सुधीर मिश्रा का कद बढ़ा, nbt दिल्ली संस्करण की मिली ज़िम्मेदारी

सुधीर मिश्रा-

शुक्रिया अनदेखे दोस्तों…

अगले सफर की ओर

अगले महीने की पहली तारीख़ को नवभारत टाइम्स में मेरे नौ साल पूरे हो रहे हैं। इसी के साथ शुरू होने वाला है बतौर संपादक मेरा अगला सफर। अब जिम्मेदारी होगी दिल्ली संस्करण की। नौ साल पहले आजकल के दिनों में मैं टाइम्स समूह में इंटरव्यू दे रहा था। एक बड़े और प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट के लिए, यानी नवभारत टाइम्स को लखनऊ में शुरू करना। तब दैनिक भास्कर समूह में संपादक बने मुझे तीन साल हो चुके थे और मैं उदयपुर का संपादक था। ईश्वरीय कृपा से घर वापसी जैसा माहौल बन रहा था और साथ में बड़ी ज़िम्मेदारी का भाव था। मेरे लिए उसी शहर में संपादक बनना एक सपने और मां के आशीर्वाद जैसा था, जहां आप ने जीवन के तमाम संघर्ष किए। खेले कूदे बड़े हुए, छात्र राजनीति की, रिपोर्टर बने और फिर सबसे बड़े मीडिया समूह के अखबार का संपादक की जिम्मेदारी मिली।

मै जब इन नौ वर्षों को पलट कर देखा हूं तो मुझे महसूस होता है कि अपने बड़ों, परिवार और मित्रों के साथ साथ सबसे ज्यादा शुक्रिया मुझे उन हजारों लाखों फेसबुक मित्रों का करना चाहिए जिन्हें मैं जानता नहीं, हो सकता है वो मेरी एफबी मित्र सूची में भी न हों लेकिन उनकी प्रतिक्रियाओं से समाज को समझने में मुझे बहुत मदद मिली। पाठकों की अखबार और मुझे लेकर क्या प्रतिक्रिया है, इसे समझा। लगातार सीखने और इवाल्व होने में आप से हर वक्त मदद मिली।

अगर मुझे कुछ नया शुरू करना होता तो मैं उसको पहले आप से साझा करके फीडबैक समझता रहा। दरअसल एक ऐसा मंच है जहां आप को ऐसी मिली जुली प्रतिक्रिया मिलती हैं जिनका विश्लेषण करके आप एक सही राय कायम कर सकते हो। मेरे और मेरी टीम के लिए एनबीटी को शुरू कर उसे स्थापित करने के लिए सबसे जरूरी था सही फीडबैक। सोशल मीडिया की यही खूबसूरती है कि अगर आप इसका बुद्धिमता के साथ इस्तेमाल करते हो तो बेहतर नतीजे हासिल कर सकते हो।

नौ साल पहले मुझे यह शहर उस रिपोर्टर के तौर पर जानता था जो अंगौछा डालकर विश्वविद्यालय से मेडिकल कॉलेज और कलेक्ट्रेट से धरना स्थल की दौड़ लगाता रहता था। लिहाजा इर्द गिर्द के लोगों के लिए मेरी स्थिति आपन जोगी जोगड़ा वाली थी। ऐसे में सही प्रतिक्रियाओं के लिए मेरी मदद आप सब फेसबुक मित्रों ने की। समय समय पर सराहना की और आलोचनाएं की। संशोधन भी बताए जिससे मेरा नजरिया लगातार बदलता रहा। हमारे लिए पहले आप, ट्रैफिक के रंगबाज, खाऊंगा न खाने दूंगा, सिटीजन रिपोर्टर, सुरक्षा और आरोग्य वाटिका जैसे बड़े और सफल अभियानों के पीछे आप सब ही हैं क्योंकि आप लोग मुझे मेरे अतीत से नहीं आज से जोड़ कर देखते रहे।

आप मुझे वही जानते थे जो मैं सोशल मीडिया पर हूं। इस मंच की यह खूबी है कि अगर आप अपने आप को लगातार अभिव्यक्त करते रहते हैं तो अपने व्यक्तिव को छिपा नहीं सकते। अच्छा या खराब जैसा भी है लोग आप को बेहतर समझने लगते हैं। आज नौ साल में नवभारत टाइम्स इस शहर के लोगों की जिंदगी का हिस्सा है, उनका एक ऐसा शुभचिंतक है जहां वो खुशियां अपनी दिक्कतें साझा कर सकते हैं। जहां से उन्हें हमेशा उम्मीद रहती है कि मदद मिल सकती है। ऐसा पढ़ने वालों के प्यार से ही संभव है। आप मित्रों की राय से हम यहां तक पहुंचे, अब अगला सफर दिल्ली का है। मोहब्बतों का यह सिलसिला ऐसे ही बना रहे, बिना मिले, बिना कभी देखे आप सब जो मित्रता निभा रहे हैं, वह एक पूंजी है। आप में से काफी लोग मिलते भी रहते हैं तो उनका भी शुक्रिया।

अगले महीने से दिल्ली में भी ऐसी ही दोस्ती के उम्मीद के साथ धन्यवाद। बीते नौ वर्षों के दौरान मेरे साथ की कोई खट्टी मीठी याद साझा करेंगे तो मुझे अच्छा लगेगा।

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