अभिरंजन कुमार-
प्रधानमंत्री मोदी ओजस्वी वक्ता हैं, जो अपनी बात को मजबूती से रखना जानते हैं। लेकिन यदि बात में ही मजबूती न हो तो आप उसे कितनी भी मजबूती से रख लें, वह आपके अनुकूल परिणाम नहीं दे सकती।
प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि पाकिस्तान से बात होगी तो आतंकवाद पर ही होगी। और बात होगी तो पीओके पर ही होगी।
तो पूरे देश को मोदी जी गारंटी देते रहते हैं। एक गारंटी आज मैं मोदी जी को देता हूं कि पाकिस्तान न तो आतंकवाद छोड़ने वाला है, न ही पीओके आपको देने वाला है। आप कर लीजिए बात। आपसे पहले भी बहुत कर चुके हैं बात। आपके बाद भी बहुत प्रधानमंत्री करते ही रहेंगे बात।
और क्या भारत हर आतंकवादी घटना के बाद ऐसे ही स्ट्राइक करता रहेगा? क्या यह संभव है? और यदि मान लीजिए कि हमने यही तय कर लिया कि हर आतंकवादी घटना के बाद हम पाकिस्तान पर हमला करेंगे, तो क्या पाकिस्तान अपनी तैयारी नहीं रखेगा? क्या उस वक्त भी दुनिया के कुछ देश उसका साथ देने के लिए, और कुछ देश बीच बचाव करने के लिए खड़े नहीं हो जाएंगे?
क्या पाकिस्तान के जन्म के समय से ही उसका आतंकवाद झेल रहे भारत को 78 साल बाद भी यह समझने की ही ज़रूरत है कि आतंकवाद से पाकिस्तान का अस्तित्व जुड़ा हुआ है, सेना जुड़ी हुई है, सरकार जुड़ी हुई है? आतंकवाद उसके लिए कमाई का धंधा है। दुनिया के बहुत सारे देश उसके आतंकवाद के ग्राहक हैं, इसलिए वह आतंकवाद का उत्पादन करता है।
उसके आतंकवाद से समूची दुनिया में मुख्य रूप से केवल भारत को समस्या है। मामूली रूप से यदि हो, तो ईरान और अफगानिस्तान को हो सकती है। इन तीन देशों के अलावा कोई चौथा देश समूची दुनिया में नहीं है, जिसे उसके आतंकवाद से परेशानी है, तो वह क्यों छोड़ देगा आतंकवाद?
मोदी जी, यह संभव है कि आप अपनी सरकार के दौरान पाकिस्तान को डरा धमकाकर थोड़ा बहुत अंकुश बना लें, लेकिन आप हमेशा नहीं रहेंगे। जब आपकी सरकार नहीं होगी, फिर क्या होगा? पाकिस्तान फिर से पुराने ढर्रे पर आ जाएगा।
ऐसा लगता है कि आपका ज़ोर पाकिस्तान के साथ स्थाई समस्या समाधान पर नहीं, बल्कि इस बात पर है कि बस आपकी सरकार के दौरान सब ठीक ठाक रहे। भविष्य का मामला आप अगली पीढ़ियों पर छोड़ना चाहते हैं।
लेकिन हम समझते हैं कि भविष्य में पैदा होने वाली समस्याओं का तो हम आज अनुमान नहीं लगा सकते, न समाधान कर सकते हैं, लेकिन उन समस्याओं का स्थाई समाधान हमें जरूर निकाल देना चाहिए, जो आज विद्यमान हैं और हमारी अगली पीढ़ियों को भी पीड़ित कर सकती हैं।
भाइयो और बहनो, प्रधानमंत्री जी के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद की यह खबर है। धन्यवाद।




सुधीर अवस्थी
May 13, 2025 at 11:38 pm
बात तो वाकई गम्भीर व सोचनीय एवं निष्पक्ष व निडरतापूर्वक लिखी गई है।