नई दिल्ली | दिल्ली हाई कोर्ट में ‘गैग ऑर्डर’ को लेकर एक अहम कानूनी विवाद सामने आया है। रायपुर के सामाजिक कार्यकर्ता कुनाल शुक्ला ने Delhi High Court में याचिका दाखिल कर उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी है, जिसमें केंद्रीय मंत्री Hardeep Singh Puri की बेटी Himayani Puri से जुड़े कथित मानहानिकारक कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया गया था।
क्या है पूरा मामला?
हिमायनी पुरी ने 10 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया है। आरोप है कि कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में उन्हें अमेरिकी फाइनेंसर और दोषी यौन अपराधी Jeffrey Epstein से जोड़ा गया, जिससे उनकी छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा। इस पर 17 मार्च को हाई कोर्ट के एकल पीठ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स—जैसे X (ट्विटर), गूगल, यूट्यूब, मेटा और लिंक्डइन—को ऐसे कंटेंट हटाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने फिलहाल यह आदेश केवल भारत तक सीमित रखा है, जबकि ‘ग्लोबल टेकडाउन’ का मुद्दा अभी लंबित है।
कुनाल शुक्ला की चुनौती क्या कहती है?
कुनाल शुक्ला ने इस आदेश को “ब्लैंकेट प्री-ट्रायल गैग ऑर्डर” बताते हुए कहा है कि:
- उन्होंने जो सामग्री पोस्ट की, वह पूरी तरह सार्वजनिक दस्तावेजों (SEC फाइलिंग, अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स आदि) पर आधारित थी।
- यह कंटेंट सवाल पूछने वाली (interrogative) प्रकृति का था, न कि आरोप लगाने वाला।
- अदालत ने बिना नोटिस और बिना सुनवाई का मौका दिए आदेश पारित कर दिया, जो न्यायसंगत प्रक्रिया के खिलाफ है।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, याचिका में कहा गया है कि एकल न्यायाधीश ने prima facie केस, संतुलन (balance of convenience) और अपूरणीय क्षति जैसे आधारों को बिना पर्याप्त विश्लेषण के मान लिया।
अभिव्यक्ति की आजादी का मुद्दा
शुक्ला ने अपनी अपील में यह भी तर्क दिया कि:
- मानहानि मामलों में प्री-ट्रायल इंजंक्शन तभी दिया जाना चाहिए जब सामग्री स्पष्ट रूप से झूठी और दुर्भावनापूर्ण हो।
- उनके पोस्ट “फेयर कमेंट” और जनहित पत्रकारिता के दायरे में आते हैं।
- यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
याचिका में कहा गया है कि इस तरह का प्रतिबंध “prior restraint” है, जो न सिर्फ असंवैधानिक है बल्कि खोजी पत्रकारिता पर “चिलिंग इफेक्ट” डालता है।
कोर्ट में आगे क्या होगा?
इस मामले की सुनवाई सोमवार को डिवीजन बेंच—जस्टिस Vivek Chaudhary और जस्टिस Renu Bhatnagar—के समक्ष होनी है। शुक्ला की ओर से एडवोकेट मयंक जैन, मधुर जैन और अर्पित गोयल पेश हुए हैं।
मानहानि मुकदमे में क्या कहा गया?
हिमायनी पुरी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि:
- उनके खिलाफ एक सुनियोजित और दुर्भावनापूर्ण ऑनलाइन अभियान चलाया गया।
- उन्हें Jeffrey Epstein और उसके आपराधिक मामलों से जोड़ने की कोशिश की गई।
- यह कंटेंट अभी भी सोशल मीडिया पर मौजूद है और लगातार फैल रहा है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान हो रहा है।
मुकदमे में 1-14 तक प्रतिवादी के रूप में पत्रकारों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नामित किया गया है, जबकि अन्य “जॉन डो” (अज्ञात) हैं।
मामले का व्यापक महत्व
यह केस सिर्फ एक मानहानि विवाद नहीं, बल्कि एक बड़े सवाल को सामने लाता है— क्या अदालतें ट्रायल से पहले ही कंटेंट हटाने का आदेश देकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित कर सकती हैं?
एक तरफ व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की सुरक्षा है, तो दूसरी ओर फ्री स्पीच और खोजी पत्रकारिता की आजादी।


