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आज के अखबार : मोदी की अपील और सरकार की कोशिशों का प्रचार है जो नामंजूर, व्यर्थ हो चुका है

संजय कुमार सिंह

अमर उजाला में टॉप पर छह कॉलम का शीर्षक है, एलपीजी पर दहशत फैलाने वाले अपनी पोल खोल रहे है : मोदी। लीड का शीर्षक है, सीएनजी की आपूर्ति 100 फीसदी, एलपीजी बुकिंग 25 दिन के बाद….केरोसिन इस्तेमाल करने की दी अनुमति। एलपीजी संकट का पता देशबन्धु की खबर से भी चलता है। इसे दूसरे अखबारों ने महत्व नहीं दिया है। खबर के अनुसार विपक्षी सांसदों ने संसद के बाहर नारे लगाए, नरेन्दर भी गायब, सिलेंडर भी गायब। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर का शीर्षक है, एलपीजी आपूर्ति प्रभावित, सरकार ने मिट्टी तेल और कोयले को विकल्पों के रूप में आगे बढ़ाया। एक और खबर का शीर्षक है, दिल्ली से बेंगलुरू तक रेस्त्रां वाले परेशान क्योंकि एलपीजी की कालाबाजारी बढ़ गई है। अपनी इस खबर के साथ अखबार ने पटना में सिलेंडर लेकर लाइन में खड़े लोगों की फोटो भी छापी है। इसलिए संकट तो है। खबरों से पता चल रहा है कि सरकार मानने को तैयार नहीं है या निपटने की कोशिश का प्रचार कर रही है। इसका पता हिन्दुस्तान टाइम्स की सेकेंड लीड से भी चलता है। प्रधानमंत्री ने कहा है, कोविड की ही तरह हम इस संकट को भी हराएंगे। सच्चाई यह है कि कोविड से निपटने के लिए सरकार ने कुछ नहीं किया या जो किया वह बेहद कम था। इससे जनता को भारी परेशानी हुई या राहत नहीं के बराबर रही। राहुल गांधी ने समय रहते चेतावनी दी थी लेकिन उचित कार्रवाई नहीं हुई। लिहाजा बीमारी फैली और तब अचानक बिना सोचे-समझे लॉक डाउन हो गया। इससे भी भारी परेशानी हुई। अगर इसे रोका नहीं जा सकता था तो कम जरूर किया जा सकता था। इसमें जो कुछ किया गया वह ऊंट के मुंह में जीरा के बराबर ही है। कुल मिलाकर, अस्पतालों में जगह नहीं थी, ऑक्सीजन के लिए लोग तड़प रहे थे, लाशें जलाने के लिए लाइन लग रही थी और जो टीके लगे! पीएम केयर्स के दान और चंदे के पैसे से वेंटीलेटर खरीदे जाने थे लेकिन वे उपयोग लायक नहीं पाए गये। आपदा में अवसर का प्रचार और मौके पर चूक का यह मामला शर्मनाक और लापरवाह है। मोटे तौर पर कोविड की स्थिति यह रही कि मरने वालों की सही गिनती तक नहीं है।

पीटीआई से ‘सरकार’ की नाराजगी और एएनआई से प्रेम सर्वविदित है।

2014 में नरेन्द्र मोदी के सरकार में आने के बाद खूब प्रचार करके लोगों के जनधन खाते खुलवाए गए थे। इसके जरिए बीमा कराया गया था। लेकिन यह नहीं बताया गया और शायद इसका हिसाब भी नहीं लगाया गया कि ऐसे कितने बीमा धारक कोविड के शिकार हुए। कितने लोगों को लाभ हुआ। इसका प्रचार भी सरकार या भाजपा ने नहीं किया। जहां तक गैस और तेल की आपूर्ति या उपलब्धता का मामला है, द टेलीग्राफ की लीड के अनुसार एलपीजी का मामला पुराने दिनों में वापस चला गया है। खबर के अनुसार, बंगाल के सबसे बड़े घरेलू आपूर्तिकर्ता ने फिर से मैनुअल बुकिंग शुरू कर दी है। संकट टालने के लिए एक दशक बाद फिर से ऐसा शुरू किया गया है। युद्ध के क्रम में आज की दूसरी बड़ी खबर है, प्रधानमंत्री ने शांति और ऊर्जा सुरक्षा पर ईरान के राष्ट्रपति पेजश्कियन से बात की (अमर उजाला)। इंडियन एक्सप्रेस ने इसे लीड के साथ छापा है। प्रधानमंत्री की फोटो भी लगाई है। द टेलीग्राफ में यह सेकेंड लीड है। नवोदय टाइम्स में भी फोटो के साथ तीन कॉलम का शीर्षक है, क्षेत्र में गंभीर स्थिति पर मोदी ने की ईरानी राष्ट्रपति से बात। सोशल मीडिया की खबरों के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद बेज़ेशकियन ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुरोध को ठुकरा दिया है। इसमें उन्होंने भारतीय जहाज़ों को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने की अनुमति देने की मांग की थी।

ईरान ने कहा है कि उसकी नीति स्पष्ट है: हालिया विश्वासघातों के बाद, अमेरिका और इज़रायल के सहयोगी देशों—विशेष रूप से भारत—को अब वहां से गुज़रने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जाहिर है यह अमेरिका से दोस्ती और इजराइल के दौरे (तथा उसके बाद की चुप्पी भी) का असर है और देश को भुगतना ही होगा। लेकिन इस पर प्रचार माध्यम शांत हैं। मोदी को महान बनाने और बनने की उनकी अपनी कोशिशें जारी हैं। अमर उजाला में खबर भी है, ईरान के उप विदेश मंत्री बोले – कुछ देशों के जहाजों को होर्मुज से गुजरने दिया है। यही नहीं, देशबन्धु की खबर के अनुसार, ईरान के नवनियुक्त और तीसरे सर्वोच्च नेता मोजतबा खामनेई ने राष्ट्र के नाम अपने पहले संदेश में कहा है, इजराइल-अमेरिका हमले में मारे गए ईरानियों की मौत का बदला लिया जाएगा और ईरान पड़ोसी देशों में बने अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी रखेगा।

 

इसलिए, खबर यही है कि युद्ध जारी रहेगा, थमने के कोई संकेत नहीं हैं। हालांकि, ट्रंप ने जीत का दावा फिर किया है। मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने कहा कि ईरान पूरी तरह से खत्म हो रहा है। मैरीलैंड में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वर्तमान में चल रहे हालात पर उनकी कड़ी नजर बनी हुई है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना एक घंटे के अंदर  तेहरान की विद्युत क्षमता को खत्म कर सकती है। अपनी जीत का दावा करते हुए ट्रंप ने कहा वे पूरी तरह से खत्म हो रहे हैं। द हिन्दू ने मंत्री के हवाले से यह जानकारी दी है कि देश में कच्चे तेल की आपूर्ति सुरक्षित है और ईंधन की कोई कमी नहीं है। यह लीड है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने सिंगल कॉलम की एक खबर से बताया है कि, कच्चे तेल का एक जहाज मुंबई पहुंचा है। और यह युद्ध के बीच सुरक्षित यात्रा करने वाला पहले पोत है। फिर भी, टाइम्स ऑफ इंडिया, हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियन एक्सप्रेस की लीड बताती है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद रहेगा। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है, मोजतबा ने होर्मुज को बंद और खाड़ी पर हमले जारी रखने का प्रण किया। टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में मोजतबा का पहला संदेश, होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा। ऐसे में गैस के संकट को छिपाना और यह कितने दिन संभव होगा – अपनी जगह है। काश, सरकार यह समय और श्रम किसी उपयोगी काम में लगाती। यहां यह याद दिलाना उपयुक्त रहेगा कि 2013 में एलपीजी के संकट पर नरेन्द्र मोदी ने कहा था, गरीब के घर में चूल्हा नहीं जल रहा, बच्चे आंसू पीते हैं रात रात रोते हैं। इसे प्रचारित भी किया गया था और अब खबर देखिए।  

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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