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आज के अखबार : नरेन्द्र मोदी चुनावी तैयारियों में लगे हैं और खबर है कि भारत के लिए मुख्य प्रतिद्वंद्वी चीन है

टेलीग्राफ की एक खबर के अनुसार, सात मई को ऑपरेशन सिन्दूर शुरू होने से पहले ही हैकर्स ने भारत और पाकिस्तान दोनों पर साइबर हमले शुरू कर दिये थे। गूगल क्लाउड डिविजन की साइबर सुरक्षा फर्म मैनडियैन्ट की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। यह एक ऐसा हमला था जिसमें किसी वेबसाइट पर पहुंचने या नेटवर्क का उपयोग करने से जानबूझकर भिन्न तरीकों से रोक दिया जाता है।

संजय कुमार सिंह

आज के ज्यादातर अखबारों की खबरों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चुनावी तैयारियों का पता चलता है जबकि टाइम्स ऑफ इंडिया ने अमेरिकी खुफिया जानकारी के आधार पर सूचना दी है कि भारत के लिए चीन मुख्य प्रतिद्वंद्वी है और पाकिस्तान एक सहायक सुरक्षा का मामला। इस खबर के अनुसार, पाकिस्तान भारत को अपने अस्तित्व के लिये खतरा मानता है और अपनी सेना के आधुनिकीकरण की कोशिशों को जारी रखेगा। अपने परमाणु हथियारों को इतना बेहतर करेगा कि भारत की परंपरागत अग्रणी सैनिक स्थिति का मुकाबला कर सके। स्पष्ट है कि चीन के मामले में ना कोई घुसा है और पाकिस्तान के मामले में ऑपरेशन सिन्दूर कोई अच्छी विदेश नीति नहीं है और यह आंतरिक राजनीति के लिए है इसका पता तो रोज कई तरह से लगता है। आज भी लग रहा है। हालांकि, इससे महत्वपूर्ण है – द हिन्दू की लीड। इसके अनुसार, मणिपुर राजभवन मार्च रोके जाने पर झड़प। उप शीर्षक के अनुसार इंफाल के टकराव में पांच प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। प्रभावशाली संगठन ने सिविल नाफरमानी की अपील की थी। इसके तहत राज्य की पहचान के कथित अपमान के लिए राज्यपाल का सार्वजनिक बायकाट किया जाना था। आप समझ सकते हैं कि मणिपुर की स्थिति अभी तक ठीक नहीं है और नोटबंदी से आतंकवाद की कमर तोड़ने के बाद अब ऑपरेशन सिन्दूर चलाया गया जबकि आतंकियों के साथ पकड़े गये जम्मू पुलिस के अधिकारी देवन्दर सिंह के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई पांच साल बाद भी स्पष्ट और सार्वजनिक नहीं है।

ऐसे में सरकार की प्राथमिकतायें भी दुरुस्त किये जाने की जरूरत है। पर वह सब खबर नहीं है। आज की खबरों की बात करूं तो जाहिर है कि सरकार और उसका समर्थक मीडिया, चुनाव प्रचार मोड में है। नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, अर्थव्यवस्था में हम चौथे स्थान पर हैं। उप शीर्षक है, नीति आयोग के सीईओ बोले – जापान को छोड़ा पीछे, अब जर्मनी की बारी। कहने की जरूरत नहीं है कि यह खबर भ्रम फैलाने वाली है और अगर हमने अर्थव्यवस्था के आकार में जापान को पीछे छोड़ दिया है और अब जर्मनी की बारी है तो जाहिर है ऐसा ज्यादा क्षेत्रफल और आबादी ज्यादा होने के कारण है। ऐसे में यह कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। इसका मतलब यह भले हो सकता है कि हम पहले से बेहतर हुए हैं पर जापान से किसी मामले में बेहतर नहीं हुए हैं। सच्चाई यह है कि प्रतिव्यक्ति आय के मामले में हम काफी पीछे हैं, रोजगार उपलब्धता मुद्दा ही नहीं है मंहगाई वृद्धि की दर भी पहले के मुकाबले कम है क्योंकि खपत नहीं है। ऐसे में इस तरह की खबरें सिर्फ आंकड़े पर खुशी मनाने  की तरह है और नरेन्द्र मोदी ने पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था होने को भी एक लक्ष्य बना दिया था। वह लक्ष्य कई साल बाद भी हासिल नहीं हुआ है और अब हासिल होने को है तो इतना भुनाया जा चुका है कि इसमें कुछ बचा ही नहीं है।

अमर उजाला की लीड मौसम की खबर है। हाल में दिल्ली से श्रीनगर जा रही की फ्लाइट के तूफान में फंसने पर पायलट ने पाकिस्तान की तरफ जाना चाहा तो लाहौर एटीसी के साथ भारतीय वायु सेना ने भी मना कर दिया था और खराब विमान के 220 यात्रियों को सुरक्षित श्रीनगर उतराने वाले दो पायलटों को ग्राउंड कर दिया था। वह खबर अमर उजाला में पहले पन्ने पर नहीं थी और मैंने लिखा था कि हिन्दी अखबार हवाई यात्रियों की खबर को ज्यादा प्रमुखता नहीं देते हैं। आज आंधी बारिश से 200 से अधिक उड़ानें प्रभावित होने की खबर लीड है। नवोदय टाइम्स की एक खबर का शीर्षक है, एसपी दफ्तर की छत गिरी दरोगा की मौत। अमर उजाला में यह लीड का उपशीर्षक है, गाजियाबाद में एसआई समेत दो की मौत। नवोदय टाइम्स के अनुसार खबर इस प्रकार है,  आंधी- बरसात में एसीपी अंकुर विहार के दफ्तर की छत भर-भराकर गिर पड़ी और वहां सो रहे दफ्तर के पेशकार (दरोगा) की मलबे में दबने से मौत हो गई। दरोगा की मौत से जहां परिवार के लोगों में कोहराम मचा हुआ है। वहीं, पुलिस विभाग में भी शौक व्याप्त है। पुलिस द्वारा मृतक दरोगा के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मूल रूप से गांव चितभवन, थाना इकदिल जनपद इटावा निवासी 58 वर्षीय एसआई वीरेन्द्र कुमार मिश्रा दिल्ली के द्वारका इलाके में परिवार के साथ रहते थे। उनके परिवार में पत्नी सुधा, दो बेटे प्रशांत व प्रतीक व दो बेटी प्रियंका व प्रिया हैं। वीरेन्द्र मिश्रा दिल्ली-सहारनपुर रोड स्थित एसीपी अंकुर विहार व कार्यालय में बतौर पेशकार तैनात थे।

ठीक है कि यह बहुत आम नहीं है पर यह तथ्य अपने आप में बहुत गंभीर है कि कोई सरकारी कर्मचारी दफ्तर में कार्य समय के दौरान छत गिरने से मारा जाये। इसके लिए कोई भी मुआवजा पर्याप्त नहीं है और यह उतना ही अनूठा वह मुश्किल है जितना किसी पर्यटक स्थल पर कोई पर्यटक या आतंकी किसी को नाम पूछकर गोली मारे और उसकी विधवा से कहे तुम्हें नहीं मारूंगा, जाओ मोदी को बता देना। अगर पहले  मामले में कार्रवाई हुई है तो इस मामले में भी होना चाहिये। पर वह बाद की बात है और अलग मुद्दा है। आइये अब भिन्न अखबारों की लीड देखें। दि एशियन एज की लीड का शीर्षक है, मोदी ने राजग राज्यों की प्रमुख बैठक की अध्यक्षता, सुशासन के लिए जोर डाला। यहां मैंने कल लिखा था,  आज की सरकारी और प्रचारित खबर है, टीम इंडिया की तरह मिलकर काम करें केंद्र राज्य तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं। आज मोदी जी राजग राज्यों की बैठक कर रहे हैं। सर्वदलीय बैठक में गये नहीं थे और बिहार चुनाव के लिए चले गये थे। इन उदाहरणों से लगता नहीं है कि प्रधानमंत्री देश के लिए या सभी देशवासियों के लिए काम कर रहे हैं। वे अपनी पार्टी के एक खास वर्ग और उसकी जरूरतों के लिए काम करते हैं। इनमें रणनीति बनाना, सेना के अभियान का नाम रखना आदि शामिल हो सकता है।   

