इलाहाबाद के नवाबगंज में नहीं थमा बवाल, पुलिस आराम फरमाती रही और मकानों में होता रहा पथराव, तोड़फोड़

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बाग में आराम फरमाती सुरक्षा ड्यूटी में तैनात पुलिस

इलाहाबाद। गंगापार के नवाबगंज स्थित उपाध्याय का पूरा में बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस बवाल रोकने के बजाए केवल लीपापोती करने में जुटी है। तीन दिन गुजर गए पर इस गांव में अभी तक जिला प्रशासन का कोई अफसर नहीं पहुंचा। महज चार डंडाधारी पुलिस की ड्यूटी लगा दी गई है। और वे गांव के बाहर अमरूद की बाग में आराम फरमा रहे हैं। बीती रात भी पुलिस की ड्यूटी के दौरान ही दलित बस्ती में आधे दर्जन मकानों पर जमकर पथराव किया गया। मिठाई लाल, कल्लू, बारातीलाल, बल्ली, मतई, रामकिशुन, अशर्फीलाल समेत कई अन्य लोग बलवाइयों के शिकार बने।
 
सोमवार को दिनभर उपाध्याय का पूरा में चले बवाल के बाद रात करीब नौ बजे इनके मकानों पर करीब डेढ़ दर्जन लोगों ने धावा बोल दिया। इन घरों के ज्यादातर पुरूष बाहर हैं, यहां केवल महिलाएं और बच्चे ही हैं। हालात का जायजा लेने मौके पर गई पत्रकारों की टीम को उसरही, मलकहिन, शीला देवी आदि ने बताया कि हमलावर लाठी-डंडे से लैस थे। आते ही घरों पर पथराव शुरू कर दिया।

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सुरक्षा में लगी पुलिस ड्यूटी करती रही, मकानों में हो गयी तोड़फोड़ और पथराव

मिठाई लाल, अशर्फी आदि के घरों में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की गई। जो भी सामने मिला उसे मारापीटा गया। खास बात यह है कि दलित बस्ती के इन घरों में केवल महिलाएं और बच्चे हैं, थाने में तहरीर देने वाला भी कोई नहीं है। मौके पर जाकर इनका दुख दर्द सुनने के लिए जिले के अफसरों को फुर्सत नहीं है। नवाबगंज की पुलिस घटना को छिपाने और बचाने में जुटी हुई है।

घरों में लटके ताले बयां कर रहे असलियत

उपाध्याय का पूरा गांव में सन्नाटा है। दहशत का माहौल है। पुलिस अपना इकबाल कायम रख पाने में पूरी तरह नाकारा साबित हुई है। साठ-सत्तर घरों की मिली जुली आबादी वाले इस गांव में पासी, तेली, बनिया, चमार, कुंजड़ा और दर्जीगीरी करने लोग हमेशा से मिलजुल कर रहते आए हैं। पांच-छह साल के मासूम लकी नामक एक बच्चे के बाग में घुसकर अमरूद खा लेने के बाद रविवार की शाम से शुरू हुए बवाल को रोक पाने में पुलिस नाकाम क्यों रही, यह सवाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना है।

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लकी नामक बच्चा जिसके बाग में घुसकर अमरूद खाने के बाद शुरू हुआ बवाल

सवालों के घेरे में फिर घिरी नवाबगंज पुलिस

गंभीर अपराधों के गढ़ बन चुके और लगातार सुर्खियों में रहने वाली नवाबगंज पुलिस एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। इलाके में जमकर थू-थू कराने वाली नवाबगंज पुलिस अपनी कार्यशैली को लेकर लोगों के बीच चर्चा में है। शुरू में दो परिवार के बीच हुई मामूली हाथापाई के बाद अगर पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई कर दी होती तो सम्हई के बगल स्थित उपाध्याय का पूरा में रविवार से लेकर मंगलवार तक दोनों बस्तियों में धावा बोलकर मकान, वाहनों में तोड़फोड़ करने की तीन अलग-अलग वारदातें न हो पाती। एक दर्जन से ज्यादा लोगों के घायल होने और चैबादेवी नामक महिला की मौत भी शायद न हुई होती।

 

 

 

इलाहाबाद से वरिष्ठ पत्रकार शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट। लेखक दैनिक जागरण, अमर उजाला, हिंदुस्तान आदि अखबारों में कई साल कार्य कर चुके हैं। संपर्कः मो-9565694757, ईमेलः Shivas_pandey@rediffmail.com

मूल ख़बरः

इलाहाबाद के नवाबगंज में जातीय संघर्ष, वृद्धा की मौत, कई वाहन क्षतिग्रस्त



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