मो. कामरान-

राजधानी लखनऊ में राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकारों के संगठन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पत्रकार शेखर पंडित को कथित तौर पर समिति के व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए जाने के बाद मामला तूल पकड़ गया है और संगठन के भीतर गुटबाज़ी के आरोप खुलकर सामने आने लगे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, समिति के सचिव भारत सिंह द्वारा यह कार्रवाई की गई, जिस पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर किस नियम के तहत यह फैसला लिया गया। बताया जा रहा है कि शेखर पंडित ने संगठन के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की इच्छा जताई थी, जिसके बाद यह विवाद शुरू हुआ।
इसी बीच संगठन के भीतर नेतृत्व को लेकर भी खींचतान तेज हो गई है। शशिनाथ दुबे द्वारा खुद को अध्यक्ष घोषित किए जाने के बाद कई सदस्यों के इस्तीफे की चर्चा है। आरोप है कि बिना व्यापक सहमति के पदों की घोषणा की जा रही है, जिससे संगठन में असंतोष बढ़ रहा है।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब प्रेस रूम जैसे संस्थागत स्थानों से पदों की घोषणा और सदस्यों के निष्कासन की बातें सामने आईं। इससे पत्रकारों के बीच एकता की बजाय टकराव की स्थिति बनती दिख रही है।
फिलहाल यह विवाद पत्रकार संगठनों के भीतर पारदर्शिता, प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
उधर दूसरी तरफ, बताया जा रहा है कि संवाददाता समिति के कुछ पत्रकारों ने अपनी अलग संस्था बना ली है। जिसका नाम मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (पुनर्गठित) रखा गया है।
भड़ास को मिले इनपुट के मुताबिक, पत्रकार प्रभात त्रिपाठी ने संजय प्रसाद से एनेक्सी मीडिया सेंटर में नई संस्था के लिए चुनाव कराने की अनुमति मांगी थी लेकिन संजय प्रसाद ने मना कर दिया। जिसके बाद प्रभात त्रिपाठी एनेक्सी मीडिया सेंटर के बाहर सड़क पर ही बैलट बॉक्स लेकर बैठ गए और पत्रकारों से वोट डलवा रहे हैं। आज बुधवार को मतदान सड़क पर डाला जा रहा है।
इनपुट यह भी है कि मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के मौजूदा अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने संजय प्रसाद से एनेक्सी मीडिया सेंटर में चुनाव न कराने की हामी भरवाई थी, जिसके बाद इस तरह के वीडियो सामने आए हैं…


