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विवादों में नवभारत अख़बार प्रबंधन, लाखों के पीएफ घोटाले का आरोप, आयुक्त को सौंपा ज्ञापन

नागपुर: हिंदी दैनिक नवभारत का प्रबंधन एक बार फिर विवादों में घिर गया है. इस बार नवभारत प्रबंधन पर लाखों रुपए के पीएफ घोटाला करने का आरोप नवभारत के लगभग 60 से अधिक पूर्व कर्मचारियों ने लगाया है. इस संबंध में नवभारत के पूर्व कर्मचारियों का शिष्टमंडल सहायक पीएफ आयुक्त पियूष मिश्रा से मिला और नवभारत प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए पत्र सौंपा.

सहायक पीएफ आयुक्त पियूष मिश्रा को ज्ञापन सौंपने के बाद कर्मचारियों का शिष्टमंडल

तुकड़ोजी पुतला के समीप पीएफ कार्यालय में पदस्थ सहायक पीएफ आयुक्त मिश्रा ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी सुनवाई सितंबर के प्रथम सप्ताह में करने का आश्वासन शिष्टमंडल को दिया.

यह है मामला
दरअसल नवभारत के पुराने और नए कर्मचारी नवभारत प्रबंधन पर कर्मचारियों के साथ पीएफ कटौती में लाखों रुपए का घोटाला करने के साथ-साथ आयोग के अनुसार वेतन का भुगतान न करने, नियमित कर्मचारियों पर दबाव डाल कर उन्हें कांट्रेक्ट पर रहने के लिए मजबूर करने, सेवानिवृत्त कर्मचारियों की परिसंपत्तियां रोक लेने जैसे कई गंभीर आरोप लगाते रहे हैं. इस नये मामले में कर्मचारियों ने लिखित रूप से पीएफ घोटाले की जांच करने की मांग लगभग वर्ष भर पहले की थी. बार-बार पीएफ कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद जब कोई न्याय नहीं मिला तो कर्मचारियों के शिष्टमंडल ने पुणे कार्यालय जाकर संबंधित अधिकारियों को मामले से अवगत कराया. अधिकारियों से जांच का आश्वासन मिलने के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो लगभग 60 पूर्व कर्मचारियों का शिष्टमंडल पीएफ कार्यालय पहुंच गया.

उन्होंने सहायक पीएफ आयुक्त मिश्रा को ज्ञापन सौंपकर अब तक की गतिविधियों से अवगत कराया. मिश्रा ने कर्मचारियों द्वारा लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लेते हुए सितंबर के प्रथम सप्ताह में मामले की सुनवाई का आश्वासन दिया.

यह है नियम
पीएफ कटौती के नियमों के अनुसार समाचारपत्रों के कार्यालयों में सेवाएं देने वाले कर्मचारियों के पीएफ की कटौती कर्मचारियों को मिलने वाले कुल वेतन के आधार पर होनी चाहिए, जबकि नवभारत प्रबंधन ने पीएफ कार्यालय के अधिकारियों से मिलीभगत कर कर्मचारियों की पीएफ कटौती सीलिंग वेतन पर की. इससे हर कर्मचारियों को लाखों रुपए का नुक़सान हुआ. यह नियमावली पीएफ कार्यालय के पास भी मौजूद है. अब तक नवभारत प्रबंधन के खिलाफ कोई भी कार्रवाई न होने से सभी पुराने – नये कर्मचारियों में खासा रोष है.

अब सभी की निगाहें सितंबर के प्रथम सप्ताह में होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई हैं.

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