मोदी राज में अखबार सरकारी तोता बन गए और न्यूज चैनल चमचा!

Priyabhanshu Ranjan : अगले लोकसभा चुनाव की तैयारियों में अभी से जुटे अमित शाह 95 दिन का देशव्यापी दौरा कर रहे हैं। भाजपा नेतृत्व अगले 100 दिनों का एक्शन प्लान तैयार कर चुका है और सख्ती से उस पर अमल भी कर रहा है। केंद्रीय मंत्री मीडिया को लगातार इंटरव्यू देकर मोदी सरकार के तीन साल की अपनी झूठी-सच्ची “उपलब्धियां” गिना रहे हैं । देश का एक बड़ा तबका उनकी बातें सुन भी रहा है। लेकिन विपक्ष, मीडिया और सोशल मीडिया क्या कर रहा?

विपक्ष सो रहा है। राहुल गांधी को करीब एक हफ्ते बाद झारखंड की घटना पर ट्वीट करने का आइडिया आया। न्यूज चैनल कभी “पंचायत…”, कभी “एजेंडा…” और कभी “…एडिटर्स राउंड टेबल” आयोजित कर किसी तरह 24 घंटे का चैनल चला रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस को छोड़कर बाकी सारे अखबार सरकारी तोता बन बैठे हैं। न्यूज पोर्टलों में दि वायर को छोड़ दें तो बाकी को सेक्स और मोदी की तारीफ भरी खबरों से ही फुरसत नहीं है। सोशल मीडिया पर हम जैसे लोग यज्ञ-हवन और परेश रावल के ट्वीट में उलझे हुए हैं! ऐसा विपक्ष, ऐसी मीडिया और ऐसी खाई-अघाई जनता हो तो मोदी सरकार को और क्या चाहिए?

Arun Maheshwari : इससे अधिक चापलूसी क्या हो सकती है! प्रधानमंत्री ने पिछले तीन साल में दुनिया के कई देशों की यात्राएँ की, नेताओं से दोस्ती से लेकर विभिन्न समुदायों के लोगों से दोस्ती के कई नाटक खेलें। अभी टीवी के चैनलों पर विदेश नीति के कुछ ‘विशेषज्ञ’ प्रधानमंत्री की इन शैलानियों की तरह की यात्राओं को ही उनकी विदेश नीति की बड़ी सफलता बता रहे थे। एक चैनल पर सुन रहा था कि भारत के किसी प्रधानमंत्री ने नेपाल की यात्रा नहीं की, जो नरेन्द्र मोदी ने की। नरेन्द्र मोदी पाकिस्तान में नवाज़ शरीफ़ के घर पर शादी में पहुंच गये, जो किसी ने नहीं किया। और, श्रीलंका में बौद्धों के सम्मेलन में जाकर उन्होंने श्रीलंका के सिंहली लोगों के दिल को जीत लिया।

कोई यह सवाल नहीं कर रहा था कि इन महान यात्राओं के बाद ही ऐसा क्या हुआ कि नेपाल से और पाकिस्तान से रिश्तों में भारी गिरावट आ गई? इसी प्रकार चीन की पहल पर वन बेल्ट वन रोड के शिखर सम्मेलन में बिना किसी वाजिब वजह के भारत के न जाने पर भी कोई सवाल नहीं कर रहा था, जबकि उसमें दुनिया के ढेर सारे देशों के राष्ट्राध्यक्ष तक शामिल हुए थे। विदेश नीति के मसले पर मोदी सरकार की प्रशंसा से बड़ी चापलूसी भी क्या मुमकिन है? एंकर महरूफ रजा थे, अन्यों में शेषाद्रि चारी थे।

पत्रकार द्वय प्रियभांशु रंजन और अरुण माहेश्वरी की एफबी वॉल से.

Tweet 20
fb-share-icon20

अपने मोबाइल पर भड़ास की खबरें पाएं. इसके लिए Telegram एप्प इंस्टाल कर यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia

Support BHADAS

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *