Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

आज के अखबारों ने ‘आप’ को ‘आपदा’ कहने की हिमाकत का प्रचार किया, केजरीवाल का जवाब कम छपा

भाजपा की आपदा को प्रधानमंत्री ने दिल्ली वालों के लिए आपदा कहने की हिमाकत की, भाजपा की बात करो तो उनका पूरा इको-सिस्टम ‘जनादेश’ और ‘बहुमत’ की बात करने लगेगा – जोर से बोलो जयश्रीराम

संजय कुमार सिंह

वैसे तो आज की खबर यह होनी चाहिये थी कि छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 28 साल के पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या कर दी गई। उनका शव एक ठेकेदार की संपत्ति पर सेप्टिक टैंक में मिला। मुकेश एक स्थानीय समाचार चैनल के लिए काम करते थे। मुकेश ने एक सड़क निर्माण परियोजना में अनियमितताओं के बारे में रिपोर्ट की थी। इसके बाद उन्हें धमकियां मिली थीं।  मुकेश ने 2021 में माओवादियों द्वारा अपहृत सीआरपीएफ जवानों की रिहाई में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आप जानते हैं कि देश की पत्रकारिता इन दिनों राजनीति से बुरी तरह प्रभावित है और इसका श्रेय हिन्दू हृदय सम्राट, 56 ईंची महाराज, महामहिम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को है जो 10 साल में एक भी प्रेस कांफ्रेंस नहीं करके भी तीसरी बार जीत गये और इस जीत का शक ईवीएम पर नहीं जाये इसलिये सीटें कम होने पर लोगों को याद दिलाया, और पूछा ईवीएम जिन्दा है कि मर गया। ऐसे महान प्रधानसेवक ने कल दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पार्टी के प्रचार की शुरुआत की। तो खबर वह भी है या वही है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कल चुनाव प्रचार की शुरुआत और इसमें आम आदमी पार्टी यानी आप की सरकार को आपदा सरकार कहने की हिमाकत की। आज अखबारों ने उसी को पूरा प्रचार दिया है। दैनिक भास्कर ने अपनी खबर के पहले पैरे में लिखा है, दिल्ली के पूर्व सीएम और आप संयोजक अरविन्द केजरीवाल ने पीएम मोदी के आरोपों का जवाब दिया। आज यह खबर लगभग सभी अखबारों में लीड है। दिल्ली का द हिन्दू और कोलकाता का द टेलीग्राफ अपवाद है। हालांकि द हिन्दू में खबर पहले पन्ने पर है। द टेलीग्राफ ने आप के शीश महल के जवाब में नरेन्द्र मोदी के उपहारी ‘शीश महल’ की खबर पहले पन्ने पर छापी है। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर लीड है। आप को आपदा कहने की प्रधानमंत्री की प्रतिभा से आनंदित अंग्रेजी के अखबारों ने भी इसे अंग्रेजी में अपने ढंग से आपदा लिखा है। द हिन्दू और दि एशियन एज ने इसके लिये अंग्रेजी के डिजास्टर शब्द क प्रयोग किया है। कहने की जरूरत नहीं है कि हिन्दी में आप को आपदा कहना तुकबंदी है जो तमाम हिन्दी वाले करते हैं। अंग्रेजी में आम आदमी पार्टी को डिजास्टर कहने के मायने हैं और यह दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को लोक सभा चुनाव में भाजपा को चुनने वाले दिल्ली वालों के लिए सोचने का एक मुद्दा है। अंग्रेजी अखबारों ने हिन्दी में छाप कर इस मुद्दे को खत्म कर दिया है।

नवोदय टाइम्स ने “दिल्ली के लिए आपदा है यह सरकार: मोदी” शीर्षक तो लगाया है पर यह खबर लीड नहीं है। मुझे भी लगता है कि यह खबर लीड नहीं है। 10 साल प्रधानमंत्री रहते और दिल्ली में हर बार आम आदमी पार्टी से बुरी तरह हारने वाले प्रधानमंत्री की हैसियत अब यह नहीं रह गई है कि वे उसे आपदा कहें जिसे जनता बार-बार चुन रही है। उनकी बुरी तरह उपेक्षा करके। वही भाजपा दिल्ली में जीत जाती है तो कहा जा सकता है कि यह ईवीएम का कमाल नहीं है लेकिन तब यह भी मानना पड़ेगा कि आप की जीत भी आम नहीं है। जो भी हो नरेन्द्र मोदी ने दस साल में देश का जो हाल किया है उसमें उन्हें कोई हक नहीं है कि वे आम आदमी पार्टी को आपदा कहें और जब अरविन्द केजरीवाल ने सभी आरोपों का जवाब दे दिया तो उसका नहीं होना भी महत्वपूर्ण है। फिर भी नवोदय टाइम्स ने हाईलाइट किया है, कट्टर बेईमान भी बताया आप को। इसके साथ एक खबर है, करोड़ों के लिए घर बनाया लेकिन अपने लिये नहीं। अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि मैं निजी नहीं होना चाहता। इस तरह उन्होंने बिना कहे कह दिया कि अपने लिये घर की बात तह होती है जब घरवाली हो। मां-बाप (सास-ससुर) भी घर बनाने के लिए सहायता प्रोत्साहन तभी देते हैं जब आप शादी कर लो और पत्नी के साथ रहने लगो। नरेन्द्र मोदी अगर अपने मित्र अदाणी के यहां 20,000 करोड़ रुपये के संदिग्ध निवेश पर चुप हैं को उन्हें घर की जरूरत ही कहां है और लोग देख चुके हैं कि वे प्रधानमंत्री नहीं थे तब भी अदाणी के विमान में चलते थे।

इसलिए, करोड़ों के लिए घर बनाया है लेकिन अपने लिये नहीं – अपनी पीठ खुद थपथपाने से ज्यादा नहीं है। इसमें गुजरात से लेकर डबल इंजन वाले तमाम बुलडोजर राज्यों में कितनों के घर जले, टूटे और उजड़े उसका हिसाब नहीं है। ऐसा कि प्रधानमंत्री प्रेस कांफ्रेंस नहीं कर सकते हैं फिर भी वे ऐसे दावे करने की हिमाकत कर रहे हैं तो सिर्फ इसलिए कि अखबार वाले उनसे सवाल नहीं करते हैं और उनके एकतरफा दावों को छाप देते हैं। वरना उन्होंने जो करोड़ों घर बनाये हैं वो अपने पैसे से नहीं बनाये हैं और पीएम केयर्स के चंदे के पैसे से जो वेंटीलेटर खरीदने से वो नहीं खरीदे गये जिससे कइयों के घर उजड़ गये। जहां तक लोगों को घरों की चाबी देने की बात है, वह उन्हीं के वादों से काफी कम है। केजरीवाल उसका हिसाब लगा चुके हैं और मामला अभी हजार में ही है, लाख में नहीं पहुंचा है। करोड़ों की बात तो बहुत दूर है। वैसे भी 150 करोड़ की अधिकतम आबादी के लिए तीन के औसत से भी घर बनाये जायें तो 50 करोड़ घर की जरूरत ही होगी और करोड़ों घर बने हुए हैं जो मोदी के बनाये नहीं है, उनके बावजूद हैं। ऐसे में मोदी किन करोड़ों घरों की बात कर रहे हैं यह उनसे पूछा जाना चाहिये लेकिन वे हिन्दुओं की रक्षा कर रहे हैं और केजरीवाल ने कल बताया कि दिल्ली की हजारों झुग्गियां तोड़कर कुछ लाख लोगों को बेघर कर चुके हैं। ऐसे में आप समझ सकते हैं कि उनके लिए आप – आपदा क्यों है। मैं नहीं कहता कि अरविन्द केजरीवाल या उनकी पार्टी दूध की धुली है लेकिन भाजपा या नरेन्द्र मोदी खुद दूध के धुले होने का दावा करें तो मानना पड़ेगा कि आप ही दूध है जिसने दिल्ली में उसे बांध रखा है वरना अंतर तो एनसीआर में ही दिख रहे हैं।

