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साहब! मीडिया पैसे खा रहा, नेता देश को और जनता भूखे मर रही

वाराणसी : अभी कुछ दिन पहले केन्द्र सरकार के एक वर्ष पूरे हो गये और इस दौरान बीजेपी सरकार या कहें कि मोदी सरकार ने अपनी शेखी बघारने और अपने द्वारा एक वर्ष में पूरे किये गये कार्यों को जनता के सामने बताने के लिये खूब धन खर्च किया। यदि यही करोड़ों रूपये किसी जनपद पर खर्च कर दिये गये होते तो वह दुनिया का सबसे सुन्दर जनपद बन ​गया होता। मैं यह नहीं कहता कि सरकार को अपनी बातें लोगों के सामने नहीं बतानी चाहिए लेकिन क्या यह जरूरी है, अभी तक तो काम बोलता है कि बातें करने वाले नमो के कामों की बोलती बंद कैसे हो गयी।

वाराणसी : अभी कुछ दिन पहले केन्द्र सरकार के एक वर्ष पूरे हो गये और इस दौरान बीजेपी सरकार या कहें कि मोदी सरकार ने अपनी शेखी बघारने और अपने द्वारा एक वर्ष में पूरे किये गये कार्यों को जनता के सामने बताने के लिये खूब धन खर्च किया। यदि यही करोड़ों रूपये किसी जनपद पर खर्च कर दिये गये होते तो वह दुनिया का सबसे सुन्दर जनपद बन ​गया होता। मैं यह नहीं कहता कि सरकार को अपनी बातें लोगों के सामने नहीं बतानी चाहिए लेकिन क्या यह जरूरी है, अभी तक तो काम बोलता है कि बातें करने वाले नमो के कामों की बोलती बंद कैसे हो गयी।

केन्द्र सरकार के एक वर्ष पूरे होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेस के दौरान बताया कि यह एक समस्या है। लेकिन इसका हल ढूंढा गया है और अब इसमें काफी कमी आयी है। विवादास्पद बयान देने वाले नेताओं को उनकी जिम्मेदारी समझायी गयी है। लेकिन अनाप सनाप बातें मंच से बोल देने वाले इन नेताओं और मंत्रियों की जुबान पर क्या सचमुच लगाम लग जायेगी, यह तो भविष्य के गर्भ में है।

नमो सरकार ने सफाई अभियान चलाया देश को साफ सुथरा बनाने के लिये। संकल्प दिलवाया गया। बनारस की एकाध गलियों से लेकर घाटों तक की सफाई करते हुए मोदी ​मीडिया के विश्व पटल पर कई दिनों तक छाये रहे लेकिन आज एक वर्ष गुजर जाने के बाद उस स्थान को देखा जाय तो क्या वहां या उन गलियों में गन्दगी नहीं है, जहां मोदी ने सफाई की, कराई थी। अखबारों और चैनलों में पैसे के बल पर छाये रहना कोई मतलब नहीं रखता इस भोली भाली जनता के लिए।

मोदी सरकार में सबसे बड़ी यह बात देखने को आयी कि जब पार्टी लोकसभा चुनाव लड़ रही थी उस समय भी मीडिया को बहुत अच्छे तरीके से मैनेज किया गया और इस समय भी ​मीडिया को काफी अच्छे तरीके से मैनेज किया जा रहा है लेकिन आज भी कुछ ऐसे समाचार पत्र और चैनल वाले हैं जो सीना ठोककर यह बता रहे हैं कि मोदी ने कुछ नहीं किया, सिवाय बयानबाजी के।

इनके सांसद इस समय टीवी और अखबार पर ही दिखाई देते हैं क्षेत्र के लोग अपने आप को छला महसूस कर रहे हैं। साथ ही यह भी कह रहे हैं कि इससे अच्छा तो हम नोटा ही दबा कर आये होते। जब एक आदमी से पूछा गया कि सांसद जी कुछ कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि मेंढक तो बरसात होने के बाद ही दिखाई देते हैं और उसी समय टर्र टर्र टर्र टर्र भी करते हैं। देश में 8.67 करोड़ सदस्यों को अपने से जोड़ने के बाद यह दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी का तमगा हासिल कर चुकी है तो ये सवाल भी लाजमी है कि क्या उसके सदस्य उसका प्रचार नहीं करते हैं। उसके काम के बारे में जनता को नहीं बताते हैं । आखिर क्यों इतना रूपया सरकार को खर्च करना पड़ रहा है अपनी उपलब्धियों को गिनाने के लिये।

ये जो पैसे खर्च करे नमो ने यह बताया है कि हमने साल भर में क्या क्या किया। क्या वह उनकी पैतृक सम्पत्ति थी, अभी देश भर में दौड़ लगा रहे हैं, क्या वह अपने पैसे से दौड़ रहे हैं? नहीं, यह धन सवा सौ करोड़ देशवासियों का है और देश की जनता की गाढ़ी कमाई है। मुझे पता है, यह मीडिया जब भौंकता है तो आप उस पर प्रसाद स्वरूप विज्ञापन परोस देते हैं और सच्चाई जनता के सामने आने से छिपी रहती है लेकिन सोशल मिडिया भी एक ताकत है। इसे मत भूलिये। यहां किसी की नहीं चलती। 

प्रवीन यादव यश से संपर्क : [email protected]

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