गुरुवार को मेटा (META) ने एक तकनीकी त्रुटि के कारण इंस्टाग्राम (Instagram) यूज़र्स की रील्स फीड में हिंसक और ग्राफिक वीडियो दिखने पर माफी मांगी। कंपनी ने कहा कि इस गलती को सुधार लिया गया है।
फेसबुक, व्हाट्सएप और थ्रेड्स की मालिक मेटा ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस समस्या से कितने यूज़र्स प्रभावित हुए और इसकी असली वजह क्या थी।
यह माफी तब आई जब कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने शिकायत की कि उनकी इंस्टाग्राम रील्स फीड में अश्लील और हिंसक कंटेंट दिखाई दे रहा है, जबकि उन्होंने ‘संवेदनशील कंटेंट नियंत्रण’ (Sensitive Content Control) सेटिंग को ऑन कर रखा था।
मेटा के प्रवक्ता ने रॉयटर्स से कहा, “हमने उस गलती को ठीक कर लिया है, जिससे कुछ यूज़र्स की रील्स फीड में अनुचित कंटेंट दिख रहा था। हमें इस गलती के लिए खेद है।”
अमेरिका में फैक्ट-चेकिंग बंद करने के बाद फिर विवादों में मेटा
मेटा पहले ही विवादों में घिरा हुआ है, क्योंकि हाल ही में उसने अमेरिका में फेसबुक, इंस्टाग्राम और थ्रेड्स पर फैक्ट-चेकिंग प्रोग्राम बंद कर दिया था। इन तीनों प्लेटफॉर्म्स के दुनियाभर में तीन अरब से ज्यादा यूज़र्स हैं।
मेटा की नीति के तहत हिंसक और भड़काऊ वीडियो प्रतिबंधित होते हैं, लेकिन कुछ मामलों में कंपनी उन्हें छोड़ सकती है, अगर वे मानवाधिकार हनन या किसी संघर्ष को उजागर करने के लिए पोस्ट किए गए हों।
कंटेंट मॉडरेशन को लेकर पहले भी विवादों में रहा है मेटा
मेटा बीते कुछ वर्षों में स्वचालित मॉडरेशन टूल्स पर ज्यादा निर्भर हो गया है। अमेरिका में फैक्ट-चेकिंग बंद होने के बाद इस रणनीति में और तेजी आने की संभावना है।
मेटा पहले भी कंटेंट रिकमेंडेशन और यूज़र सेफ्टी को संतुलित करने में नाकाम रहने के आरोपों से घिर चुका है।
म्यांमार नरसंहार के दौरान हिंसक कंटेंट के फैलाव,
इंस्टाग्राम पर किशोरों को ईटिंग डिसऑर्डर को बढ़ावा देने वाले कंटेंट की सिफारिश,
और कोविड-19 महामारी के दौरान भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को लेकर मेटा की नीतियों पर कड़ा सवाल उठ चुका है।
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