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सुख-दुख

कृत्रिम पेड़ ‘मॉक्सी’ मंगल पर खूब बना रहा आक्सीजन, अब बस पाएगी मनुष्यों की कॉलोनी!

नितिन त्रिपाठी-

धरती पर जीवन की उत्पत्ति कैसे हुई थी, इस प्रोसेस को समझना हो तो बिलकुल ऐसी ही प्रक्रिया इन दिनों मंगल पर वैज्ञानिक कर रहे हैं.

मंगल पर भविष्य में मनुष्य रहें, बैक्टिरियाज पल्लवित हों – इस सबके लिए चाहिए ऑक्सीजन. यहाँ तक कि अंतरिक्ष यान के ईधन के लिये भी चाहिये ऑक्सीजन. अब इतनी ऑक्सीजन तो लाद कर धरती से भेजी नहीं जा सकती. हर समस्या का अंत यही निकलता है कि ऑक्सीजन हो तो आगे बात बने.

मंगल पर मुख्य है कार्बन डाई आक्साइड गैस. अब धरती पर कार्बन डाई आक्साइड से ऑक्सीजन कौन बनाता है? पेड़. मंगल पर पेड़ उग नहीं सकते – लैक ऑफ़ nutrient in soil प्लस वाटर नहीं है. और मोस्ट इंपोर्टेंट पेड़ों को भी ऑक्सीजन तो चाहिये ही होती है. अब ये तो मुर्गी अंडा वाली समस्या. CO2 से ऑक्सीजन के लिए पेड़ चाहिए, पर पेड़ उगने के लिए ऑक्सीजन चाहिए.

समाधान निकाला गया कृत्रिम पेड़ – मॉक्सी.

यह जो बैग के आकार का यंत्र देख रहे हैं सत्रह किलो का यह यंत्र नासा के वैज्ञानिकों ने मंगल के पिछले मिशन में प्रीसर्वरेंस रोवर में फिट कर भेजा था. प्रीसर्वरेंस रोवर में एक छोटा सा प्लूटोनियम का उपयोग कर रेडियोएक्टिव पॉवर प्लांट लगाया गया जो 110 वाट बिजली पैदा कर रहा है. इस बिजली का प्रयोग बहुत राशनिंग से हो रहा है क्योंकि साथ में हेलीकॉप्टर रोबोट सब हैं तो उन्हें भी पॉवर चाहिए. पर जब मौक़ा मिलता है तो यह मॉक्सी यंत्र वहाँ के वायु मण्डल से कार्बन डाई आक्साइड लेकर ऑक्सीजन पैदा कर रहा है.

तो इस समय तक इतना हो चुका है कि मंगल में ऑक्सीजन पैदा कि जा सकती है, बिजली पैदा की जा सकती है. वहाँ बर्फ है ही भविष्य में उसे पिघला कर पानी बनाया जा सकता है. पानी हो गई ऑक्सीजन मिल गई कंट्रोल्ड माहौल में खेती की जा सकती है. ऑक्सीजन है तो फ्यूल जेनेरेट कर सकते हैं. इन शोर्ट धीमे धीमे परिस्थितियाँ बन रही हैं मंगल पर मनुष्य को भेजने और रहने की.

शायद हमारे जीवन काल में संभव न हो पर तय है आने वाली पीढ़ी मंगल में मनुष्यों की प्रयोगशाला देखेगी और दो सौ तीन सौ वर्षों में मंगल पर मनुष्यों की कॉलोनी भी होगी. वो जो मनुष्य वहाँ रहेंगे समय के साथ साथ अपना पूरा इंतज़ाम स्वयमेव करने लगेंगे, वहाँ के सिस्टम में फिट हो जाएँगे हज़ारों वर्षों में, एवोल्यूशन सिस्टम उन्हें सेट कर देगा.

वैसे धरती पर जीवन के संदर्भ में अभी भी लाखों भ्रांतियाँ हैं. क्या पता सुदूर किसी अन्य ग्रह से किसी अन्य सभ्यता ने यहाँ प्रथम जीव भेजा हो और कृत्रिम परिस्थितियाँ बनाई हों. शेष कार्य समय और एवोल्यूशन ने कर दिया, आज हम फिर वही इतिहास दोहराने का प्लान कर रहे हैं.

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