हिन्दुस्तान टाइम्स की आज की लीड का शीर्षक है, राजग मुख्यमंत्रियों ने जातिवार जनगणना की तारीफ की, इस मुद्दे पर राजनीति की आलोचना की। खबर इस प्रकार है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को राजग शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उप मुख्यमंत्रियों से कहा कि जातिवार जनगणना कराने का केंद्र का निर्णय हाशिये पर पड़े समुदाय को मुख्य धारा में लाने की दिशा में एक कदम है। कहने की जरूरत नहीं है कि भाजपा के आंतरिक मामले को इतनी प्रमुखता देने की वजह राजनीति ही है। बिना छुट्टी लिये रोज देश के लिए 18 घंटे काम करने वाले नरेन्द्र मोदी अब देश के लिए काम करते कम और पार्टी के लिए काम करते ज्यादा दिखते हैं और अब समझना मुश्किल नहीं रहा कि जो काम देश के लिए किया जाता लगता है वह भी अक्सर पार्टी के लिए या अपने लिये ही किया जाता है। इसके बावजूद सरकार के प्रचार का आलम यह है कि जनसत्ता जैसे अखबार ने मन की बात को लीड बनाया है। आज शीर्षक है, ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ सिर्फ सैन्य अभियान नहीं, बदलते भारत की तस्वीर है। इंडियन एक्सप्रेस की लीड अमेरिका गये सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की खबर है। यह भी सरकारी प्रचार ही है। इसका शीर्षक है, “पाकिस्तान से आंतक पर भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका में कहा : इसकी कीमत चुकानी होगी”।

इंडियन एक्सप्रेस में इसके साथ छपी खबर मन की बात वाली है। और प्रधानमंत्री की फोटो के साथ लिखा है, ऑपरेशन सिन्दूर के बाद पहली मन की बात। इस कर का शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने कहा, ऑपरेशन सिन्दूर में भारत में निर्मित हथियारों की शक्ति का प्रदर्शन किया। कहने की जरूरत नहीं है कि भारत में निर्मित हथियारों की शक्ति दिखाने के लिए ऑपरेशन सिन्दूर नाम का सैन्य अभियान अनुचित है। वैसे भी, यह कैसा युद्ध जो किसी तीसरे के कहने पर बीच ही रोक दिया गया। युद्ध में किन उपकरणों का उपयोग हुआ, नुकसान और उपलब्धियों की कोई जानकारी नहीं दी गई है। पुंछ में पाकिस्तान के हमले में घायल लोगों के लिए कोई सरकारी योजना नहीं है, राफेल के नुकसान से संबंधित अफवाहों का ना खंडन है और ना पुष्टि। युद्ध के कई दिन निकल चुके हैं और इससे पहले कि लोग भूलें नया शिगूफा आ जाता है। ऑपरेशन सिन्दूर में राफेल गिराये जाने की खबरों का ना खंडन हुआ ना पुष्टि की गई लेकिन भारत में बने हथियारों की शक्ति का प्रदर्शन हुआ इसका प्रचार प्रधानमंत्री कर रहे हैं। पहले कहा गया था कि यह आतंकवाद पर काबू पाने के लिए था। कैसे मााना जाये कि यह वही नहीं है जो नोटबंदी से आतंकवाद की कमर टूट जाने के दावे में था।

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