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सियासत

सरकारी लुटेरों से अपना हार्ड अर्न्ड पैसा बचाने की कवायद!

विवेक सत्य मित्रम्-

अहो भाग्य हमारे! मोदी जी ने एक अतिरिक्त लगान माफ़ कर दिया जो हम भर रहे हैं उन्हें इस देश का प्रधानमंत्री बनाकर। एक ज़माने में मुझे ये बात बहुत खटकती थी कि लोग टैक्स बचाने के लिए तरह तरह के उपक्रम (धांधली) क्यों करते हैं? लेकिन फ़िलहाल जीवन के जिस पड़ाव पर खड़ा हूँ वहाँ समझ में आया कि दरअसल वो इस देश के सरकारी लुटेरों से अपना हार्ड अर्न्ड पैसा बचाने के लिए इतने जतन करते हैं। क्योंकि इस देश में टैक्स भरने के बदले आपको प्रैक्टिकली कोई लाभ नहीं मिलता (गधों सड़कों का हवाला मत देना ग़लती से भी, उतना शराब और सिगरेट पर मिलने वाले टैक्स से भी हो सकता है)।

सोशल सिक्योरिटी के नाम पर या हेल्थ बेनेफिट के नाम पर इस देश में आपको कुछ भी नहीं मिलता। कुछ दिन पहले यूपी के ग़ाज़ीपुर ज़िले के एक गाँव में रहने वाली मेरी दादी की तबियत ख़राब हो गई और आलम ये था कि बग़ल के कस्बे में एक डॉक्टर तक मौजूद नहीं था जिससे इलाज़ करवाया जा सके। लाखों करोड़ों लोग गाँव देहात में अपना सब कुछ बेचकर या तो शहरों में मकान बनवा रहे हैं या फिर किसी बड़े शहर में दो टके की नौकरी करने को मजबूर हैं क्योंकि वो जहां रहते हैं वहाँ ना तो स्वास्थ्य सुविधा मौजूद है और ना ही शिक्षा के लिए कारगर स्कूल।

रामराज में सब राम भरोसे चल रहा है। सवाल ये है कि अगर मेरे इन्कम टैक्स से मुझे कुछ नहीं मिलता या फिर उन्हें भी जो इन्कम टैक्स भरने की औक़ात नहीं रखते (बावजूद इसके सौ तरह के अप्रत्यक्ष टैक्स भरते हैं) तो हम इतना ज़्यादा इन्कम टैक्स देते किसलिए हैं। ताकि इस देश के मंत्री विकास के नाम पर चल रही परियोजनाओं में दलाली खा सकें? ताकि वो ऐश की जिंदगी जी सकें जहां उन्हें मिलने वाली हर फ़्री फंड की सुविधा की क़ीमत हम चुकाते हैं? ताकि वो पुराने संसद भवन की जगह नया संसद भवन बनाकर इतिहास में अमर हो सकें? शर्म आनी चाहिए हमें जो उनके लिए एक दूसरे से लड़ने को उतारू रहते हैं जिनके एजेंडे में विकास कहीं है नहीं। सबका साथ सबका विकास सिर्फ़ जुमला है।

मेरा छोटा भाई फ्रांस के पेरिस शहर में आईटी प्रोफेशनल है। वो कुल 40% इन्कम टैक्स भरता है। लेकिन उसके बदले उसे वो देश वो सब कुछ देता है जिससे उसे कभी नहीं लगा कि वो बहुत ज़्यादा टैक्स भरता है। फ़्रांस में लेबर लॉज इतने स्ट्रिक्ट हैं कि कोई कंपनी चाहकर भी किसी को नौकरी से नहीं निकाल सकती। निकाला तो सरकार को जवाब देना पड़ता है। वाजिब वजह बतानी होती है जिसकी सरकार छानबीन कर सकती है। यहाँ की तरह नहीं कि जब मन किया नौकरी दे दी और जब मन किया निकाल बाहर किया। इसलिए वहाँ जल्दी किसी की नौकरी जाती नहीं। अगर किसी वजह से गई भी तो उसे कई महीनों की सैलरी मुआवज़े के तौर पर देनी पड़ती है। और बेरोज़गार रहने की हालत में सरकार उस व्यक्ति की सैलरी का 50% से ज्यादा पैसा तब तक देती है जब तक उसे दूसरी नौकरी नहीं मिल जाती। आपके यहाँ मिलता है — ठेंगा।