दैनिक भास्कर ने प्रधानमंत्री के भाषण के उन अंशों को प्रमुखता से छापा है जो उसकी राय में मुद्दों को धार देंगे। अखबार ने इन दावों के मायने भी बताये हैं लेकिन मुझे लगता है कि केजरीवाल मोदी के खेल में भी उनसे बहुत आगे हैं और आईआईटीयन तो हैं ही जो शिक्षा के बारे में रोज बदलने वाले बयान के मुकाबले स्थिर है और तथ्य है। इसीलिये केजरीवाल ने कहा है और नवोदय टाइम्स में तीन कॉलम में छपा है, “काम की राजनीति भाजपा के लिए आपदा :केजरीवाल”। अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, “सिर्फ घोटाले, आपदा बनकर दिल्ली पर टूट पड़े कट्टर बेईमान लोग : मोदी”। यह दिलचस्प है और सर्वविदित है कि केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना के मुकाबले दिल्ली सरकार के अस्पताल और वहां उपलब्ध सुविधाओं की कोई तुलना नहीं है। फिर भी प्रधानमंत्री ने कहा और केजरीवाल ने कल भी स्पष्ट किया लेकिन अमर उजाला की लीड के साथ शीर्षक है, आयुष्मान को लागू तक नहीं कर रहे। एक शीर्षक है, आपदा को नहीं सहेंगे, बदलकर रहेंगे। सवाल है कि भाजपा को बदलना है या वोटर को। वोटर की पसंद बदल गई है यह जाने बगैर ऐसा दावा कौन कर सकता है और कर रहा है तो क्या मायने हो सकते हैं? कहने की जरूरत नहीं है कि अखबारों को भी लग रहा होगा कि आम आदमी पार्टी के हारने की संभावना कम है और अब तक वह जैसे जीतती रही है वैसे ही इस बार भी जीत जायेगी। तभी अमर उजाला में भी खबर है, “दिल्ली सरकार कर रही है काम की राजनीति : केजरीवाल” उपशीर्षक है, “पूर्व सीएम ने कहा – भाजपा के पास न मुख्यमंत्री का चेहरा न ही एजेंडा, न नैरेटिव”। 

यह संयोग हो या प्रयोग द टेलीग्राफ ने आज ही पहले पन्ने पर छपी खबर में बताया है कि नरेन्द्र मोदी ने 2023 में अपने अमेरिका दौरे के दौरान प्रथम महिला जिल बाइडेन को 20,000 अमेरिकी डॉलर का हीरा उपहार दिया था। खबरों के अनुसार डॉलर के वर्तमान मूल्य के अनुसार इसकी कीमत 17 लाख रुपये होगी। गुरुवार को विदेश विभाग द्वारा प्रकाशित वार्षिक लेखा-जोखा के अनुसार, मोदी द्वारा दिया गया 7.5 कैरेट का हीरा, अगले सबसे महंगे उपहार – ब्रूच (जड़ाऊ पिन) से आगे निकल गया। इसे अमेरिका में यूक्रेन के राजदूत ने दिया था जो 14,063 डॉलर का था। दिलचस्प यह कि तब सरकार ने आरटीआई के तहत इसकी कीमत बताने से भी इनकार कर दिया था। बोले तो भारत की तरफ से उपहार और भारत की जनता को ही कीमत मालूम नहीं और दावा यह कि हमने अपने लिए घर नहीं बनाया।मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपतियों के बीच बैठकों के दौरान उपहार और उनकी कीमतें सुर्खियों में रही हैं। प्रधानमंत्री ने 2015 में दिल्ली में बराक ओबामा के साथ तस्वीर खिंचवाते समय अपना नाम लिखा एक महंगा सूट पहना था। तब इसके औचित्य पर सवाल उठे थे। हालांकि एक व्यवसायी ने मोदी को वह सूट उपहार में देने का दावा किया था। यह सूट गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में “नीलामी में बिकने वाला सबसे महंगा सूट” के रूप में दर्ज हुआ, जब रिपोर्टों के अनुसार, इसे उसी वर्ष बाद में सूरत के एक हीरा व्यापारी ने 4.31 करोड़ में खरीदा था। ऐसे प्रधानमंत्री ने कल लोगों को बताया कि मैं भी शीश महल बनवा सकता था और आज अखबारों ने इसे उनके त्याग के रूप में छापा है। पर जैसा मैं ऊपर लिख चुका, घर तो वो बनवाता है जिसके पास घर वाली हो और शीश महल नहीं बनाया तो विमान खरीदा ही, महंगी गाड़ियों के काफिले में घूमते ही हैं और (बिना जरूरत) नया संसद भवन भी बनवा ही दिया है। यह सब कहा जाता रहा है पर अखबारों में नहीं छपता ताकि उनका कहा गंभीरता से छपे और असर करे।

