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लॉरेंस बिश्नोई का जेल से इंटरव्यू करने वाले ABP न्यूज के संपादक पर कार्रवाई न करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और राजस्थान की जेलों में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का इंटरव्यू लेने वाले ABP न्यूज के पत्रकार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का निर्देश दिया है. यह निर्देश CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने दिया है.

सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा प्रबोध कुमार आईपीएस की अध्यक्षता वाली एसआईटी को दिए गए निर्देशों के खिलाफ चुनौती पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें इंटरव्यू से संबंधित मामले में FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया, जिससे सीआरपीसी के प्रावधानों के अनुसार जांच की जा सके.

पंजाब की जेलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल के खिलाफ स्वप्रेरणा से मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने अधिकारियों की मिलीभगत का पता लगाने के लिए कथित गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के टीवी इंटरव्यू की जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT का गठन किया. हाई कोर्ट ने पहले पाया कि यूट्यूब पर इंटरव्यू को 12 मिलियन बार देखा गया और लक्षित हत्याओं तथा आपराधिक गतिविधियों को गलत तरीके से उचित ठहराया गया.

सीजेआई ने ABP न्यूज नेटवर्क और पत्रकार जगविंदर पटियाल द्वारा दायर रिट याचिका और विशेष अनुमति याचिका में नोटिस जारी करते हुए मौखिक रूप से टिप्पणी की कि पत्रकार का उद्देश्य अपराधियों को बेनकाब करना था, लेकिन जेल परिसर के भीतर इंटरव्यू आयोजित करना जेल के नियमों का गंभीर उल्लंघन है.

CJI ने अपनी टिप्पणी में कहा कि, “निश्चित स्तर पर शायद आपके मुवक्किल ने इंटरव्यू की मांग करके जेल के कुछ नियमों का उल्लंघन किया हो, लेकिन यह तथ्य कि जेल के भीतर ऐसा हो सकता है, यह भी एक बहुत गंभीर मामला है.”

याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि इंटरव्यू ने सड़ांध को उजागर करने में मदद की है. उन्होंने तर्क दिया कि पत्रकार ने खोजी पत्रकारिता के हिस्से के रूप में एक स्टिंग ऑपरेशन किया ताकि यह दिखाया जा सके कि कैसे बिश्नोई कनाडा में गैंगस्टर गोल्डी बरार के संपर्क में था. ब्लैक बक केस के मद्देनजर सलमान खान के खिलाफ हमले की साजिश रच रहा था.

इसके बाद पीठ ने पंजाब, राजस्थान और केंद्र के स्थायी वकील को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

सीजेआई ने अपने आदेश में कहा, दूसरा याचिकाकर्ता एसआईटी जांच में सहयोग करेगा, हम निर्देश देते हैं कि इस न्यायालय के अगले आदेश तक पत्रकार के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा. पिछले महीने न्यायालय ने लॉरेंस बिश्नोई द्वारा टीवी इंटरव्यू पर एसआईटी जांच के लिए हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी.

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