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आप बताइए, क्या अरविंद केजरीवाल और उनके विधायक अपने इलाके में काम कर रहे हैं?

आप जमीनी हकीकत देखने जानने के बाद www.mpreportcard.com पर दिल्ली के MLA और MP को वोट दीजिए… फिलहाल सिर्फ दिल्ली के MP और MLA के लिए वोटिंग खुली है… अपने  MLA या MP को वोट करने के लिए होम पेज पर search and vote for MLA या Search and vote for MP  पर क्लिक करें… फिर फ्रंट पेज पर खुलने वाली विंडो में अपने MLA या MP को Name, Constituency, Party या State से ढूंढें। फिर अपने MLA या MP के नाम पर क्लिक करके सवालों पर पहुंचे। MLA या MP को उनके काम के आधार पर नंबर्स दें। अपना मोबाइल नंबर और उस पर आया वेरिफिकेशन कोड डालें और वोट का बटन दबाएं। 5 मई तक खुली है और नतीजे 10 मई को घोषित किए जाएंगे। फिलहाल सिर्फ दिल्ली के MP और MLA की रेटिंग की जा रही है। दूसरे राज्यों के लिए वोटिंग 10 मई से शुरु की जाएगी।

आप जमीनी हकीकत देखने जानने के बाद www.mpreportcard.com पर दिल्ली के MLA और MP को वोट दीजिए… फिलहाल सिर्फ दिल्ली के MP और MLA के लिए वोटिंग खुली है… अपने  MLA या MP को वोट करने के लिए होम पेज पर search and vote for MLA या Search and vote for MP  पर क्लिक करें… फिर फ्रंट पेज पर खुलने वाली विंडो में अपने MLA या MP को Name, Constituency, Party या State से ढूंढें। फिर अपने MLA या MP के नाम पर क्लिक करके सवालों पर पहुंचे। MLA या MP को उनके काम के आधार पर नंबर्स दें। अपना मोबाइल नंबर और उस पर आया वेरिफिकेशन कोड डालें और वोट का बटन दबाएं। 5 मई तक खुली है और नतीजे 10 मई को घोषित किए जाएंगे। फिलहाल सिर्फ दिल्ली के MP और MLA की रेटिंग की जा रही है। दूसरे राज्यों के लिए वोटिंग 10 मई से शुरु की जाएगी।

दरअसल चाहे लोकसभा चुनाव हों, विधानसभा या फिर नगर निगम या नगर पालिका के। अक्सर लोगों की शिकायत रहती है जीतने के बाद जनप्रतिनिधि उनकी सुध नहीं लेते। लोगों के मन में ऐसी धारणा बनी हुई है कि सांसद, विधायक या पार्षद सिर्फ चुनाव के वक्त ही उनका रुख करते हैं और जब भी आम लोगों को उनकी जरुरत पड़ती है वो नदारद रहते हैं। देश में आज कोई ऐसा सिस्टम नहीं है जहां जीतने के बाद सासंदों, विधायकों या पार्षदों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाया जाए। ये बात जनमानस में घर कर गई है कि जनप्रतिनिधि सोचते हैं कि अब तो जीत गए, अब तो पांच साल बाद ही जनता का सामना करना है। लेकिन क्या ये सही तरीका है? बिल्कुल नहीं।

तो ऐसा क्या किया जाए कि चुने हुए जनप्रतिनिधि हर वक्त लोगों को प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें? इसी बात को ध्यान में रखते हुए www.mpreportcard.com & www.mlareportcard.com को लॉंच किया गया है जहां हर तीन महीने पर सभी सांसदो और विधायकों का रिपोर्ट कार्ड और रेटिंग जनता के सामने पेश की जाएगी। सोशल मीडिया पर सांसदों और विधायकों का रिपोर्ट कार्ड और रेंटिग तैयार करेंगे आम लोग। विधायकों और सांसदों का रिपोर्ट कार्ड तैयार करने में ईमानदारी रहे इसलिए वोटिंग करते वक्त मोबाइल नंबर और उसपर आया वेरिफिकेशन कोड MUST किया गया है। एक मोबाइल नंबर से तीन महीने में सिर्फ एक विधायक और एक सांसद के बारे में वोटिंग की जा सकती है।

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1 Comment

1 Comment

  1. indian

    April 19, 2015 at 5:20 pm

    sir….. is baat ki kya guarantee hai ki delhi se baahar ke log farji vote nhi krenge aur delhi ke log bhi 1 se jyada mobile ka use krke frji vote nhi krenge ?

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