Connect with us

Hi, what are you looking for?

प्रिंट

आज के टाइम्स ऑफ़ इंडिया में एडिटोरियल पेज पर मांसाहार के ख़िलाफ़ एक लेख छपा है!

सुशोभित-

आज के टाइम्स ऑफ़ इंडिया में एडिटोरियल पेज पर यह लेख छपा है। इस लेख का कोई हिन्दू कोण नहीं है, सवर्ण कोण नहीं है और साम्प्रदायिक कोण नहीं है। इसे बकरीद के आसपास साज़िशन नहीं छापा गया है। लेख केवल कुछ फ़ैक्ट्स बताता है।

Advertisement. Scroll to continue reading.

लेख कहता है कि भोजन के लिए जानवरों का क़त्ल सस्टेनेबल नहीं रह गया है। हर साल 100 अरब (जी हाँ, 100 अरब!) जानवरों का क़त्ल मांस के लिए किया जा रहा है! हर दिन 9 लाख गायों, 14 लाख बकरियों, 17 लाख भेड़ों, 38 लाख सुअरों, 1.2 करोड़ बतखों और 2.2 करोड़ मुर्गियों का क़त्ल भोजन के लिए किया जा रहा है। हर दिन!!! इसमें मछलियों की गणना तो की ही नहीं गई है।

एनिमल फ़ार्मिंग उस स्तर पर पहुँच गई है, जहाँ उसके लिए जंगल के जंगल साफ़ किए जा रहे हैं, एक-तिहाई धरती लाइवस्टॉक के लिए इस्तेमाल की जा रही है और पृथ्वी पर उत्पन्न होने वाला 70 प्रतिशत कॉर्न और लगभग इतना ही सोयाबीन इन जानवरों को खिलाया जा रहा है, ताकि उनका मांस प्राप्त किया जा सके। इसने पर्यावरण और खाद्य-संतुलन को तहस-नहस कर दिया है। करोड़ों जानवरों के क़त्ल की मशीनरी रोज़ जितना अत्याचार कर रही है, सो अलग।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित इस लेख का मक़सद भी क्या हिन्दू-मुसलमान वैमनस्य है, जैसा कि हिन्दी के अल्पशिक्षित लेखक रोज़ गला फाड़-फाड़कर कह रहे हैं? क्या यह खाने-पीने की आज़ादी का सवाल है? क्या यह जीवनशैली का प्रश्न है? या यह घोर नैतिक और पारिस्थितिक संकट है, जो मनुष्य जाति के सामने मुंहबाए खड़ा है।

Advertisement. Scroll to continue reading.

टाइम्स में लेख आया, आश्चर्य नहीं। द न्यूयॉर्क टाइम्स में तो अकसर ही इस तरह के लेख अब आ रहे हैं। वो दुनिया की लिबरल कम्युनिटी का मुखपत्र है। पूरी दुनिया की लिबरल कम्युनिटी धीरे-धीरे सस्टेनेबल फ़ूड विकल्पों की ओर बढ़ रही है, जिसका दूसरा नाम वीगनिज़्म है।

और हिन्दी के लेखकों को यही सब बताने वाली मेरी किताब पढ़े बिना ही उस पर यह आरोप लगाने से फ़ुरसत नहीं मिल रही है कि किताब मुसलमानों की शान में गुस्ताख़ी करने के लिए लिखी गई है, हम इसको बर्दाश्त नहीं करेंगे!

Advertisement. Scroll to continue reading.
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement

भड़ास को मेल करें : Bhadas4Media@gmail.com

भड़ास के वाट्सअप ग्रुप से जुड़ें- Bhadasi_Group_one

Advertisement

Latest 100 भड़ास

व्हाट्सअप पर भड़ास चैनल से जुड़ें : Bhadas_Channel

वाट्सअप के भड़ासी ग्रुप के सदस्य बनें- Bhadasi_Group

भड़ास की ताकत बनें, ऐसे करें भला- Donate

Advertisement