हिन्दुस्तान टाइम्स ने मोदी की खबर को चार कॉलम में लीड बनाया है। शीर्षक है, दिल्ली में सरंचनाओं के लिए बड़ी घोषणाओं के बीच मोदी ने आपदा सरकार की आलोचना की। इसका जवाब इसके साथ पर नीचे है, प्रधानमंत्री की रैली के बाद केजरीवाल ने पलटवार किया, असली आपदा दिल्ली भाजपा में संकट हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया का शीर्षक है, “आपदा : प्रधानमंत्री ने आप को भ्रष्ट, दिल्ली के लिए आपदा बताकर उसकी आलोचना की”। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर का इंट्रो है, इसपर शहर में काम पर रोक लगाने का आरोप लगाया। मुझे याद आता है कि दिल्ली से लगे गाजियाबाद के वैशाली में एक पार्क होता था। बहुत पहले जब मेट्रो बन रहा था तो वह पार्क खराब या नष्ट हो गया था। मेट्रो ने उस पार्क को फिर से वैसा ही बनाकर दिया था। वह पार्क अब रख-रखाव के बिना बेहाल है। स्वच्छता अभियान के तहत बनाये गये शौंचालयों में कोई भी उपयोग के लायक नहीं है और पार्क में गायें चरती हैं ये तो अब खबर नहीं है। मुझे नहीं लगता (या मिला) कि दिल्ली में कोई भी पार्क इस पार्क की तरह बदहाल हो पर प्रधानमंत्री का आरोप दिल्ली सरकार पर है तो संभव है कि उन्हें वास्तविकता पता नहीं होगी। लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया, उसके रिपोर्टर, संपादक?

इंडियन एक्सप्रेस ने भी इस खबर को लीड बनाया है शीर्षक है चुनाव प्रचार की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने केजरीवाल को निशाना बनाया मैंने लोगों के लिए घर बनाये, शीश महल नहीं। ठीक है कि प्रधानमंत्री ने कहा तो शीर्षक है लेकिन तथ्य यह भी है घर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी नहीं बनाये हैं। कम से कम तब तक तो नहीं ही था जब उनसे अचानक सरकारी घर खाली करवा लिया गया और यह झूठा प्रचार किया गया था कि उन्होंने समय बढ़ाने की मांग की है। मुझे लगता है कि इस फूहड़ राजनीति और ऐसी हल्की बातों के बीच प्रधानमंत्री 10 साल बाद भी ऐसी बात कर रहे हैं तो वह पर्याप्त महत्वपूर्ण है और उसे महत्व देना या नहीं देना पूरी तरह संपादकीय विवेक का मामला है और निर्णय वाकई मुश्किल है। खासकर तब जब चापलूसी करके अपनी गोटी लाल करने में कोई बेशर्मी नहीं हो। सरकार की तरह से ऐसी व्यवस्था भले भ्रष्टाचार हो पर जब इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहना दर्ज कराना हो तो कैसे रहे कहां महत्वपूर्ण है। इंडियन एक्सप्रेस ने साथ की अपनी दूसरी खबर या एक्सप्रेस एक्सप्लेन्ड से बता दिया है कि प्रधानमंत्री ने मोदी मॉडल बनाम केजरीवाल मॉडल के बीच युद्ध की रेखा खींच दी है।

दि एशियन एज की लीड का शीर्षक है, मोदी ने दिल्ली की परियोजनाओं का अनावरण किया, कहा आप का शासन आपदा था। दि हिन्दू में यह खबर पहले पन्ने पर है और इसका शीर्षक है, “मोदी ने आप को एक ‘आपदा’ कहा जिसे हटाने की जरूरत है”। किसी को भी इस शीर्षक से नरेन्द्र मोदी की अपनी सरकार और उसके काम याद आयेंगे। आप जानते हैं कि नरेन्द्र मोदी के शासन को अघोषित इमरजेंसी कहा जाता है और हाल में मनमोहन सिंह के निधन के बाद वह सब याद किया गया जो इन्होंने मनमोहन सिंह के लिए कहा था और मनमोहन सिंह ने इनके लिए कहा था। इन सबसे अलग, तथ्य यह भी है कि पी चिदंबरम ने कहा था कि अर्थशास्त्र का नरेन्द्र मोदी का ज्ञान डाक टिकट के पीछे लिखने के बराबर है और नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी और उसके बाद जीएसटी लागू लागू करके देश की अर्थव्यवस्था का जो किया उसे हर कोई समझ और भोग रहा है। ऐसे में आम आदमी पर मोदी के आरोपों का अपना महत्व है।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन