दैनिक भास्कर अकोला के स्थानीय संपादक के विरुद्ध लैंगिक प्रताड़ना की शिकायत. महिला मानवाधिकार आयोग महाराष्ट्र मुंबई ने एसपी अकोला को जांच कर रिपोर्ट पेश करने हेतु निर्देशित किया. अकोला संस्करण में वुमन भास्कर क्लब संयोजिका और ईवेन्ट कोऑर्डिनेटर रहीं नेहा खत्री की शिकायत पर कार्रवाई…

जबलपुर। दैनिक भास्कर अकोला के स्थानीय संपादक राजीव पिसे के विरुद्ध लैंगिक प्रताड़ना की एक शिकायत पर महिला मानवाधिकार आयोग महाराष्ट्र मुंबई ने सिटी कोतवाली अकोला को त्वरित कार्रवाई कर रिपोर्ट आयोग और शिकायतकर्ता के समक्ष तत्काल पेश करने निर्देशित किया है। यह शिकायत दैनिक भास्कर अकोला संस्करण में सितंबर 2009 से मार्च 2023 तक लगातार 14 साल वुमन भास्कर क्लब संयोजिका और ईवेन्ट कोऑर्डिनेटर रहीं नेहा खत्री ने दर्ज़ कराई है। नेहा इन दिनों जबलपुर में हैं और उन्होंने यहीं से मुम्बई महिला आयोग और जबलपुर पुलिस अधीक्षक के माध्यम से सिटी कोतवाली अकोला को अपना लिखित शिकायती बयान भेज कर न्याय की गुहार लगाई है।
अपनी शिकायत में नेहा खत्री ने अपने 14 साल के कार्यकाल में किए गए अपने तमाम कार्यों, उपलब्धियों और कीर्तिमानों का सिलसिलेवार उल्लेख करते हुए आरोप लगाया है कि उनका यह शिकायती बयान उनकी तमाम उपलब्धियों की हत्या, इनके क्षरण, इनको रौंद डाले जाने के कुचक्रों और लैंगिक भेदभाव तथा नारी उत्पीड़न की एक बड़ी ही वेदनापूर्ण कथा है जिसका खलनायक दैनिक भास्कर अकोला संस्करण का उक्त कथित स्थानीय संपादक है जिसकी क्रूरता, बीमार- आशयों, कुत्सित नीयत, सामंती मानसिकता से उत्पन्न लैंगिक द्वेष के कारण आज वे पूरी तरह विनष्ट होकर अपना शहर छोड़ने पर मजबूर हो गई हैं।
शिकायती बयान के अनुसार जून 2015 में स्थानीय संपादक बनते ही राजीव पिसे ने उनकी जिंदगी और कामयाबी के पर कतरने शुरू कर दिए। सबसे पहले क्रमशः उसने उनकी लाइब्रेरी, वुमन भास्कर क्लब की आलमारी, बैठने की कुर्सी, कंप्यूटर और नारी जगत के साथ उठने-बैठने की जगह उनसे छीन ली। उसे लगा था कि वे अपनी इन सुविधाओं और संसाधनों को पाने के लिए उसके आगे गिड़गिड़ाएंगी और उसकी बीमार और कुत्सित मंशाओं को पूरा करने उसके शोषण का शिकार बन जाएंगी लेकिन वे नहीं झुकी, तब वह तिलमिला गया। उसने समाचारों की क्रेडिट लाइन बार-बार बदलना शुरू कर दी ताकि उनके समाचारों की कोई पहचान ही ना बचे। बयान के अनुसार पिसे को पूरी उम्मीद थी कि अपना काम और सम्मान पाने के लिए वे उसकी ‘हर शर्तें’ मानने तैयार हो जाएंगी लेकिन वे नहीं झुकीं तो उनकी भयावह मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का एक अटूट सिलसिला शुरू हो गया।
नेहा ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि जब भी वे अपनी कोई शिकायत या काम लेकर पिसे के पास जातीं तो उसकी झुकी हुई नजरें उसका कामुकता से मुस्कुराता हुआ चेहरा, उनको अपने सामने बैठाने का उसका ढंग, उसकी शरारती आंखें और उसके मौन से टपकता हुआ ‘एक इशारा’ उन्हें अंदर तक भेद जाता लेकिन वे कुछ नहीं कर पा रही थी। उन्हें अपना करियर बहुत प्यारा था जिसे उन्होंने बड़ी ललक, व्यक्तिगत आकांक्षाओं के परित्याग और कमरतोड़ मेहनत के साथ तैयार किया था।

जब वे उसके इरादों और इशारों की अनदेखी करती गई और उसके नीच इरादों को भांपकर बाद में उसके पास जाना ही बंद कर दिया तो पिसे ने उनका समय देर रात तक का कर दिया। उनकी सहकर्मी महिलाओं को आदेश था कि वह 7:30 – 8:00 बजे तक अपना पेज चेक करवा कर घर निकल जाएं लेकिन उन्हें देर रात तक रोके रखा जाता।
अपनी मंशा को पूरी करने के लिए उसने सुनील दीक्षित नाम के एक सहकर्मी को अपना सहयोगी बना लिया। दीक्षित की भी वही मानसिक और शारीरिक हरकतें और भाव भंगिमाएं थीं जो पिसे की थीं। उन्होंने पिसे से बार-बार आग्रह किया कि वे दीक्षित से अपने पेज चैक नहीं करवा पाएंगी लेकिन पिसे के स्पष्ट आदेश थे कि उन्हें दीक्षित से ही पर चेक कराना है और ‘वह जो कहे वही अंतिम और ब्रह्म वाक्य है’, उसे पूरा करना है।’
