मीडिया की मानसिकता पर अशोक वाजपेयी की खरी-खरी

जाने माने पत्रकार ओम थानवी के नेतृत्व में स्थापित जयपुर के हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विवि की वेबसाइट का लोकार्पण साहित्यकार और पूर्व प्रशासक अशोक वाजपेयी ने किया. अपने संबोधन में उन्होंने आज के मीडिया की खूब खबर ली. हिंदी अख़बारों द्वारा अंगरेजी को तवज्जो देने और अपनी ही भाषा को भ्रष्ट-नष्ट करने पर उन्होंने आड़े हाथों लिया.

उन्होंने कहा कि अंगरेजी का बेवजह इस्तेमाल जो कर रहे हैं उनका इस भाषा का ज्ञान संदिग्ध है. मुझे फख्र है कि हिंदी के मीडिया की मानसिकता पर ‘अंगरेजी की प्रेत छाया’ शीर्षक से मेरे लेख को थानवीजी ने छह सात बरस पहले जनसत्ता में स्थान दिया था.

वाजपेयी ने न्यूज़ चैनलों आदि मीडिया को नेताओं, अभिनेताओं, अपराधियों और खिलाड़ियों से आक्रांत बताते हुए इस माध्यम पर साधारण आदमी के पुनर्वास पर जोर दिया. ज्यादातर न्यूज़ चैनलों पर छाया सुशांत एपिसोड इस मानसिकता की जीती जागती मिसाल है. इनके आका चैनल पर चीख रहे हैं तो उनके रिपोर्टर पुलिस को धौंस दे रहे हैं कि आप आरोपी को प्रोटेक्शन कैसे दे सकते हैं?

बिहार और असम की बाढ़ से हुए विनाश का उनका कवरेज बेहद चलताऊ है. पहाड़ को खोद कर सड़क बनाने, घरों की तरफ भाग रहे प्रवासियों के लिए लंगर चलाने और मध्यप्रदेश के ठेठ आदिवासी इलाके सुखतवा में अपनी जिन्दगी होम कर देने वाले स्वर्गीय सुनीलजी की तरफ तो उसका ध्यान ही नहीं जाता है.

श्रीप्रकाश दीक्षित की रिपोर्ट.

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