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उत्तर प्रदेश

ये डकैत तो सचमुच के पुलिस वाले निकले!

वेद रत्न शुक्ला-

हमरी मानो सिपहिया से पूछो पुलिस ने ही लूट लीन्ही सोना मेरागोरखपुर| रेलवे बस अड्डे से महराजगंज के दो सर्राफा कारोबारियों को बुधवार को चेकिंग के बहाने अगवा कर 30.20 लाख की लूट करने वाले वर्दीधारी बदमाश सच्ची मुच्ची पुलिसवाले ही निकले। लुटेरे पास के ही जिले बस्ती के पुरानी बस्ती थाने पर तैनात दारोगा और दो सिपाही थे। गोरखपुर पुलिस ने तीनों पुलिसवालों समेत पांच को दबोचकर लूटी गई नकदी और सोना भी बरामद कर लिया है। इनके खिलाफ रासुका और गैंगस्टर की कार्रवाई होगी। तीनों को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही शासन के पास बर्खास्तगी के लिए पत्र लिखा जा रहा है। उधर, लापरवाही बरतने पर पुरानी बस्ती थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर अवधेश राज और बुधवार को ड्यूटी पर तैनात आठ अन्य पुलिसकर्मियों को भी निलंबित कर दिया गया है।

महराजगंज के निचलौल कस्बे से लखनऊ जा रहे सर्राफा कारोबारियों दीपक वर्मा और रामू वर्मा से बुधवार सुबह वर्दीधारियों ने 19 लाख रुपये और 11.20 लाख के गहने लूट लिए थे। छानबीन में पुलिस को फुटेज में बस अड्डे के पास वह बोलेरे दिखी जिसमें बैठने से दोनों कारोबारियों ने इनकार कर दिया था। बस्ती की बोलेरो के मालिक के जरिए पुलिस ने ड्राइवर देवेंद्र यादव को दबोचा। ड्राइवर ने बताया कि वह गाड़ी से दबिश के लिए पुरानी बस्ती थाने में तैनात दरोगा धर्मेंद्र यादव, सिपाही महेन्द्र यादव और संतोष यादव को लेकर गोरखपुर आया था। इसके बाद गोरखपुर पुलिस ने दरोगा धर्मेंद्र यादव और दोनों सिपाहियों को उनके थाने से ही दबोच लिया. पहले तो वे घुमाते रहे लेकिन कड़ी पूछताछ में टूट गए और वारदात को अंजाम देना कबूल कर लिया। मुखबिरी करने वाले महराजगंज के इटहिया, ठूठीबारी निवासी शैलेष यादव और मारवाड़ी टोला, निचलौल के दुर्गेश अग्रहरि को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

एसएसपी, गोरखपुर, जोगेन्द्र कुमार ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के पास से लूट की रकम और सोना बरामद कर लिया गया है। वर्दी को दागदार करने वाले इन पुलिसवालों के खिलाफ एनएसए और गैंगस्टर की कार्रवाई की जाएगी। इनकी बर्खास्तगी के लिए भी ऊपर के अफसरों को लिखा जा रहा है। कोई पुलिसर्मी दोबारा इस तरह की हरकत न करे, इसलिए इन्हें कठोर से कठोर दंड दिलाने की कोशिश की जाएगी।

30 दिसंबर को भी की थी लूट

आरोपियों ने 30 दिसम्बर को शाहपुर, गोरखपुर इलाके में एक अन्य सर्राफा कारोबारी से लूट भी कबूली है। उसमें दारोगा के अलावा एक अन्य सिपाही और यही बोलेरो चालक शामिल था। उस वारदात में लूटे गए चांदी के गहने भी पुलिस ने बरामद किए हैं।

लुटेरे पुलिसवालों का सेजरा

सब इंस्पेटर धर्मेन्द्र यादव, मूल पता जगरनाथपुर, थाना सिकरीगंज गोरखपुर

कांस्टेबल महेन्द्र यादव, मूल पता रेकवार डीह, थाना सराय लखनसी, जिला मऊ

कांस्टेबल संतोष यादव, मूल पता अलवरपुर, थाना जंगीपुर, जिला गाजीपुर



अमर उजाला अखबार के क्राइम रिपोर्टर वीरेंद्र पांडेय अपनी फेसबुक वॉल पर लिखते हैं

बहुत नाइंसाफी है ये तो…!

इंसान की खाल में भेड़िया प्रत्येक बिरादरी में हैं। पुलिस, पत्रकार, अफसर, बाबू, मुंसिफ, जज, मंत्री, संतरी कोई भी हो। लेकिन कुछ की करतूत से समूची बिरादरी को शर्मसार करना नाइंसाफी होगी। कम से कम उसके साथ तो घनघोर नाइंसाफी होगी जिससे बेहतरी की हमें उम्मीद है।

जानता हूँ कि ऐसे समय में इस तरह की दलील का मतलब कुछ और भी निकाला जा सकता है लेकिन यकीन मानिए, मेरा इरादा किसी का बचाव करना नहीं अपितु बाकियों का मनोबल न टूटे, उनमें कुंठा-हीन भावना न पनपे मन में यह इच्छा जरूर है।

बेशक तीनों का कृत्य वर्दी पर काला धब्बा लगाने जैसा है लेकिन इसमें वर्दी, महकमे या पुलिस का कोई दोष नहीं। इसके लिए वे तीनों खुद जिम्मेदार हैं। जो खाकी की आन-बान-मान और शान को कायम नहीं रख पाए।

दोषी उनकी परवरिश, वह आब-ओ-हवा है,जिसने उनमें इतनी भी गैरत बाकी नहीं रख छोड़ी कि खाकी पहन कर दिन दहाड़े डकैती जैसा पाप कर बैठे।

इन अभागों की मति न मारी गई होती तो शानदार-रौबदार नौकरी करते हुए डाकू बनने निकल पड़े। मुझे तो यह सोचकर फिक्र हो रही है कि जेल में हकीकत वाले डकैतों ने इनका इस्तकबाल कैसा किया होगा ? क्योंकि ऐसे पुलिस वालों को जेल में बंदी लतियाकर ‘भेल्कल’ करते रहे हैं..!

शुभरात्रि

वीरेंद्र
अमर उजाला
बस्ती

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