मुंबई प्रेस क्लब में 10 दिसंबर को हुई स्पेशल जनरल मीटिंग (SGM) रिकॉर्ड संख्या में सदस्यों की उपस्थिति के साथ ऐतिहासिक साबित हुई। बैठक में भारी बहुमत ने टीवी पत्रकार राजेश कुमार के समर्थन में मतदान किया—वे वही पत्रकार हैं जिन्हें 25 अक्टूबर को क्लब के सम्मेलन कक्ष में आयोजित कार्यक्रम के दौरान क्लब अध्यक्ष समर खडास ने कथित तौर पर बदसलूकी करते हुए बाहर निकलवा दिया था।
SGM बुलाने वाले सदस्यों ने राजेश कुमार और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले अन्य सदस्यों के निलंबन से संबंधित प्रस्ताव लाए थे। यह मूल रूप से “दोहरी सज़ा” देने का प्रयास था। मीटिंग की अध्यक्षता कर रहे राजेश मास्करेनहास ने अध्यक्ष के समर्थकों में से चार लोगों को लंबा बोलने दिया, लेकिन राजेश कुमार और प्रस्तावों का विरोध कर रहे सदस्यों को माइक्रोफोन नहीं दिया।
यह सब सुनियोजित तरीके से किया गया। चूँकि प्रस्ताव हारने की स्थिति में थे, इसलिए अध्यक्ष के समर्थकों ने पहले चर्चा को मुद्दे से हटाकर ‘साम्प्रदायिकता’ और ‘नक्सलवाद’ की ओर भटकाने की कोशिश की, जबकि बैठक का विषय क्लब अध्यक्ष का कथित दुर्व्यवहार था। बनाए गए शोर-शराबे का इस्तेमाल करते हुए चेयरमैन ने पहले बैठक को थोड़ी देर के लिए स्थगित किया और फिर अचानक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।
जब राजेश कुमार के समर्थन में खड़े कई सदस्य वोटिंग की मांग कर रहे थे, तभी क्लब अध्यक्ष और एक बाहरी व्यक्ति ने शारीरिक रूप से राजेश मास्करेनहास को कुर्सी से उठाकर बैठक स्थल से बाहर ले गए। इसके साथ ही SGM अचानक समाप्त कर दी गई।
मीटिंग का निष्कर्ष
राजेश कुमार को दंडित करने वाले प्रस्ताव गिर गए—वह अपने सम्मान और न्याय के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। वहीं अध्यक्ष खडास को बचाने के लिए SGM बुलाने वाले समूह को बड़ी हार झेलनी पड़ी।
अगला कदम: अध्यक्ष के खिलाफ नई SGM की तैयारी
10 दिसंबर 2025 को प्रेस क्लब के 183 सदस्यों ने एक नई SGM बुलाने का नोटिस जमा किया है। इसमें दो महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं—
- एक स्वतंत्र जांच समिति का गठन
- जांच पूरी होने तक अध्यक्ष समर खडास को पद और अधिकारों से दूर रखा जाए
आगे क्या?
क्लब की राजनीति और उठापटक अभी खत्म नहीं हुई है। आगे और महत्वपूर्ण घटनाक्रम होने की संभावना है।


