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सियासत

पूर्व सांसद की शिकायत लेकर पहुंचे वकील के पत्रकार होने पर भड़का सुप्रीम कोर्ट!

सुप्रीम कोर्ट ने एक अधिवक्ता के बतौर पत्रकार भूमिका निभाने पर सवाल खड़े किए हैं. न्यायमूर्ति अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कि बार काउंसिल के नियम वकीलों को पत्रकारिता करने की इजाजत नहीं देते हैं.

दरअसल, यह खंडपीठ इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आपराधिक मानहानि की कार्यवाही को रद्द कर दिया गया था.

न्यायालय ने अपील पर नोटिस जारी करने की सहमति जताते हुए सवाल किया कि अपीलकर्ता एक वकील और पत्रकार दोनों के रूप में कैसे काम कर रहा है. न्यायमूर्ति ओका ने कहा, मुझे आपका पेशेवर कदाचार समझ में नहीं आ रहा है. आप कहते हैं कि आप वकील भी हैं और पत्रकार भी. बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमानुसार, इस बारे में पूरी तरह से पाबंदी है.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम कहते हैं कि जो वकील बार काउंसिल में रजिस्टर है वह कोई अन्य रोजगार में शामिल नहीं हो सकता. हालांकि, वकील ने बताया कि वह एक स्वतंत्र पत्रकार के रूप में काम करता है, जिस पर अदालत ने संदेह जताया और कहा कि कृपया दोहरी नहीं आप एक ही भूमिका का निर्वहन करें.

मामला क्या है?
सितंबर 2022 में बृजभूषम शरण सिंह द्वारा यूपी के मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को लिखे गए दो पत्रों से संबंधित है, जिसमें कहा गया ता कि शिकायतकर्ता (मोहम्मद कामरान) के खिलाफ विभिन्न आपराधिक मामले लंबित हैं. इस मानहानि मामले को 12 मार्च को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था.

शिकायतकर्ता ने तर्क दिया कि बृज भूषम सिंह ने उनकी छवि और प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और समाचारपत्रों पर अपना पत्र प्रसारित करके उन्हें साजिशकर्ता और चोर कहकर संबोधित किया था.

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