Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

आज के अखबार : ममता ने बंगाल में अघोषित इमरजेंसी के आरोप लगाए, खबर है मोदी ने …के नेताओं से बात की

संजय कुमार सिंह

आज देशबन्धु को छोड़कर मेरे सभी अखबारों में ईरानी हमले की खबर लीड है। देशबन्धु में पहले पन्ने पर विज्ञापन नहीं होता है। इसलिए कई खबरें हैं। लेकिन ईरान के हमले की खबर नहीं है। तीन कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, 12 देशों ने ईरान से हमले रोकने की अपील की। उपशीर्षक है, सऊदी की राजधानी रियाद में बैठक के बाद 12 देशों ने संयुक्त बयान जारी किया। लीड का शीर्षक है, बंगाल में अघोषित आपातकाल जैसे हालात। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप। कहा, बंगाल लडेगा, विरोध करेगा और हर साजिश को नाकाम करेगाअमर उजाला की लीड का शीर्षक है, ईरानी हमले से धधके सऊदी-कुवैत व कतर के ऊर्जा संयत्र, संकट गहराया… कीमतें बढ़ीं। नवोदय टाइम्स का शीर्षक भी ऐसा ही है, कतर, सऊदी और कुवैत पर हमले के बाद युद्ध संकट गहरा गया है। कलकत्ता के अंग्रेजी अखबार, द टेलीग्राफ की लीड भी ईरान के हमले की है लेकिन ममता बनर्जी का आरोप पहले पन्ने पर दो कॉलम में है। इसके साथ यह सूचना भी कि आरजी कर अस्पताल में जिस महिला डॉक्टर की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी उसकी मां ने भाजपा का चुनावी टिकट लेने की ‘सहमति’ दे दी है। आप जानते हैं कि अपराध के इस मामले में भाजपा ने लंबे समय तक आंदोलन किया (करवाया) और इसे मुद्दा बनाकर पश्चिम बंगाल की तृणमूल सरकार और महिला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को घेरने के हर संभव उपाय किए गए। केंद्रीय एजेंसी सीबीआई से जांच करवाई गई पर उसमें भी कुछ खास नहीं निकला। वही हुआ जो कलकत्ता पुलिस ने शुरू में ही कह दिया था और उस हिसाब से कार्रवाई कर ली थी। अब पीड़िता की मां को टिकट देकर, चुनाव लड़वाकर भाजपा राजनीति चाहे जैसी करे, हत्या के एक अपराध को राजनीतिक रंग देने और उससे उम्मीदवार बनाने की कला का खुलासा तो हो ही रहा है। दुर्भाग्य से यह खबर नहीं है। उल्लेखनीय है कि ओम बिरला अपने खिलाफ प्रस्ताव गिरने तक लोकसभा में नहीं आए तो उनकी तारीफ हुई लेकिन ज्ञानेश कुमार वही बड़प्पन नहीं दिखा रहे हैं तो मुद्दा नहीं है, चर्चा भी नहीं है।

