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सुख-दुख

मीडिया संस्थान अपने कर्मियों को वोट डालने के लिए छुट्टी नहीं देते!

Siddharth Chaurasia : मैं सबसे गरीब इंसान इस देश का. अपने मत का प्रयोग चाह के भी नहीं कर सका. पता हैं क्यों? क्योंकि मैं मीडिया संस्थान में काम करता हूं. गला फाड़-फाड़ के देश की मीडिया लोगों से वोट करने की अपील कर रही है.

नैतिकता की जिम्मेदारी का हवाला देकर देश को बनाने में अपने मत का प्रयोग करने का आह्वान कर रही है. बड़े-बड़े एंकर प्रोमो शूट कराके लोगों से सब काम छोड़ के वोट डालने की अपील कर रहे हैं. लेकिन मीडिया के वर्कर को वोट के लिए ऑफ नहीं दे सकते. क्या मीडिया संस्थान खुद नैतिकता को निभा रहे हैं?

मुझे बहुत शर्म आती है। बिल्कुल नाज़ नहीं होता खुद को पत्रकार कहने में। कमाई से दो वक्त़ की रोटी तो जोड़ी नहीं जाती, मौलिक अधिकार-नागरिक अधिकार भी छीन लिए जाते हैं। काम‌‌ के दौरान मीडिया कर्मचारी रोज एडिटोरियल रूम में नंगा होता है। आखिर इंडस्ट्री का भी तो नंगा भद्दा बदन दिख‌ना चाहिए।

युवा पत्रकार सिद्धार्थ चौरसिया की एफबी वॉल से

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1 Comment

1 Comment

  1. Ravi

    May 6, 2019 at 3:32 pm

    सच कहने का साहस तो है..

    कहीं संस्थान आपकी रोजी रोटी ना छीन ले..
    दो वक्त की रोटी से भी आप कहीं मोहताज न हो जाए..

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