नेहा के अनुसार भयादोहन, भयानकता और भयानक प्रताड़ना के इसी दौर में सन् २०१८ में उनके पास अजमेर से एक वैवाहिक प्रस्ताव आया। वे राजू पिसे और यहां की भयानक मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति पाना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने आंख बंद करके बिना कोई छानबीन किए अजमेर का वह वैवाहिक प्रस्ताव स्वीकार कर लिया लेकिन विवाह कुछ घंटे भी नहीं टिका और वे एक भयानक धोखे का शिकार हो गई। अब वे अपना कैरियर और अपने दांपत्य बचाने के दोहरे संघर्ष में पिसने लगीं और बहुत गहरे अवसाद के लक्षण उनमें उपस्थित हो गए। अब उनके सामने दो ही रास्ते थे या तो वे नौकरी छोड़कर आत्महत्या के रास्ते पर निकलतीं या फिर राजीव पिसे की बीमार मानसिकताओं के आगे समर्पण और समझौते का रास्ता अपनातीं। वे ससुराल भी नहीं जा रही थीं इसलिए पिसे की यह कामनाएं और निर्लज्ज रूप से सामने आने लगीं तो हर पल आत्महत्या की कमजोर मानसिकता उनके ज़ेहन में घर करने लगी। देर रात पिसे के इशारे पर सुनील दीक्षित अपनी मनमानी हरकतों पर उतरने की कोशिश करता लेकिन वे उससे दूर भागती और बार-बार पिसे से कहतीं कि इस व्यक्ति से उनके पेज चेक न कराए जाएं और जैसे ही वह (पिसे) घर बुलाकर उनके पेज चेक करता है, तत्काल पेज वापस कर दें ताकि वे सुरक्षित घर निकल सकें लेकिन पिसे ऐसा नहीं करता। उनका घर ऑफिस से 5 से 6 किलोमीटर शहर के बाहर है, कभी-कभी उन्हें 11:30 और 12:00 बजे जब देर रात घर लौटना पड़ता तो वे घर जाकर बिना खाए रोते हुए चुपचाप सो जाती।
नेहा ने अपने बयान में कहा है कि पिसे की इस हरकत को रंजिश, घृणा, हिंसा, प्रताड़ना, लैंगिक शोषण की कुत्सित मंशाओं से किया भयादोहन और नारी उत्पीड़न का अपराध मानती हुई वे यह शिकायती बयान दर्ज करवा रही हैं! आखिर किन तर्कों, तौर-तरीकों और तकनीकों के चलते उसने बारंबार ऐसा किया? ईवेन्ट्स क्यों रोक दिए गए? क्या इसलिए नहीं कि उनका अस्तित्व ही समाप्त हो जाए? एक युग की कमरतोड़ मेहनत से जुटाई अपनी पहचान ही वे खो बैठें? बीट अचानक अकारण बदल दी जाती रही, क्यों?।
वे एक व्यक्ति के लैंगिक पक्षपात-पुरुषप्रधान ‘उच्चग्रंथि’ की कुंठित मनोदशा,भाषायी दुराग्रहों और उसके दमित अंतराल के ऊहापोहों की बलि चढ़ी हैं। अंततः वुमन भास्कर क्लब और वुमन भास्कर पृष्ठ ही बंद कर दिया गया। क्या यह नारी-द्रोह नहीं? क्या यह किसी व्यक्ति की संकीर्ण सामंती मानसिकता की प्रवंचना नहीं??
बयान में नेहा ने आरोप लगाया है कि एक नारी, पुरुषों के बीच अपनी बात खुलकर नहीं कह पाती, बहुत सी मर्यादाएं उसे घेरे रहती हैं। खुलकर कहने के बाद वह पुरुष मानसिकता के बीच उपहास का ही केन्द्र बनती है। विशाखा समिति की अनुशंसाओं के अनुरूप दैनिक भास्कर में कोई ‘महिला समिति’ भी नहीं है जिसके आगे शिकायत करतीं। यह अपने आप में ही नियमों का भयानक उल्लंघन है। बयान में कहा गया है कि अपना इस्तीफा जब उन्होंने चेयरमैन को भेजा तो वे नारी मर्यादाओं के वश बहुत सी बातें खुलकर नहीं कह पाई लेकिन अब जब वे पुलिस और महिला आयोग के आगे अपनी शिकायत दर्ज करा रही हैं तो वे नारी उत्पीड़न की इन घटनाओं का खुलकर वर्णन कर रही हैं।
बयान में कहा गया है कि साढ़े तेरह साल पुरानी और मेहनत से की गई नौकरी को छोड़ना आत्महत्या से बदतर होता है। कोई महिला जो ससुराल की न हो, पति लापता सा हो, घर से कमजोर और केवल अपनी नौकरी और मेहनत के दम पर जीवित हो यदि वह नौकरी छोड़ने पर आमादा हो जाए तो उसके अंतराल में मचल रहे तूफान/धर्मसंकट और वेदना का अंदाज लगाया जा सकता है। बयान में कहा गया है कि रोज रोज की आत्मघाती मानसिकता में दम घोंटकर जीते रहने की बजाय अंततः वे त्यागपत्र सौंपकर सकुशल बाहर आ गई हैं और उन्होंने महिला मानव अधिकार आयोग और पुलिस के समक्ष विषय के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई है।
अपने बयान में नेहा ने राजीव पिसे के विरुद्ध लैंगिक प्रताड़ना, भावनात्मक भयादोहन, नारी उत्पीड़न और उनके समस्त मानवाधिकारों के जघन्य उल्लंघन के विधानों के तहत कठोर कार्यवाही की मांग करते हुए न्याय दिलाने की मांग की है।