ऐसे में ममता बनर्जी की पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नियमानुसार महाभियोग का प्रस्ताव दिया है। लोकसभा और राज्य सभा के जरूरत से ज्यादा सांसदों के दस्तखत हैं। लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रस्ताव पर विचार और कार्रवाई से पहले खुद को चुनाव कार्य से अलग रखने की उदारता नहीं दिखाई है। चुनाव की घोषणा के लिए आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में इस आशय के सवाल का जवाब नहीं दिया और सब कुछ ‘चंगा सी’ के अंदाज में चल रहा है। यह वैसे ही है कि उन्होंने कहा था, राहुल गांधी को माफी मांगनी पड़ेगी। राहुल गांधी ने माफी नहीं और चुनाव आयोग ने कर्नाटक पुलिस को वह जानकारी नहीं दी जिसे नहीं देने के कारण राहुल गांधी ने चुनाव आयुक्त पर वोट चोरों का बचाव करने का आरोप लगाया था। इसके बावजूद मामला भाजपा की ओर बढ़ता दिख रहा है। ऐसा नहीं है कि आज अखबारों में सिर्फ ममता बनर्जी की शिकायत को प्रमुखता नहीं मिली है। सच्चाई यह है कि देश के हालात बताने वाली कई खबरें पहले पन्ने पर नहीं हैं। द टेलीग्राफ की लीड का फ्लैग शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होगा, हमलों के कारण ईंधन की कीमत आसमान छूने लगी, सेनसेक्स लुढ़क रहा है और अरब देशों के सीधे संघर्ष में खिंच जाने का जोखिम बढ़ रहा है। मुख्य शीर्षक है, ईरान ने खाड़ी देशों में तेल ठिकानों को निशाना बनाना बढ़ाया। इसी में एक और खबर ट्रम्प की है। उन्होंने कहा है, “इजरायल ने हिंसक पलटवार किया, अब ऐसा नहीं दोहराएगा”द हिन्दू में यही खबर लीड है। शीर्षक है, “इजरायल ईरान की गैस इकाई पर फिर हमला नहीं करेगा : ट्रम्प”हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है, खाड़ी के पेट्रोकेमिकल ठिकानों पर हमले से तनाव बढ़ा; अमेरिका ईरान के तेल पर छूट देने पर विचार कर रहा है। तेल ठिकाने पर हमला और उसके जवाब से ट्रम्प की परेशानी समझ में आती है जो उनके बयानों में दिख भी रही है। लेकिन भारत में भारत से संबंधित खबरें होनी चाहिए या अंतरराष्ट्रीय खबरों के उस हिस्से को ज्यादा महत्व मिलना चाहिए जो भारत से संबंधित है। इस लिहाज से सेनसेक्स गिरा बड़ी खबर है। और कई अखबारों में है। इंडियन एक्सप्रेस में पहले पन्ने की एक खबर का शीर्षक है, “बंगाल पर नियंत्रण की साजिश : तबादलों को लेकर ममता ने चुनाव आयोग और भाजपा पर हमला किया”।  

इन खबरों के बीच प्रधानमंत्री का प्रचार भी है। लेकिन पश्चिम बंगाल चुनाव, तृणमूल कांग्रेस के महाभियोग के नोटिस, इसके साये में चुनाव आयोग की मनमानी और इस कारण मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आरोप खासा महत्व रखता है लेकिन इसे प्रमुखता नहीं मिली है। दि एशियन एज में सेकेंड लीड का शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने खाड़ी के नेताओं से बात की, तेल और गैर इंफ्रा पर हमले खत्म करने की अपील की। नवोदय टाइम्स में यह खबर चार कॉलम की लीड के नीचे तीन कॉलम में है। शीर्षक है, मोदी ने फ्रांस, जॉर्डन, ओमान, मलेशिया के नेताओं से बात कीअमर उजाला में यह चार कॉलम का बॉटम है। पांचों राष्ट्राध्यक्षों की फाइल फोटो है और शीर्षक है, मोदी की पांच राष्ट्राध्यक्षों से बात, ऊर्जा के बुनियादी ढांचों पर हमले की कड़ी निन्दा  कीदेशबन्धु ने इसे सिंगल कॉलम में छापा है। शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने 24 घंटे में 4 देशों से बात की। इस शीर्षक से लगता है कि बातचीत हेडलाइन मैनेजमेंट के लिए भी हो सकती है। इसके साथ की एक सिंगल कॉलम की खबर का शीर्षक है, ट्रम्प ने ईरान को दी तबाह करने की चेतावनी। आप जानते हैं कि हमले की शुरुआत इजराइल और अमेरिका ने की थी। ईरान बदला जरूर ले रहा है लेकिन वह जवाबी कार्रवाई ही कर रहा है और पड़ोस के अमेरिकी  तेल ठिकानों पर हमला कर बदला ले रहा है। इजराइल ने उसके तेल ठिकाने पर हमला किया तो ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। अब ट्रम्प इजराइल की तरफ से आश्वासन दे रहे हैं।

इससे पहले, होर्मुज जल डमरूमध्य से तेल के टैंकर निकालने के संकट के जवाब में ट्रम्प ने कई देशों से अपने युद्ध पोत तैनात करने की अपील लेकिन कई देशों ने ऐसा करके युद्ध में अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया तो ट्रम्प नाराज भी हुए। इसके बाद इजराइल के हमले तथा इरान की जवाबी कार्रवाई हुई तो ट्रम्प ने इजराइल की तरफ से आश्वासन दिया लेकिन ईरान को तबाह करने की धमकी भी दी है। दूसरी ओर नरेन्द्र मोदी ने पहले ईरान और अब कई देशों के प्रमुखों से बात की है। इसमें राजनीति है या कूटनीति या सामान्य जरूरत और परेशानी – अखबारों ने नहीं बताया है और इन खबरों के महत्व तथा इनमें दिलचस्पी की आड़ में देसी खबरों को भी महत्व नहीं दिया है। उदाहरण के लिए, बंगाल में अघोषित आपातकाल जैसे हालात को सिर्फ देशबन्धु ने छह कॉलम में लीड बनाया है। बाकी के दो कॉलम में सुप्रिया श्रीनेत का आरोप है, सवाल पूछने वालों को परेशान कर रही है मोदी सरकार। सोशल मीडिया पर इसके और भी उदाहरण और मामले हैं लेकिन अभी ये अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं पहुंचे हैं। इसी तरह, सेनसेक्स का लुढ़कना तो खबर है लेकिन निवेशकों के 12 लाख करोड़ रुपए डूब गए – यह सेकेंड लीड है। अमर उजाला में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का बयान भारत के बयान की तरह, चार कॉलम में छपा है। और यह बॉटम के ठीक ऊपर चार कॉलम में है। शीर्षक है, ऊर्जा संयत्रों पर हमले चिन्ताजनक व स्वीकार्य। मुझे लगता है कि अमेरिका और इजराइल के हमले भी चिन्ताजनक थे। इससे पहले वेनेजुएला में अमेरिका ने जो किया वह कम चिन्ताजनक नहीं था और ईरान में स्कूल पर हमला तथा उसमें बच्चियों का मारा जाना कम चिन्ताजनक नहीं था। इन मामलों में भारत की प्रतिक्रिया नहीं थी। प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के प्रमुख से बात तो की लेकिन उन्होंने भारत की अपील नहीं मानी। भले यह खबर भारत में नहीं छपी और यह प्रचारित किया गया कि प्रधानमंत्री ने ही सब करवा लिया और ये जहाज होर्मुज स्ट्रेट पार करके आया तथा यह दूसरा या तीसरा जहाज है। सच्चाई यह है कि ईरान ने पहले ही कहा था कि वह कुछ जहाज को जाने देगा। यही बात विदेश मंत्री ने कही थी लेकिन प्रचार ऐसे किया गया जैसे भारत के लिए सब कुछ ठीक और सामान्य है। यानी मोदी है तो मुमकिन है।

दूसरी ओर, राहुल गांधी ने दिल्ली में दंगे जैसे हालात बनाने का आरोप लगाया है। इस खबर को भी पहले पन्ने पर जगह और प्रमुखता नहीं मिली है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनसार, दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस से कहा है कि वह ईद के लिए अनुकूल माहौल सुनिश्चित करने के प्रति अतिरिक्त सतर्क रहे। हाल में राज्य सभा चुनाव के बाद देशबन्धु में राज्यसभा सांसदों से संबंधित एक दिलचस्प और महत्वपूर्ण खबर है। इस खबर के अनुसार, राज्यसभा की एक सीट खाली है और तीन के शपथपत्र उपलब्ध नहीं थे। बाकी 229 के आधार पर राज्य सभा के 73 सांसदों पर आपराधिक मामले हैं। इनमें एक पर हत्या का, चार पर हत्या के प्रयास का और तीन के खिलाफ महिलाओं से संबंधित आरोप के मामले दर्ज है। एचडीएफसी बैंक के अंशकालिक चेयरमैन, अतनु चक्रबर्ती के अचानक इस्तीफा देने के बाद यह खबर भी गंभीर है। कल यह खबर इंडियन एक्सप्रेस ने दी थी। आज फॉलो अप भी इंडियन एक्सप्रेस में ही है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन