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आज के अखबार : मूल मुद्दों से हटकर क्रिकेट और उसमें ‘अपराजेय भारत’, ‘कुम्भ का पानी नहाने योग्य था’!

संजय कुमार सिंह

आज मेरे सभी अखबारों में क्रिकेट है। तकनीकी तौर पर कुछ अखबारों ने क्रिकेट की खबर को लीड नहीं बनाया है पर अखबारों में क्रिकेट ही छाया हुआ है। हो भी क्यों नहीं जब लोग प्रतिबंध और प्रदूषण भूल कर आतिशबाजी  करते रहे। महू में आपस में भिड़ गये, वाहनों-दुकानों में आग लगा दी (नवोदय टाइम्स)। अमर उजाला का शीर्षक है, हम फिर चैम्पियन। खेल के पन्ने पर शीर्षक है, अपराजेय भारत। अमर उजाला के दूसरे पहले पन्ने पर भी बहुत सारी खबरें नहीं हैं पर तीन कॉलम की एक खबर का शीर्षक है,  महाकुम्भ में नहाने योग्य था गंगा का पानी। उपशीर्षक है, सीपीसीबी ने नई रिपोर्ट में कहा – अलग-अलग नमूने पूरी तस्वीर नहीं दिखाते। यह खबर नवोदय टाइम्स में भी पहले पन्ने पर है। अंतर सिर्फ यह है कि नवोदय टाइम्स में विज्ञापन नहीं हैं तो खबरें ज्यादा हैं भले संपादक की पसंद की हैं और जो होनी चाहिये थी वो नहीं हैं। पर अमर उजाला विज्ञापनों से भरा है और दो पहले पन्ने मिलकर भी एक पेज की खबरें नहीं दे पाते हैं। आज की खबरों में यह खबर रह गई है कि मणिपुर में स्थिति संभालने की कोशिश नाकाम रही। हिन्दू की लीड के अनुसार विरोध जारी है, महिलाओं ने प्रमुख हाईवे बंद कर दिये हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ने इस खबर को पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर लीड बनाया है। आज की दूसरी बड़ी खबर संसद के बजट सत्र की शुरुआत की है। इंडियन एक्सप्रेस और दि एशियन एज में यह लीड है। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह सेकेंड लीड है। इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक है, विपक्ष अमेरिकी टैरिफ, मतदाता सूची, परिसीमन का मुद्दा उठायेगा सरकार वक्फ विधेयक पर फोकस करेगी। दि एशियन एज ने लिखा है, वक्फ विधेयक, मणिपुर, टैरिफ पर विपक्ष सरकार संसद में भिड़ने के लिए तैयार।

आप जानते हैं और समझ सकते हैं कि देश में स्थितियां क्या है और कौन से काम जरूरी हैं, उनका क्या नफा-नुकसान है पर अखबार ही नहीं, जनता भी क्रिकेट में मस्त है। हो सकता है, इसमें भी राजनीति हो पर जनता नहीं समझेगी तो भुगतेगी या भुगत ही रही है। इसी लिये शंभूनाथ शुक्ल ने लिखा है और मैं उद्धृत कर रहा हूं, “रात देर तक पटाखे छूटते रहे क्योंकि हम क्रिकेट में चैंपियन हो गए हैं। प्रधानमंत्री बधाइयाँ दे रहे हैं और आम पब्लिक खुश हो रही है। समझ नहीं आता कि इस तरह की बधाइयों के आदान-प्रदान या खुशी जाहिर कर हम क्या हासिल कर लेंगे? क्या लोगों की बदहाली दूर हो जाएगी? कुछ लोग इसे देश भक्ति बताते हैं। कौन-सा देश और किसकी भक्ति! क्या हम डोनाल्ड ट्रम्प को जवाब दे पाये? कनाडा और यूरोप ने अमेरिका को उसकी औक़ात दिखा दी। कनाडा के नए पीएम मार्क कार्नी ने भी ट्रूडो की तरह कह दिया है कि कनाडा कभी भी अमेरिका का 51वाँ राज्य नहीं बन सकता। कनाडा के आम लोगों ने छुट्टियों पर अमेरिका जाना बंद कर दिया। उनके सामान का भी बॉयकाट। अब वे चीन, मैक्सिको से माल मंगवा लेंगे पर अमेरिका से नहीं। यह होती है देश भक्ति। जिन जस्टिन ट्रूडो को कनाडा के लिए बोझ बताया जा रहा था वे जाते-जाते लोगों में देश भक्ति का जज्बा भर गए। उन्होंने अपनी डूब रही लिबरल पार्टी की लोकप्रियता को बहुत ऊपर पहुंचा दिया। दूसरी तरफ़ हम हैं, जहाँ ट्रम्प के पाँव छू कर आशीर्वाद लेते हैं। एक बार भी प्रधानमंत्री ने डोनाल्ड ट्रम्प को 56 इंची छाती नहीं दिखाई।” इसपर संजय सिन्हा ने लिखा है, “बहुत देर हो गई आते-आते। अब यही देशभक्ति है। व्यस्त रहिए, मत सोचिए। सोचने का काम उनका है। हमारे – आपके लिए यही सब है 1) कुंभ में खोए रहे 2) विश्व चैंपियनशिप में व्यस्त रहे 3) 13 मार्च से महिला चैंपियनशिप और 4) 22 मार्च से आईपीएल।” निश्चित रूप से लोग इसमें उलझे रहेंगे और नहीं पूछेंगे कि भारत अमेरिका के दबाव में ट्रैरिफ कम करने के लिए राजी हो गया है का ट्रम्प का दावा सही है कि नहीं। कल यहां मैंने इस बारे में लिखा भी था।

आप जानते हैं कि अमेरिकी टैरिफ के मामले में तो भारत चुप है लेकिन अमेरिका के एक मंदिर में तोड़फोड़ और भारत विरोधी नारे लिखने पर भारत ने कड़ी कार्रवाई की मांग की है। नवोदय टाइम्स में आज यह खबर लीड है। खबर के अनुसार, कैलिफोर्निया में चीनो हिल्स के स्वामी नारायण मंदिर को अपवित्र किये जाने का मामला है। नवोदय टाइम्स की इस खबर के मुकाबले टेलीग्राफ की खबर भारत की घटनाओं के संबंध में है और संपादकों को तय करना चाहिये कि उन्हें कैसी खबरों को प्राथमिकता देनी है या देनी चाहिये। अगर अमेरिका की घटना पर भारत के एतराज को इतनी प्रमुखता दी जा रही है तो क्या भारत की घटना को नजरअंदाज किया जा सकता है। अगर किया जायेगा तो एक देश के रूप में हम भारत की कैसी छवि बना रहे हैं। पक्षपात पर ध्यान दें: कुकीज ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निकाय से कहा शीर्षक से प्रकाशित गुवाहाटी डेटलाइन की इस खबर में उमानंद जायसवाल ने लिखा है, कुकी-जो के एक संगठन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त से मणिपुर में समुदाय के खिलाफ “भेदभाव पर ध्यान देने” का आग्रह किया है। शनिवार को कांगपोकपी में प्रदर्शनकारियों पर “कार्रवाई” में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। यह आग्रह इसके बाद किया गया है। कुकी-जो बहुल कांगपोकपी में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जो अशांत मणिपुर में बस सेवाओं को फिर से शुरू करने के केंद्र के प्रयास का विरोध कर रहे थे। इससे पहले मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच कोई विवाद का कोई राजनीतिक समाधान नहीं निकला था।

कुकी ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट (कोहूर) ने शनिवार रात एक बयान में कहा, “इसलिए, हम ओएचसीएचआर (मानवाधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त का कार्यालय) वोल्कर तुर्क को कुकी-जो लोगों के खिलाफ उनके धर्म और जातीयता के आधार पर भेदभाव और मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन, खासकर अल्पसंख्यक कुकी-जो लोगों के खिलाफ हो रहे भेदभाव पर ध्यान देने के लिए आमंत्रित करते हैं।” संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त तुर्क इस समय चर्चा में हैं। 3 मार्च को मानवाधिकार परिषद के 58वें सत्र में  अपने संबोधन के बाद से बाद से वे चर्चा में हैं। इसमें उन्होंने कश्मीर और मणिपुर की चर्चा की थी। इसमें उन्होंने कहा था, “मैं मानवाधिकार रक्षकों और स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कानूनों और उत्पीड़न से चिंतित हूं। ऐसे लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया जा रहा है और कश्मीर सहित अन्य जगहों पर नागरिक स्थान कम हो रहा है। मैं मणिपुर में हिंसा और विस्थापन के मुद्दे पर बातचीत, शांति-निर्माण और मानवाधिकारों के आधार पर कदम बढ़ाने का भी आह्वान करता हूं।” नई दिल्ली ने तुर्क की टिप्पणियों को “बे सिर पैर का और निराधार” करार दिया था। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि अरिंदम बागची ने “भारत और विविधता और खुलेपन के हमारे सभ्यतागत लोकाचार को बेहतर ढंग से समझने” का आह्वान किया था।

इन महत्वपूर्ण खबरों के बीच आज एक खबर कठुआ में तीन लोगों की मौत और उसके लिए आतंकवाद को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश है। अमित शाह और केंद्र सरकार आतंकवाद खत्म होने का दावा न जाने कितनी बार कर चुके हैं। फिर भी कोई वारदात हो तो आतंकवाद को जिम्मेदार ठहराकर अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त होना चाहते हैं। यह मामला भी वैसा ही है। खबरों के अनुसार तीन लोगों वरुण सिंह (15), उसके चाचा योगेश सिंह (32) और मामा दर्शन सिंह (40) का शव शनिवार की शाम एक नदी से बरामद हुआ था। केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा है कि यह इस शांत क्षेत्र का माहौल खराब करने की गहरी साजिश लगता है। जम्मू व कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस मामले में एक विस्तृत और पारदर्शी जांच के आदेश दिये हैं। ऐसी जांच की जरूरत तो कई मामलों में महसूस की जाती रही है पर दी गई कि नहीं पता नहीं है। इस मामले में दी गई है तो पहले पन्ने की खबर जरूर होनी थी। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह दो कॉलम की, दि एशियन एज में तीन कॉलम की, टाइम्स ऑफ इंडिया में दो कॉलम की इंडियन एक्सप्रेस में तीन कॉलम की हिन्दू में खबर अंदर पेज 10 पर होने की सूचना है। आज भिन्न अखबारों में जो खबर नहीं है उनमें हम्पी बलात्कार कांड का फॉलो अप शामिल है। इंडियन एक्सप्रेस ने इस मामले में पुलिस से मिली जानकारी दी है कि आरोपी ने 10 दिन पहले चेन छीनने की कोशिश की थी। इससे याद आया कि शैफ अली खान के घर में घुसने वाला गिरफ्तार कर लिया गया था पर उसका चेहरा सीसीटीवी में देखे गये युवक से अलग बताया गया। बाद में पता चला कि उंगलियों के निशान भी नहीं मिल रहे थे। पता नहीं इस मामले में विस्तृत और पारदर्शी जांच के आदेश दिये गये या नहीं और दिये गये तो क्या, किस स्थिति में है।  

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