि बहाल नहीं करने की खबर तो ठीक है लेकिन उसपर कोई सवाल नहीं है। आतंकी गतिविधि को खत्म करने, भारत या देश की जनता को उससे बचाने या उसके लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार साबित करने की दिशा में कोई काम हो रहा है उसकी खबर तो नहीं ही है, इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर बताती है कि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तालिबान से बात की है, पहलगाम में उसके समर्थन का स्वागत किया है। आतंकवाद का खात्मा तालिबान के सहयोग से और भाजपा को भारतीय तालीबान कहा जाना भविष्य के लिए खतरनाक संकेत हैं। खबर उसपर भी नहीं है। टेलीग्राफ की लीड कोलकाता की खबर है। पहले पन्ने की अन्य खबरों में पाकिस्तान पर राजनाथ सिंह का बयान है कि वह गैर जिम्मेदार है, ऐप्पल (आई फोन) मामले में ट्रम्प का बयान द टेलीग्राफ में सिंगल कॉलम में है और सिंगल कॉलम की तीन छोटी खबरों में भी वह खबर नहीं है जो नवोदय टाउम्स में लीड है।