फ़्रांस में उसका और उसके परिवार का इलाज बिलकुल मुफ़्त है। चाहे नॉर्मल कंसल्टेशन हो या फिर सर्जरी। सरकारी अस्पताल आपके यहाँ के किसी भी प्राइवेट अस्पताल से बेहतर हैं। बच्चा पैदा हुआ तो ये तय हो जाता है कि उसका नज़दीक के स्कूल में बिना किसी हील हुज्जत के एडमिशन हो जाएगा। और वो स्कूल भी आपके यहाँ के सो कॉल्ड इंटरनेशनल स्कूल से बेहतर होता है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट से लेकर हर तरह की सुविधा आपको रियायती दर पर मिलती है। आपके देश में क्या मिलता है आपके इन्कम टैक्स के बदले?

जो लोग नौकरी पेशा हैं। उनका इन्कम टैक्स उनके सोर्स पर कैलकुलेट होता है। यानि की सरकार ने इन्कम टैक्स के जो अलग अलग ब्रैकेट तय किये उस हिसाब से। यानि मैक्सिकम आप 30% तक इन्कम टैक्स देते हैं। लेकिन मेरे जैसे लोग जो इंडिपेंडेट कंसल्टेंट के तौर पर काम करते हैं ना कि किसी कंपनी के पे रोल पर। वो सरकार के लिए प्रत्यक्ष तौर पर 40% (10% टीडीएस + 30% इन्कम टैक्स) के साथ-साथ 18% जीएसटी भी भरते हैं क्योंकि इस देश में 20 लाख से ऊपर की कमाई पर 18% जीएसटी देना अनिवार्य है।

इस फ़ॉर्मूले के हिसाब से मैं 58% टैक्स देता हूँ अपनी इन्कम पर। और इसके बदले मुझे क्या मिलता है? धमकी भरा ईमेल कि टैक्स भरने की फलानी तिथि आख़िरी है, अगर आपने टैक्स नहीं भरा तो आपके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा मिलती है मुश्किलें अपनी कमाई का हिसाब किताब रखने की। एक सीए को सालाना 70-80 हज़ार रूपये भुगतान करने की बाध्यता।

इसके बाद भी मोदी जी को चैन नहीं मिलता। वो लगातार इनोवेटिव आइडिया सोचते रहते हैं कि सर्विस क्लास से और पैसा कैसे निकलवाया जाए। उसी की एक क़वायद है ये नया टैक्स जो आपकी विदेश यात्राओं को और महँगा बनाएगा। मैं जब एक महीने के लिए यूरोप में था, जब भी अपना फ़ॉरेक्स कार्ड रिचार्ज करता था। मुझे एक मैसेज आता था कि आपको पता है ना कि आपके इस खर्चे पर मोदी जी आपसे अलग से टैक्स लेंगे तो क्या हुआ कि मोदी जी ने पिछले साल आपकी मेहनत की कमाई पर 58% टैक्स वसूला था। हद है।

हिंदुत्व के नाम पर इस सरकार ने लोगों को इस हद तक मूर्ख बना रखा है कि किसी को इसकी घटिया आर्थिक और प्रो कॉरपोरेट नीतियों से फ़र्क़ नहीं पड़ता। मोदी है तो मुमकिन है के नारे लगाते हुए सब मगन है कि अरे वाह, देखो तो मोदी के पैर कौन छू रहा है, मोदी से दस्तख़त कौन ले रहा है, मोदी के दोस्त कौन हैं? अबे गधों, मोदी सरकार ने तुम्हें वाहियात मुद्दों में उलझाकर तुम्हारी ही ज़िंदगी के साथ कैसा खेल खेला है, उसकी कोई भनक भी है तुम्हें? ख़ैर, तुम्हें क्या फ़र्क़ पड़ता है। टैक्स तो तब देना पड़ता है जब कोई इन्कम हो। तुम तो रील इकॉनॉमी की जेनरेशन हो। चलो बनाओ रील और गिनते रहो कितने लाइक कमेंट आए!

और हाँ, आज बक़रीद है। भूल मत जाना कि आज मुसलमानों और इस्लाम के ख़िलाफ़ आग उगलना है! हैव अ ग्रेट डे!

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