आज के इन अखबारों को गौर से देखिए, मानवाधिकार आयोग के ‘सरकारी’ खेल को समझिए!

संजय कुमार सिंह-

सरकार किसानों के साथ और मानवाधिकार आयोग की चिन्ता… आज के अखबारों में एक खेल है जिसपर बहुतों का नजर नहीं जाएगा। द हिन्दू और टाइम्स ऑफ इंडिया के पहले पन्ने पढ़ें तो यह खेल समझ में आ जाएगा। आज द हिन्दू की लीड का शीर्षक है, “सरकार छोटे किसानों के साथ है : प्रधानमंत्री”।

हेडलाइन मैनेजमेंट के लिहाज से देखें तो यह एक अच्छी खबर है और सरकार को किसानों के साथ ही होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने यही कहा है और यही छपा है। सरकार इससे अलग कैसे हो सकती है। इस खबर को पढ़कर आप नौ महीने से भी ज्यादा से दिल्ली की सीमा पर बैठे किसानों के बारे में जो सोचिए सरकार के बारे में अच्छा ही लगता है।

दूसरी खबर टाइम्स ऑफ इंडिया में है। इसके अनुसार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने तीन राज्यों – दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा को नोटिस भेजकर पूछा है कि किसानों के आंदोलन से औद्योगिक इकाइयों पर प्रतिकूल प्रभाव के बारे में क्या कहना है।

वैसे तो मानवाधिकार आयोग किसानों को छोड़कर उद्योगों की परवाह क्यों करने लगा और उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव से उनमें काम करने वाले लोगों की चिन्ता हो तो नोटबंदी और जीएसटी से लेकर लॉकडाउन के कारण उद्योगों पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव और इस कारण उनमें काम करने वाले लोगों के नुकसान की चिन्ता कब किसने की?

कुल मिलाकर, मानवाधिकार आयोग किसान आंदोलन के खिलाफ काम कर रहा है और क्यों कर रहा है यह समझना मुश्किल नहीं है अगर आप जानते हैं कि सरकार ने नियम बदलकर अपने प्रिय जज को मानवाधिकार आयोग का प्रमुख बनाया है।

भड़ास के माध्यम से अपने मीडिया ब्रांड को प्रमोट करें. वेबसाइट / एप्प लिंक सहित आल पेज विज्ञापन अब मात्र दस हजार रुपये में, पूरे महीने भर के लिए. संपर्क करें- Whatsapp 7678515849 >>>जैसे ये विज्ञापन देखें, नए लांच हुए अंग्रेजी अखबार Sprouts का... (Ad Size 456x78)

भड़ास की खबरें व्हाट्सअप पर पाएं, क्लिक करें- Bhadas WhatsApp News Alert Service

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *