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मोदी, राजनाथ, अनुप्रिया, डिंपल की संपत्ति बढ़ी, कमाई के मामले में सबसे आगे सांसद सतीश गौतम!

अलीगढ़। उत्तर प्रदेश की राजनीति में संपत्ति बढ़ोतरी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अलीगढ़ से भाजपा सांसद सतीश गौतम की संपत्ति में बीते दस वर्षों में 208 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2014 में जहां उनकी कुल संपत्ति करीब 5 करोड़ रुपये थी, वहीं 2024 तक यह बढ़कर 16 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई है।

यह खुलासा चुनाव आयोग को सौंपे गए शपथ पत्रों के विश्लेषण में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2014 के लोकसभा चुनाव में सतीश गौतम ने अपनी संपत्ति 5 करोड़ 21 लाख 80 हजार 806 रुपये घोषित की थी। जबकि 2024 में दाखिल शपथ पत्र में उनकी कुल संपत्ति 16 करोड़ 06 लाख 24 हजार 125 रुपये बताई गई है। यानी दस साल में उनकी संपत्ति में 10 करोड़ 84 लाख 43 हजार 319 रुपये का इजाफा हुआ है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि इस बढ़ोतरी को प्रतिदिन के हिसाब से देखा जाए तो सांसद की संपत्ति में औसतन करीब 29 हजार 710 रुपये प्रतिदिन की वृद्धि हुई है।

यूपी के 15 सांसदों की संपत्ति बढ़ोतरी का विश्लेषण

उत्तर प्रदेश के 15 सांसदों की संपत्ति बढ़ोतरी का विश्लेषण किया गया है, जिसमें सतीश गौतम का नाम शीर्ष-5 में शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे अधिक संपत्ति बढ़ाने वाले सांसदों में शामिल हैं-

  • नरेंद्र मोदी (बनारस) – 82%
  • राजनाथ सिंह (लखनऊ) – 152%
  • डॉ. भोला सिंह (बुलंदशहर) – 186%
  • हेमा मालिनी (मथुरा) – 57%
  • अनुप्रिया पटेल (मिर्जापुर) – 57%
  • स्वामी सचिदानंद (उन्नाव) – 109%
  • डॉ महेश शर्मा (गौतमबुद्ध नगर) – 77%
  • कृष्णवर्धन सिंह (गोंडा) – 396%
  • पंकज चौधरी (महाराजगंज) – 118%
  • जगदम्बिका पाल (डुमरियागंज) – 986%
  • डिम्पल यादव (कन्नौज) – 50%

सतीश गौतम की संपत्ति वृद्धि दर 208 प्रतिशत रही, जो उन्हें इस सूची में ऊंचा स्थान दिलाती है।

पांच बार के सांसद, संपत्ति में लगातार इजाफा

सतीश गौतम लगातार तीसरी बार अलीगढ़ से सांसद बने हैं और कुल मिलाकर वे पांच बार सांसद रह चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव दर चुनाव उनकी संपत्ति में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है।

विपक्ष ने उठाए सवाल

संपत्ति में इस तेज बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं और इसे जनप्रतिनिधियों की आय और जीवनशैली से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, भाजपा या सांसद सतीश गौतम की ओर से इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

यह रिपोर्ट एक बार फिर इस बहस को तेज करती है कि जनप्रतिनिधियों की संपत्ति में चुनावी कार्यकाल के दौरान इतनी बड़ी बढ़ोतरी के स्रोत क्या हैं और इसकी पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाए।

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