कोटद्वार। उत्तराखंड के कोटद्वार में मीडिया की एंट्री को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यूपी-उत्तराखंड बॉर्डर पर भारी पुलिस बल तैनात कर पत्रकारों को कोटद्वार में प्रवेश से रोक दिया गया, जबकि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को बिना किसी रोक-टोक के इलाके में जाने दिया गया।
पत्रकारों का कहना है कि जब उन्होंने बार-बार पुलिस से पूछा कि उन्हें किस कानूनी आधार पर रोका जा रहा है, तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। उल्टा पुलिस ने उन्हें पीछे धकेल दिया और इलाके से दूर रहने को कहा।
यह मामला कोटद्वार में मोहम्मद दीपक के खिलाफ दर्ज मुकदमे से जुड़ा है, जो हाल के दिनों में तब सुर्खियों में आया जब वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम वहां रिपोर्टिंग के लिए पहुंचे थे। उसी दौरान एएसपी के साथ उनकी नोकझोंक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसने पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक घटना को कई दिन बीत जाने के बावजूद अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जबकि इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। इसके बावजूद पुलिस ने मीडिया को मौके पर जाकर रिपोर्टिंग करने से रोक दिया, जिससे प्रशासन की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं।
पत्रकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उत्तराखंड में अब हालात ऐसे बनते जा रहे हैं जहां संवैधानिक संस्थाओं और मीडिया को काम करने से रोका जा रहा है, जबकि दक्षिणपंथी संगठनों को खुली छूट दी जा रही है।
मीडिया कर्मियों का कहना है कि अगर सब कुछ कानून के दायरे में है तो पुलिस को रिपोर्टिंग से डरने की जरूरत क्यों है। आखिर कोटद्वार में ऐसा क्या है जिसे जनता से छुपाया जा रहा है?
इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तराखंड में प्रेस की स्वतंत्रता और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उत्तराखंड अब फासिस्ट राज्य बन चुका है। केवल हिंदू हुड़दंगियों और आतंकवादियों को खुली छूट है। संवैधानिक संस्थाओं और मीडिया को काम करने की इज़ाजत नहीं है। डॉ मुकेश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
मीडिया की Entry पर कोटद्वार में रोक
हमें यूपी-उत्तराखंड के बार्डर पर रोका
भारी पुलिस बल तैनात
क्या छुपाना चाहती है पुलिस?
बजरंग दल को Entry, मीडिया पर रोक
अब तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं
हमने बार बार पूछा कि क्यों रोका? हमें पीछे धकेल दिया -सौरभ शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार


