प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका यात्रा पर हैं। भारत में तो प्रेस कॉन्फ्रेंस करते नहीं, अमेरिका में करनी पड़ी। उसी पीसी का एक 46 सेकंड का वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें अडानी और मोदी के संबंधों पर एक पत्रकार ने सवाल दागा है। अडानी के सवाल पर मोदी के चेहरे की जो भाव-भंगिमाएं हैं वह देखने लायक हैं।
देखें वीडियो और इस वीडियो पर कुछ प्रतिक्रियाएं भी पढ़िए…
रणविजय सिंह-
अमेरिका में जब एक पत्रकार ने राष्ट्रमित्र अडानी का नाम लिया तो नरेंद्र मोदी झेंप गए. चेहरे पर टेंशन साफ झलक रहा है.
इस सवाल का जो घुमावदार जवाब दिया गया.
अमेरिका वाले पत्रकार बेकार हैं. आम चूसकर खाते हैं या काटकर खाते हैं जैसे सवाल किए ही नहीं. बदतमीज कहीं के
मंजुल-
कम से कम मोदी जी ने ये माना कि गौतम अदानी का मामला उनका व्यक्तिगत मामला है।
वो ये नहीं बोले कि अदानी का मामला अदानी देखेंगे। उन्होंने ये भी नहीं कहा कि क़ानून अपना काम करेगा।
बाक़ी मोदी जी अदानी के लिए क्या करते हैं और क्या नहीं करते उस पर दर्जनों रिपोर्ट्स हैं। गूगल करके पढ़ी जा सकती हैं।
एक बात जो बिना गूगल किए भी सबको पता है कि मोदी जी सच कम ही बोलते हैं।
अपूर्व भारद्वाज-
साहेब भारत में प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करते। गोदी मीडिया तो सवाल पूछने की हिम्मत भी नहीं करता।
लेकिन ये अमेरिका है! अडानी पर सवाल आया… और साहेब पकड़ में आ गए।
जवाब देने की कोशिश की, मगर झूठ भी सही ढंग से नहीं बोला गया। डर… चेहरे पर साफ दिख रहा था
ओम प्रकाश सिंह-
आज भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राज्य अमेरिका के नए चुने हुए महामहिम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की।
बीजेपी प्रचार केवल कुछ अंश दिखा रहे हैं, लेकिन इस बैठक का मुख्य निष्कर्ष यह है कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को एक कड़ा संदेश दिया है। उसी दिन, जब वे प्रधानमंत्री से मिलने जा रहे थे, उन्होंने भारत पर वही उच्च व्यापार टैरिफ लगा दिया है जो भारत अमेरिका से आयात पर लगा रहा है।
इसका मतलब है कि पहले से ही संघर्षरत अमेरिका में भारत के निर्यात और भी कमजोर हो जाएंगे। हमें उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री की यात्रा से इस समस्या का समाधान होगा, लेकिन स्थिति और बिगड़ गई है।
अमेरिका ने यह घोषणा की के भारत से आने वाले दो और गैरकानूनी प्रवासियों की उड़ानों को वापस भारत भेज दिया जाएगा।
ट्रंप ने ब्रिक्स देशों द्वारा डॉलर छोड़कर अपनी स्वयं की मुद्रा में व्यापार करने के निर्णय का मजाक उड़ाते हुए, उच्च व्यापार टैरिफ और प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है।
संक्षेप में, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की आज की बैठक केवल अमेरिका के हित में लाभदायक साबित हुई है – अब हमें कम कीमत वाले अन्य देशों से तेल और गैस खरीदने के बजाय अमेरिका से ही खरीदना पड़ रहा है, साथ ही रक्षा सौदों में भी ट्रंप राजस्व अर्जित करने में रुचि दिखा रहे हैं।
इसके अलावा, पोर्टिको पर कार से उतरते समय राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत नहीं किया, जिससे वे ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में पहले ऐसे नेता बन गए जिनका स्वागत नहीं किया गया।
इस सरकार की विदेश नीति ने हमारे सम्मान और प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाई है। कमजोर नेतृत्व को अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा उसके हित में दबाया जा रहा है, और हम कुछ भी कर पाने में असमर्थ हैं सिवाय इसे स्वीकार किए। यह भारत की गैर-अलाइन्मेंट पॉलिसी, स्वतंत्र व्यापार और विदेश नीति को उजागर करने का एक अवसर था, लेकिन कुछ भी स्पष्ट रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया।
हमारा मूल मंत्र है “राष्ट्र प्रथम,” लेकिन इस सिद्धांत से समझौता किया गया। भारतीय उत्पादों पर लगाए गए ऊँचे टैरिफ पर कोई बातचीत नहीं हुई, बल्कि इसे शांति से स्वीकार कर लिया गया।
आखिर प्रधानमंत्री अमेरिका गए ही क्यों, अगर इससे भारतीय निर्यात और व्यापार पर और अधिक आर्थिक संकट आना था?
कभी भी भारत के किसी भी प्रधानमंत्री को व्यापार और विदेश नीति से जुड़ी घोषणाओं के संदर्भ में इतना दबाव में नहीं देखा गया।


