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इंडिया टुडे, दिल्ली प्रेस, आउटलुक, मलयालम मनोरमा और विकटन जैसे बड़े प्रकाशन समूहों में LPG संकट; केंद्र से लगाई गुहार

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच देश में एलपीजी आपूर्ति का असर अब मीडिया इंडस्ट्री तक पहुंचता दिख रहा है। Indian Newspaper Society (INS) और Association of Indian Magazines (AIM) ने केंद्र सरकार से अखबार और मैगजीन छपाई के लिए एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता देने की मांग की है।

मीडिया रिपोर्टस् के अनुसार, INS के अध्यक्ष Vivek Gupta ने 16 मार्च को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri को लिखे पत्र में कहा है कि एलपीजी की कमी के चलते कई अखबार संस्थानों का संचालन प्रभावित होने लगा है। उन्होंने आग्रह किया कि अखबारों के लिए एलपीजी आपूर्ति को “आवश्यक सेवा” की श्रेणी में रखा जाए।

पत्र में बताया गया है कि कई समाचार पत्र संस्थान हीट-सेट प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग करते हैं, जिसमें स्याही को सुखाने के लिए उच्च तापमान की जरूरत होती है और इसके लिए एलपीजी अनिवार्य है। इसके अलावा, 24 घंटे चलने वाले प्रेस में कर्मचारियों के लिए नॉन-कमर्शियल कैंटीन भी संचालित होती हैं, जो एलपीजी पर निर्भर हैं।

INS ने कहा कि देश के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति में कटौती के कारण अखबारों के लिए रोजमर्रा का संचालन और कैंटीन चलाना मुश्किल होता जा रहा है। संस्था ने मांग की है कि अखबार संस्थानों के लिए एलपीजी को आवश्यक आपूर्ति की श्रेणी में शामिल किया जाए ताकि निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

इसी मुद्दे पर 20 मार्च को AIM ने भी मंत्री को पत्र लिखकर विस्तृत प्रस्तुति दी। AIM ने कहा कि वह 40 से अधिक प्रकाशकों, 10 भाषाओं में प्रकाशित 200 से ज्यादा मैगजीन और करीब 15 करोड़ पाठकों का प्रतिनिधित्व करता है, जिनमें India Today, Delhi Press, Outlook, Malayala Manorama और Vikatan जैसे बड़े प्रकाशन शामिल हैं।

AIM के अनुसार, मैगजीन की छपाई मुख्य रूप से वेब ऑफसेट मशीनों पर होती है, जिनमें से कई जर्मन तकनीक की हैं और वे एलपीजी पर ही निर्भर हैं। इन मशीनों के लिए कोई व्यवहारिक वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध नहीं है। यहां तक कि अखबारों के ग्लॉसी सप्लीमेंट भी इन्हीं मशीनों पर छपते हैं, जिससे एलपीजी की निरंतर आपूर्ति बेहद जरूरी हो जाती है।

संस्था ने यह भी तर्क दिया कि COVID-19 lockdown in India के दौरान प्रिंट मीडिया को आवश्यक सेवा माना गया था, इसलिए मौजूदा हालात में भी उसी तरह की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

AIM ने यह भी बताया कि Natural Gas (Supply Regulation) Order, 2026 के तहत प्राथमिकता आवंटन का ढांचा तो बनाया गया है, लेकिन उसमें अखबार और मैगजीन छपाई को अलग से शामिल नहीं किया गया है और फिलहाल इसे सामान्य औद्योगिक उपभोक्ता की श्रेणी में रखा गया है।

संस्था ने मांग की है कि प्रिंटिंग सेक्टर को प्राथमिकता श्रेणी में शामिल करते हुए पिछले छह महीनों की औसत खपत का कम से कम 80% एलपीजी सुनिश्चित किया जाए। साथ ही Indian Oil Corp, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum को निर्देश दिए जाएं कि पंजीकृत प्रिंटिंग प्रेस के लिए त्वरित आपूर्ति व्यवस्था बनाई जाए।

दोनों संगठनों के पत्रों से साफ है कि एलपीजी की कमी अब सिर्फ अलग-अलग प्रिंटिंग यूनिट्स की समस्या नहीं रही, बल्कि यह पूरे प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री के सामने एक बड़ा संकट बनता जा रहा है। अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो अखबारों और मैगजीन की छपाई और वितरण पर व्यापक असर पड़ सकता है।

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