Happy Holi : क्रांति की उम्मीद रखने वाले से यशवंत ने बीस किलो आटा और पचास किलो चावल माँगा!

यशवंत सिंह-

अंग्रेज़ी के एक एक पत्रकार सज्जन तानाशाह प्रबंधन से मुक़दमा लड़ रहे हैं, अपनी बर्ख़ास्तगी के ख़िलाफ़. उन्होंने अपने अंग्रेज़ी न्यूज़ पोर्टल पर खबर छाप कर उसका लिंक मुझे भेजते हुए आदेशित किया कि भड़ास पर भी छाप दो।

हमने कहा हिंदी में करके भेजो तो उन्होंने पूरा मैटर उठा कर गूगल को दिया और उससे अनुवाद कराके हमको चेंप दिए। जब अनूदित खबर को ध्यान से पढ़ने लगा तो ग़ज़ब ग़ज़ब वाक्य दिखे। हमको खुद ही समझ न आए कि इस वाक्य का क्या मतलब होता है।

ऐसे में उनसे पूछ ही लिया कि गूगल से कराया है क्या?

देखिए उसके बाद का चैट-

इसके बाद के जवाब का इंतज़ार कर रहा हूँ।

बीस किलो आटा और पचास किलो चावल (ये मासिक होगा या क्वाटरली या अर्धवार्षिक या वार्षिक, ये बाद में तय कर लिया जाएगा! हाँ ये सच है कि मैं और मेरा परिवार पचास किलो चावल महीने में नहीं खा सकता तो एक दो सेर खुले बाज़ार में बेच कर नून तेल के लिए नगद लेना पड़ेगा) की डील हो जाए तो सप्ताह में एक खबर के अनुवाद का सौदा ख़राब नहीं लग रहा मुझे!

नोट : ये चैट और ये पोस्ट भंग की तरंग से संचालित है!

Happy Holi!



भड़ास व्हाट्सअप ग्रुप- BWG-10

भड़ास का ऐसे करें भला- Donate






भड़ास वाट्सएप नंबर- 7678515849

Comments on “Happy Holi : क्रांति की उम्मीद रखने वाले से यशवंत ने बीस किलो आटा और पचास किलो चावल माँगा!

  • मदन तिवारी प्रूफरीडर एंव अनुवादक says:

    बीस किलो आटा और पचास किलो चावल (ये मासिक होगा या क्वाटरली या अर्धवार्षिक या वार्षिक, ये बाद में तय कर लिया जाएगा! हाँ ये सच है कि मैं और मेरा परिवार पचास किलो चावल महीने में नहीं खा सकता तो एक दो सेर खुले बाज़ार में बेच कर नून तेल के लिए नगद लेना पड़ेगा) की डील हो जाए तो सप्ताह में एक खबर के अनुवाद का सौदा ख़राब नहीं लग रहा मुझे!

    नोट : ये चैट और ये पोस्ट भंग की तरंग से संचालित है!

    10 किलो हमको दे देना गुरु, अपुन जॉब वर्क कर देगा, निजीकरण का जमाना है

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.

*

code