दिल्ली। मैहर की शांत और आस्था से भरी पहचान उस समय गंभीर संकट में आ गई थी जब अवैध खनन ने पहाड़ों जंगलों और प्राकृतिक स्वरूप को खोखला करना शुरू कर दिया था प्रशासनिक उदासीनता के बीच खनन माफियाओं का प्रभाव लगातार बढ़ रहा था लेकिन इसी दौर में दैनिक जागरण मैहर के ब्यूरो प्रमुख गोविंद तिवारी ने जिम्मेदारी संभालते ही एक निर्णायक और लगातार चलने वाला अभियान शुरू किया जिसने पूरे सिस्टम को झकझोर दिया
दैनिक जागरण में प्रकाशित खबरों की श्रृंखला ने अवैध खनन के उस अंधेरे सच को सामने लाया जिसे लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा था हर खबर के साथ माफियाओं की परतें खुलती गईं और जनदबाव तेजी से बढ़ता गया यह सिर्फ रिपोर्टिंग नहीं थी बल्कि एक जनहित की लड़ाई थी जिसमें शब्द हथियार बने और सच सबसे बड़ी ताकत बना
सूत्रों के अनुसार इस दौरान कई दबाव और फोन भी आए लेकिन गोविंद तिवारी अपने अभियान से पीछे नहीं हटे उनकी बेबाक और निर्भीक पत्रकारिता ने यह साफ कर दिया कि सच के आगे किसी भी दबाव की कोई जगह नहीं है लगातार प्रकाशित खबरों का असर यह हुआ कि प्रशासन हरकत में आया और ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू हुई अवैध खदानों पर शिकंजा कसा गया ओवरलोड डंपरों पर कार्रवाई हुई और खनन के अवैध नेटवर्क को सीधी चुनौती मिली
इतना ही नहीं इस अभियान को रोकने के लिए खनन से जुड़े लोगों द्वारा बड़े स्तर पर आर्थिक प्रलोभन देने की कोशिश की गई बैग भरकर पैसे भेजे गए लेकिन गोविंद तिवारी ने ऐसे हर प्रलोभन को सख्ती से ठुकरा दिया और पूरी ईमानदारी के साथ उन पैसों को वापस कर दिया अपनी निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता को किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होने दिया
मैहर जो मां शारदा की नगरी के रूप में जाना जाता है उसकी असली पहचान उसके पहाड़ जंगल और प्राकृतिक संतुलन में बसती है इस पहचान को बचाने की इस लड़ाई में दैनिक जागरण और गोविंद तिवारी का यह अभियान एक मिसाल बनकर उभरा है जिसने यह साबित किया कि जब पत्रकारिता अपने मूल उद्देश्य के साथ खड़ी होती है तो वह सिर्फ खबर नहीं बल्कि बदलाव की ताकत बन जाती है और मैहर में यही बदलाव अब साफ दिखाई देने लगा है।






