डॉ. सुनील जोशी मर्म चिकित्सा के एक प्रसिद्ध विशेषज्ञ हैं, जो 40 से अधिक वर्षों से इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति भी रह चुके हैं और मर्म चिकित्सा पर 8 से अधिक पुस्तकें लिख चुके हैं. डॉ. जोशी ने हजारों छात्रों को प्रशिक्षित किया है और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में वक्ता और अध्यक्ष के रूप में भी भाग लिया है. मर्म चिकित्सा को लेकर उन्होंने जो कुछ भी कहा, इस वीडियो में देखिए सुनिए… इंटरव्यू का यह पहला भाग है जो 14 मिनट 13 सेकंड का है…
सत्येंद्र पी एस-
आज पहली बार मर्म चिकित्सा प्रणाली और भारत में उसके शोधों के बारे में थोड़ी थोड़ी जानकारी मिली। पहले मुझे यही पता था कि एक्यूप्रेशर, मसाज, मर्म वगैरा एक तरह का मालिश मसाज होता है, जिससे शरीर को थोड़ी राहत मिल जाती है। कोई थका हारा है, देह वगैरा में दर्द हो तो यह सब करा लेने से मानसिक शारीरिक राहत मिल जाती है। आज इस सबको लेकर थोड़ी धारणा बदली है। खासकर मर्म चिकित्सा को लेकर धारणा काफी बदली है।

मर्म चिकित्सा के देश दुनिया के सबसे बड़े विद्वान डॉ सुनील जोशी से मिला। डॉ जोशी के बारे में छोटा सा परिचय यह है कि गुरुकुल कांगड़ी राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज, हरिद्वार में प्रोफेसर रहे, विभागाध्यक्ष रहे, फिर प्राचार्य रहे। वह उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर बने। इस समय डॉ जोशी मृत्युंजय मिशन चला रहे हैं।
डॉ जोशी ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से एमडी किया है। वहीं सर्जरी सीखी है। जब वह पढ़ाई कर रहे थे तो किसी संहिता में उन्हें पढ़ाया गया कि शरीर में 107 (शायद यही संख्या उन्होंने बताई) मर्म प्वाइंट्स होते हैं। अगर सर्जरी करते समय इन प्वाइंट्स का विशेष ध्यान न रखा गया तो पेशेंट की मौत भी हो सकती है।
डॉ जोशी ने बताया कि उसी दिन से उलटी खोपड़ी चलने लगी कि शरीर के ये प्वाइंट्स अगर जान ले सकते हैं तो जिंदगी दे भी सकते हैं। अगर उन प्वाइंट्स पर काम किया जाए तो बगैर मेडिकल और सर्जिकल इंटरवेंशन के भी इलाज हो सकता है। वहीं से डॉ जोशी का मर्म चिकित्सा पर शोध शुरू हुआ कि उन प्वाइंट्स को पकड़कर इलाज कैसे किया जा सकता है?
डॉ जोशी अब शरीर के उन्हीं प्वाइंट्स पर काम करते हैं, उनका 40 साल का रिसर्च है। उन्होंने बताया कि माइग्रेन, घुटने में दर्द, स्पाइन से संबंधित समस्याओं का समाधान मर्म चिकित्सा से सफलतापूर्वक हो रहा है। यह एक हॉलिस्टिक अप्रोच है, जिसमें यह देखा जाता है कि अगर शरीर के किसी हिस्से में समस्या आई है तो उसकी क्या क्या वजहें हो सकती हैं? इस थेरेपी में हर पेशेंट्स का पर्सनलाइज इलाज होता है।
डॉ जोशी की कोशिश से देश के कई आयुर्वेदिक कॉलेजों में मर्म थेरेपी को शामिल किया जा चुका है। कई एलोपैथिक मेडिकल कॉलेजों में भी उन्होंने युवा चिकित्सकों को इस विधा में प्रशिक्षित किया है और तमाम मरीजों को दवा और सर्जरी से बचा रहे हैं।
डॉ जोशी ऐसे व्यक्ति हैं कि दिल्ली, गोरखपुर, पटना, लखनऊ तक जहां भी बात की, उन्होंने डॉ जोशी का ही नाम लिया कि स्पाइन पर उनका जबरदस्त काम है। यहां तक कि काठमांडू के मेरे एक बुद्धिज़्म के विद्वान ने कहा कि मर्म थेरेपी में स्पाइन का बेस्ट उपचार है और तिब्बतन बुद्धिस्ट चिकित्सा में इसका बड़ा रोल है। और उन्होंने भी बताया कि आपके बगल में ही डॉ सुनील जोशी हैं, आपको तिब्बत जाने की जरूरत नहीं है। तीन साल से उनका नाम सुनते सुनते आखिर में उनके पास पहुंच ही गया। उम्मीद है कि आगे सब अच्छा होगा।


