कंपनी ने अंग्रेजों को देश सौंपा था मोदी जी ये देश कंपनी को सौंप रहे हैं!

प्रधानमंत्री मोदी जी, कहते हैं इतिहास खुद को दोहराता है और आपकी सरकार का कामकाज देखकर हमसब इतिहास को वर्तमान बनता देख रहे हैं। भारत में अंग्रेजी राज की शुरुआत ब्रितानी सरकार ने नहीं की थी। पहले आई ईस्ट इंडिया कंपनी। कंपनी ने भारत में व्यापार शुरू किया और फिर धीरे-धीरे पूरे भारत पर कब्जा कर लिया।

ज्यादातर भारतीय राजाओं ने कंपनी के सामने घुटने टेक दिए और जिन्होंने नहीं टेके उन्हें भारतीय गद्दारों के सहयोग से या तो दिल्ली के खूनी दरवाज़े पर काट कर लटका दिया गया या फिर उनको दो गज ज़मीं न मिल सकी कूए यार में।

तब कंपनी वाले उन्हीं गद्दारों को देशभक्त कहते थे और जो कंपनी की सेना से देश के लिए लड़ रहे थे उन्हें राष्ट्रद्रोही कहा जाता था। 1857 में जब दुनिया ये जान गई कि ईस्ट इंडिया कंपनी दरअसल ब्रितानी सरकार के साम्राज्यवाद का टूल है और भारत पर कंपनी राज के पीछे ब्रातानी हुकूमत है तो फिर परोक्ष रूप से ब्रितानी हुकूमत ने भारत को अपने कब्जे में ले लिया।

ये इतिहास आज फिर खुद को दोहराता दिख रहा है। देश के तमाम सार्वजनिक उपक्रम देश के 4-5 बड़े उद्योगपतियों को आपकी सरकार देती जा रही है। आपकी सरकार ने एयर इंडिया को मुनाफा कमाने वाली दुकान समझ लिया है। और उसे बेचने की तैयारी में है।

आपको इसके नतीजे मालूम होंगे। एयर इंडिया के बिकने का मतलब है देश में हवाई सेवा पर पूरी तरह से प्राइवेट सेक्टर का कब्जा होना। मतलब हवाई सेवा पर कंपनी राज। अब ये कंपनी सरकार चाहेगी तो हवाई जहाज उड़ेंगे नहीं चाहेगी तो नहीं उड़ेंगे।

कंपनी सरकार कहेगी कि 5 हजार नहीं हम तो 25 हजार किराया लेंगे। लखनऊ वाले अधिक टैक्स देंगे तब ही हम उनके लिए हवाई जहाज उड़ाएंगे, वगैरह-वगैरह। आम आदमी के पास कुछ नहीं होगा। सरकार कहेगी हावाई जहाज तो हमारे हैं ही नहीं तो हम क्या करें।

यही हाल आप रेलवे का कर रहे हैं। कंपनी सरकार अब ट्रेन भी चलाएगी। आपकी सरकार धीरे-धीरे कंपनी सरकार से रलवे को बेच ही रही है। अब कंपनी सरकार अपने हिसाब से ट्रेनों को चलाएगी। मालदार लोग प्रीमियम में चलेंगे और देश का सामान्य नागरिक कंपनी सरकार के सिपाहियों के कोड़े खाएगा।

BSNL को भी आपकी सरकार निबटाने में जुट ही गई है। अभी चलती हालत में BSNL को कंपनी सरकार खरीदेगी नहीं। क्योंकि चलती हालत में कीमत ज्यादा लगेगी। तो फिर कंपनी बहादुर ने कहा होगा कि पहले घाटे में धकेल कर इसे बंद करो फिर हमें कबाड के भाव बेच दो। और ऐसे दूरसंचार पर भी कंपनी राज कायम हो जाएगा।

फिर कंपनी सरकार कहेगी कि मोबाइल पर फेसबुक चलाने का अलग से चार्ज होगा और ह्वाट्सऐप का अलग। इंटरनेट का रिचार्ज अलग होगा और कॉल टाइम के लिए अलग से रिचार्ज होगा। हम क्या करेंगे ! हम अपनी सरकार से कहने जाएंगे कि देखिए इन लोगों ने तो लूट मचा रखी है तब आप कहेंगे कि हम क्या करें, दूरसंचार तो हमारे हाथ में ही नहीं है।

अच्छा एक और बात, ये बताइए कि सार्वजनिक बिजली कंपनियों से बिजली खरीदने के पैसे जब आपके पास नहीं हैं तो फिर प्राइवेट कंपनियों से महंगी बिजली खरीदने के पैसे कहां से आ जाते हैं ? देश को जब सार्वजनिक बिजली उत्पादन इकाइयों से सस्ती बिजली मिल सकती है तो फिर प्राइवेट कंपनी की महंगी बिजली लेने को हम मजबूर क्यों हैं ? क्यों देश की तमाम सार्वजनिक बिजली उत्पादन इकाइयों को तबाह किया जा रहा है ? आपकी सरकार बिजली को पूरी तरह से कंपनी राज के हवाले करने में लगी हुई है।

यही हाल उच्च शिक्षा है। अंबानी जी की एक अदृश्य यूनिवर्सिटी के लिए आपका पूरा तंत्र देश के नामी-गिरामी उच्च शिक्षण संस्थानों को बदनाम में करने में लगा हुआ है। हैदराबाद यूनिवर्सिटी, जाधवपुर यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, जएनयू जैसे तमाम विश्व विख्यात संस्थान आपके शासनकाल में विवादों का अड्डा बना दिए गए। इनकी साख ख़राब करने के पीछे कुछ तो मकसद होगा ही।

फिर कहा जाएगा कि भाई कंपनी बहादुर ये सब भी आप ही ले लो, हमसे नहीं चलने वाले। उसके बाद प्राइमरी एजुकेशन के लिए माहौल बनाना शुरू करेंगे आपके लोग। बाद में प्राइमरी एजुकेशन भी कंपनी राज के हवाले कर देंगे। फिर कंपनी सरकार कहेगी कि अधिक पैसा देने वालों के बच्चों को अच्छा पढ़ाएंगे और कम पैसा देने वालों के बच्चों को थोड़ा-बहुत पढ़ा देंगे। हम अपनी सरकार से शिकायत करेंगे तो सरकार कहेगी कि हम क्या करें, स्कूल-कॉलेज तो हम चलाते ही नहीं, वो तो कंपनी सरकार चलाती है।

अस्पतालों का भी यही हाल होगा। धीरे-धीरे फिर एक दिन 1857 जैसे हालात होंगे और आप कहेंगे कि लो जी हटाया पर्दा, हमारी तो कोई सरकार ही नहीं थी। सरकार तो कंपनी बहादुर की ही थी हम तो बस ऐसे ही बैठे थे। अब जाने कंपनी सरकार, हम तो झोला उठाकर चले।

टीवी पत्रकार एवं कवि असित नाथ तिवारी का विश्लेषण.

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Posted by Bhadas4media on Monday, December 2, 2019
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