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नसीरुद्दीन शाह से टाइम्स नाउ का रिपोर्टर सवाल के नाम पर अभद्रता कर रहा है! देखें वीडियो

जिस चैनल ने आज तक देश के प्रधानमंत्री से एक भी सीधा सवाल पूछने की हिम्मत नहीं दिखाई, उसी Times Now का रिपोर्टर अब वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह से सवाल के नाम पर बदतमीजी और शारीरिक मिसबिहेव करता दिख रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर लोग पूछ रहे हैं—क्या यही आज की टीवी पत्रकारिता है, या सत्ता के सामने घुटने टेककर, असहमति की आवाज़ों पर धौंस जमाने का नया मॉडल? पत्रकारिता के नाम पर यह रिपोर्टिंग नहीं, बल्कि खुलेआम असभ्यता और सत्ता-समर्थित गुंडागर्दी है, ऐसा आम दर्शकों का कहना है।


नसीरूद्दीन शाह बार-बार कह रहे हैं कि वे कोई जवाब नहीं देना चाहते, लेकिन पत्रकारिता के नाम पर माइक मुँह में घुसेड़ने वाला पत्रकार इतनी नीचे गिर चुका है मानो वह जवाब नहीं बल्कि उनकी जान ही ले लेगा -अपूर्व भारद्वाज


सौरभ यादव-

नसीरुद्दीन शाह साहब को मुंबई यूनिवर्सिटी के ‘जश्न-ए-उर्दू’ कार्यक्रम में बुलाया गया था लेकिन एक रात पहले ही उन्हें फोन करके मना कर दिया गया…

जिसके बाद नसीरुद्दीन शाह ने इंडियन एक्सप्रेस में एक लेख लिखा है जिसमें वो कहते हैं कि वे इस सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए उत्साहित थे, लेकिन एक रात पहले फोन आया औ कहा कि आपको नहीं आना है।

इसकी वजह शायद ये हो सकती है कि मैंने कभी भी खुद को ‘विश्वगुरु’ कहने वाले की तारीफ नहीं की। असल में, मैं उनके बर्ताव के तरीके की आलोचना करता रहा हूं। उनका घमंड मुझे बुरा लगता है और पिछले 10 साल में उनके किए गए किसी भी काम से मैं प्रभावित नहीं हुआ हूं।

मैं अक्सर उनके कई कामों की आलोचना करता रहा हूं और करता रहूंगा। हां इस बात का दुख है कि ये वो भारत नहीं जिसमें मैं बड़ा हुआ, जहां नफरत अब 24 घंटे चलने वाली प्रक्रिया बन चुकी है।


सायरा शाह हलीम-

Have been receiving calls about my uncle’s column in today’s Indian Express.

Deeply unsettling to read his column.

It’s a sad state of affairs when a literary fest or a college symposium becomes a test of “nationalism” rather than a celebration of ideas. My uncle, Naseeruddin Shah,a receipent of national and international awards has spent a lifetime contributing to the soul of Indian cinema and theatre, yet today, relevance is measured by how much one “butters up” an organizer or praises the “Vishwaguru.”

If you don’t toe the line, you’re cancelled. If you don’t flatter the powerful, you’re excluded. Enough is enough. We need to stop turning our cultural institutions into echo chambers for the state.

​NaseerUddin Shah has always called a spade a spade,but it seems today’s “gatekeepers” of culture prefer silence and sycophancy over honesty. Truly shameful.

Those who dont know what iam talking about, sharing the column here.


बिट्टू शर्मा-

इस देश में पीएम की आलोचना करने पर ऐसा नहीं होता था कभी. अभिनेता नसीरुदीन शाह को आज ये एहसास करवाया गया.

खबर है कि पहले मुंबई में जश्न-ऐ-उर्दू नामक प्रोग्राम में बुलाया गया और लास्ट मिनट में मना कर दिया गया!.

एक्टर ने अपने बयान में ये कहा कि-

“मुझे मुंबई यूनिवर्सिटी के जश्न-ए-उर्दू इवेंट से आखिरी मिनट में इनवाइट कैंसिल कर दिया गया और बाद में मुझ पर झूठ-मूठ का आरोप लगाया गया कि मैंने आने से मना कर दिया।”

“मैं जिस तरह से PM मोदी काम करते हैं, उसकी आलोचना करता रहा हूँ। उनका घमंड मुझे बुरा लगता है और पिछले 10 सालों में उनके किए गए किसी भी काम से मैं प्रभावित नहीं हुआ हूँ।”

“मैंने कभी भी ‘तथाकथित विश्वगुरु’ की तारीफ नहीं की।”

एक शानदार एक्टर के साथ ये व्यवहार? कल रवनीत बिट्टू के लिए सिखों के हमदर्द बने लोगों को ये भेदभाव क्यों नहीं दिखता?

मुसलमानों से इतनी दिक्कत है या आलोचना से है?

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